■ हिराई महोत्सव से सांसद धानोरकर के वॉकआउट से आदिवासी समाज में नाराज़गी
■ भद्रावती के ग्रेटा एनर्जी उद्घाटन में सांसद को भाषण का मौका तक नहीं दिया, लेकिन तब CM के समक्ष याद न आया प्रोटोकॉल और न ही कर पाईं वॉकआउट
चंद्रपुर.
कांग्रेस सांसद प्रतिभा धानोरकर, जो स्वयं अपने सोशल मीडिया पर कल, 20 अप्रैल 2026 को आयोजित हुए राजमाता रानी हिराई जन्मोत्सव को ’सुसंपन्न सम्मेलन’ लिख गईं, वही सांसद इस महोत्सव में अवमानना होने की बात कहते हुए वॉकआउट भी कर गईं। सांसद धानोरकर का आरोप है कि इस आदिवासी व सांस्कृतिक विभाग के इस कार्यक्रम में विधायक के साथ आए राजनीतिक पदाधिकारी-कार्यकर्ताओं का सत्कार किया गया। यह सत्कार सांसद महोदया को नागवार गुज़रा। उनकी आपत्ति यह है कि उनके भाषण के वक्त एक विधायक का बाजे-गाजे के साथ स्वागत किया गया, उनके भाषण के बाद विधायक महोदय का भाषण होने दिया गया, जबकि सांसद के भाषण के बाद केवल पालकमंत्री ही भाषण दे सकते हैं। इस बात पर उनका पारा चढ़ गया और प्रशासन को फटकार लगाते हुए उन्होंने कार्यक्रम स्थल से वॉकआउट कर दिया। जबकि यहां हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय जुटा हुआ था। उनकी भावनाओं की परवाह भी सांसद धानोरकर ने नहीं की। इसे प्रोटोकॉल उल्लंघन बताते हुए मनपा आयुक्त, जिलाधिकारी के खिलाफ सांसद धानोरकर ने लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत की है। अपितु कानून के जानकार बताते हैं कि यह मामला शिष्टाचार की चूक का बनता है, प्रोटोकॉल उल्लंघन का नहीं।
हैरत करने वाली बात तो यह है कि 14 मार्च 2026 को सांसद प्रतिभा धानोरकर के गृह क्षेत्र भद्रावती के MIDC परिसर में जब न्यू एरा क्लीनटेक प्रा. लि. एवं ग्रेटा एनर्जी प्रा. लि. परियोजनाओं का भूमिपूजन प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में आयोजित किया गया था, तब तो सांसद महोदया को भाषण करने का मौका तक नहीं दिया गया। स्थानीय सांसद को दरकिनार किए जाने के इस मामले में धानोरकर ने न तो इस उद्योगपतियों के कार्यक्रम का बहिष्कार किया, न इस कार्यक्रम से वॉकआउट किया और न ही लोकसभा अध्यक्ष से इसकी शिकायत की। इसके चलते आदिवासी समुदाय अब इस दोहरी नीति को लेकर सवाल पूछने लगा है। चर्चा करने लगा है कि आदिवासी समुदाय के कार्यक्रम में ही वॉकआउट क्यों? उद्योगपतियों के कार्यक्रम में क्यों नहीं किया वॉकआउट?
■ सांसद धानोरकर का तर्क – आरोप
कांग्रेस सांसद प्रतिभा धानोरकर ने अनुसार सरकारी कार्यक्रम में महिला सांसद की अवमानना की गई। उनके विशेषाधिकार का उल्लंघन किया गया। जिला प्रशासन ने जानबूझकर राजशिष्टाचार का उल्लंघन किया। स्थानीय नेताओं के भाषणों को मौका देकर उनका भाषण संक्षेप व जल्दबाज़ी में निपटाने के लिए बाध्य किया। सरकारी निधि से आयोजित कार्यक्रम को एक खास दल के निजी सम्मेलन में तब्दील किया। निमंत्रण पत्रिका में नाम न होने वालों का मंच पर सत्कार किया गया। इसके लिए मनपा आयुक्त व जिलाधीश ज़िम्मेदार हैं। महिला जनप्रतिनिधि के साथ अनुचित बर्ताव किया गया। कार्यक्रम के शुरुआत से ही राजशिष्टाचार का पालन नहीं किया गया। सांसद के भाषण के बाद विधायक का भाषण रखा गया, जबकि सांसद के भाषण के बाद केवल मंत्री का भाषण ही हो सकता है। भाजपाई नेताओं के सर्वत्र बैनर लगाए गए। सांस्कृतिक विभाग द्वारा इस कार्यक्रम के लिए 25 लाख रुपये दिए गए। मनपा ने 15 लाख रुपये दिए। पालकमंत्री ने स्वयं 10 लाख रुपये दिए। बैनरों से ज्ञात होता है कि विधायक सुधीर मुनगंटीवार के प्रयासों से यह लाखों की निधि मिली। भले ही निधि की मंजूरी के लिए उनके प्रयास होंगे, लेकिन यह कार्यक्रम सांस्कृतिक विभाग का होने के चलते श्रेय लेने की मर्यादा होनी चाहिए। करीब ढाई घंटे तक विधायक मुनगंटीवार की प्रतीक्षा की गई। इस कार्यक्रम को भाजपा सम्मेलन बनाया गया।
■ ढेरों आपत्तियां तो तारीफ़ क्यों? – ‘सोहळा सुसंपन्न’
सांसद प्रतिभा धानोरकर के अनगिनत आरोप एवं प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर उनकी भूमिका को देखते हुए क्षण भर के लिए लगता है कि वे काफ़ी आक्रामक ढंग से इस मामले को देख रही हैं। परंतु दूसरे ही पल हम जब उनके सोशल मीडिया पर लिखे पोस्ट पर गौर करते हैं तो ज्ञात होता है कि वे इस सम्मेलन को सुसंपन्न लिख चुकी हैं। वे लिखती हैं कि जिला प्रशासन की ओर से आयोजित राजमाता रानी हिराई जन्मोत्सव सम्मेलन कोहिनूर मैदान में बड़े उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस मौके पर राज्य के आदिवासी विकास मंत्री तथा जिले के पालकमंत्री डॉ. अशोक उईके उपस्थित थे। साथ ही महापौर संगीता खांडेकर, विधायक सुधीर मुनगंटीवार, किशोर जोरगेवार, जिलाधिकारी वसुमना पंत, सीईओ पुलकित सिंह, आयुक्त अकुनुरी नरेश, जयश्री जुमडे, मनस्वी गिऱ्हे, संगीता भोयर, सईदा शेख एवं सभी नगरसेवक व पदाधिकारी उपस्थित थे। यह सम्मेलन सुसंपन्न हुआ। जी हां, सु-संपन्न।
■ जानकार क्या कहते हैं?
सरकारी कार्यक्रम में किसी खास दल के कार्यकर्ताओं का सत्कार करना अथवा सांसद के बाद विधायक का भाषण होना स्वतः प्रोटोकॉल उल्लंघन नहीं माना जाता। Order of Precedence बनाम Speaking Order – भारत सरकार का “Order of Precedence” पदों की वरिष्ठता तय करता है (जिसमें सांसद, विधायक से ऊपर होते हैं), लेकिन यह सूची मुख्यतः लागू होती है – बैठने की व्यवस्था, स्वागत/सम्मान क्रम। भाषण का क्रम (speaking order) इसके दायरे में सख्ती से नहीं आता।
सरकारी कार्यक्रम में भाषण का क्रम यह आमतौर पर तय करते हैं – जिला प्रशासन / आयोजन समिति, कार्यक्रम का स्वरूप (स्थानीय vs राज्य/राष्ट्रीय), प्रोटोकॉल अधिकारी की सलाह। कई बार क्रम ऐसा रखा जाता है कि पहले स्थानीय प्रतिनिधि (विधायक), बाद में वरिष्ठ (सांसद / मंत्री) या मुख्य अतिथि अंत में बोलता है।
हालांकि नियम का उल्लंघन नहीं है, लेकिन विवाद बन सकता है यदि जानबूझकर वरिष्ठ जनप्रतिनिधि (सांसद) की गरिमा कम की जाए, प्रोटोकॉल अधिकारी की सलाह को नज़रअंदाज़ किया जाए, कार्यक्रम उच्च स्तर का हो (राज्यपाल/मंत्री की मौजूदगी में) और स्थापित परंपरा तोड़ी जाए। ऐसे मामलों में इसे “शिष्टाचार की चूक” (breach of etiquette) कहा जाता है, न कि कानूनी उल्लंघन।
■ तब मैडम धानोरकर चुप क्यों थीं?
अब जब राजमाता रानी हिराई महोत्सव में सांसद प्रतिभा धानोरकर के वॉकआउट को लेकर आदिवासी समुदाय में नाराज़गी का सुर दिखाई पड़ रहा है, वहीं यह सवाल भी ज़ोरदार ढंग से उठाया जाने लगा है, या यूं कहें तो सांसद की नीति पर आम जनता में चर्चा होने लगी है कि जब भद्रावती में CM देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में उन्हें भाषण देने नहीं दिया गया, तो तब सांसद धानोरकर ने वॉकआउट क्यों नहीं किया? उस समय भी तो यह प्रोटोकॉल से संबंधित मामला था। चूंकि चंद्रपुर लोकसभा संसदीय क्षेत्र अर्थात भद्रावती में कार्यक्रम हो रहा था और स्थानीय सांसद धानोरकर को अपने विचार रखने का मौका भी नहीं दिया गया। 14 मार्च 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम पर तो सांसद महोदया ने कोई नाराज़गी नहीं जताई और न ही लोकसभा के अध्यक्ष से इसकी शिकायत की।
लोग चर्चा करने लगे हैं कि उद्योगपतियों के कार्यक्रम की अवमानना सांसद धानोरकर ने हज़म की, परंतु आदिवासियों से संबंधित सांस्कृतिक विभाग के कार्यक्रम में चंद अधिकारियों से जाने-अनजाने में अनवधान के कारण हुई चूक को वे प्रोटोकॉल का उल्लंघन मान बैठी हैं। यह दोहरी नीति अब आदिवासी समाज में चर्चा का विषय बनता जा रहा है।








