■ SP सक्रिय, लेकिन पुलिस महकमा कैसे पड़ गया कमजोर?
■ झिमरी व ठक्कर का मोबाइल एक्टिव होने के बाद भी 25 दिनों तक गिरफ्तार नहीं कर पाई थी पुलिस
चंद्रपुर :
जिले में अवैध सुगंधित तंबाकू और गुटखा कारोबार के खिलाफ पुलिस अधीक्षक आयुष नोपाणी ने पिछले कुछ महीनों में लगातार आक्रामक अभियान चलाया है। MD ड्रग्स से लेकर अवैध तंबाकू कारोबार तक पुलिस की कार्रवाई ने कई तस्करों की नींद उड़ा दी। अवैध कारोबारियों के खिलाफ लगातार छापेमारी, बड़ी जब्ती और संगठित अपराध के तहत की जा रही कार्रवाई को जिले में सराहनीय माना गया। इसके बावजूद एक बड़ा सवाल आज भी खड़ा है कि जब पुलिस अधीक्षक स्वयं इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं, तब जिले के कई हिस्सों में सुगंधित तंबाकू की खुलेआम बिक्री आखिर क्यों नहीं रुक पा रही है? शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पान ठेलों और दुकानों पर प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद से बनने वाला खर्रा आज भी आसानी से उपलब्ध हैं। इससे पुलिस की स्थानीय कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
इस पूरे प्रकरण का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह भी रहा कि अवैध तंबाकू तस्करी के 2 प्रमुख आरोपी वसीम अख्तर झिमरी और जयसुखलाल अंबाराम ठक्कर पर अपराध दर्ज करने की पुलिस कार्रवाई के बाद लगभग 25 दिनों तक गिरफ्त से बाहर रहे। चर्चा है कि इस दौरान उनके मोबाइल फोन सक्रिय थे और सोशल मीडिया, विशेषकर व्हाट्सएप पर वे लगातार स्टेटस भी अपडेट कर रहे थे। इसके बावजूद पुलिस की तकनीकी और विशेषज्ञ टीम उन्हें तलाशने में सफल नहीं हो सकी। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब डिजिटल लोकेशन और तकनीकी संसाधन उपलब्ध थे, तब आखिर इन आरोपियों तक पुलिस क्यों नहीं पहुंच सकी?
इसी दौरान दोनों आरोपियों को नागपुर के उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का पर्याप्त समय मिल गया और अंततः उन्हें उच्च न्यायालय से राहत भी प्राप्त हो गई। भले ही उन्हें बाद में कानूनी प्रक्रिया के तहत जमानत मिल गई हो, लेकिन पुलिस की गिरफ्त से 25 दिनों तक बाहर रहने की पूरी परिस्थितियों की समीक्षा होना आवश्यक मानी जा रही है। यह भी जांच का विषय है कि आखिर पुलिस की कार्रवाई में ऐसी कौन-सी कमजोरी रही, जिसका लाभ आरोपियों को मिला ?
हालांकि पुलिस विभाग ने अवैध तंबाकू कारोबारियों के खिलाफ और अधिक सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। बार-बार अपराध करने वाले तंबाकू माफिया पर केवल सामान्य धाराओं में कार्रवाई करने के बजाय संगठित अपराध के रूप में कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग लंबे समय से उठ रही थी। इसी दिशा में पुलिस ने दो प्रमुख आपराधिक गिरोहों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 111 के तहत संगठित अपराध का मामला दर्ज किया है। इसे जिले में गुटखा माफिया के खिलाफ अब तक की सबसे महत्वपूर्ण प्रतिबंधात्मक कार्रवाई माना जा रहा है।
पहले गिरोह में वसीम अख्तर झिमरी, सिद्धांत गोंडाणे तथा मोहम्मद अखिल शकील शेख को आरोपी बनाया गया था, जबकि दूसरे गिरोह में जयसुखलाल अंबाराम ठक्कर और अजयकुमार विजयकुमार गुंडोजवार के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। पुलिस जांच में सामने आया कि इन आरोपियों के खिलाफ चंद्रपुर, वर्धा और गड़चिरौली सहित विभिन्न जिलों में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, भारतीय दंड संहिता तथा भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत पहले से कई गंभीर प्रकरण दर्ज हैं। लगातार अपराध करने के इस रिकॉर्ड को देखते हुए पुलिस ने उनके खिलाफ बीएनएस की धारा 111 के तहत संगठित अपराध की कार्रवाई करते हुए कड़ा संदेश देने का प्रयास किया है।
यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक आयुष नोपाणी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ईश्वर कातकड़े, एसडीपीओ प्रमोद चौगुले तथा पुलिस निरीक्षक प्रभावती एकुरके के मार्गदर्शन में जांच अधिकारी पीएसआई हिराचंद गव्हारे और एपीआई सचिन राखोंडे ने पूरी की।
अब जबकि पुलिस ने संगठित अपराध के तहत कड़ी कार्रवाई की शुरुआत कर दी है, जिलेवासियों की अपेक्षा है कि इसका असर केवल कागजों तक सीमित न रहे। प्रतिबंधित सुगंधित तंबाकू की खुलेआम बिक्री पर पूरी तरह अंकुश लगे, फरार रहने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी में हुई देरी जैसी परिस्थितियों की निष्पक्ष समीक्षा हो तथा पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई जारी रखी जाए। तभी इस अभियान का वास्तविक उद्देश्य सफल माना जाएगा। साथ ही वर्तमान में चंद्रपुर के चप्पे-चप्पे पर बिकने वाले खर्रे को पुलिस कैसे और कब रोक पाएगी, यह सवाल बरकरार है।










