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मयूर कॉम्प्लेक्स की सड़क पर रतिलाल चौव्हाण का कब्जा, मनपा एक साल से नींद में

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■ 12 परिवारों की लगातार शिकायतों को अनदेखा कर रहे मनपा आयुक्त

चंद्रपुर।
चंद्रपुर महानगरपालिका का अतिक्रमण विरोधी अभियान अक्सर गरीबों और छोटे दुकानदारों तक सीमित दिखाई देता है, लेकिन जब प्रभावशाली लोगों द्वारा सार्वजनिक सरकारी सड़क पर कब्जा कर निर्माण किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं, तब पूरा प्रशासन रहस्यमय चुप्पी साध लेता है। इसका ताजा उदाहरण मुल रोड स्थित शास्त्रीनगर के मच्छीनाला क्षेत्र में सामने आया है, जहां सार्वजनिक सड़क पर कथित अतिक्रमण के खिलाफ पिछले एक वर्ष से शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन महानगरपालिका आज तक सड़क को अतिक्रमण मुक्त नहीं करा सकी है। मनपा आयुक्त अकुनूरी नरेश को शिकायत देने के बावजूद वे चुप बैठ गये। वहीं जिले के पालकमंत्री, जिलाधिकारी एवं विधायक से भी शिकायत करने पर समस्या हल न हो सकीं।
मयूर कॉम्प्लेक्स की बिल्डिंग क्रमांक-4 में रहने वाले 12 फ्लैटधारकों ने सहायक आयुक्त, जोन क्रमांक-3 को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि पड़ोसी भूखंड पर यहां के निवासी रतिलाल चौव्हाण द्वारा किए गए अवैध निर्माण के कारण सार्वजनिक सड़क पर अतिक्रमण हो गया है, जिससे क्षेत्र के नागरिकों का सामान्य आवागमन प्रभावित हो रहा है।

■ शिकायत हुई, जांच हुई, नोटिस भी दिया गया… फिर कार्रवाई क्यों नहीं ?
शिकायतकर्ताओं के अनुसार इस मामले की पहली शिकायत 14 जुलाई 2025 को जिलाधिकारी और महानगरपालिका आयुक्त के समक्ष की गई थी। शिकायत के बाद जोन क्रमांक-3 के तत्कालीन अभियंता शुभम वर्गट ने 16 जुलाई 2025 को स्थल निरीक्षण कर निर्माण कार्य रुकवाया था। इसके बाद संबंधित पक्ष को 1 अक्टूबर 2025 को नोटिस भी जारी की गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब महानगरपालिका स्वयं नोटिस जारी कर चुकी थी, तब आज तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई ?
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नोटिस जारी होने के बावजूद संबंधित व्यक्ति ने 24 सितंबर 2025 से पुनः निर्माण कार्य शुरू कर दिया और महानगरपालिका मूकदर्शक बनी रही।

■ सड़क सिकुड़ी, नागरिकों का जीवन हुआ मुश्किल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अतिक्रमण के कारण सड़क की चौड़ाई कम हो गई है। इससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और मयूर कॉम्प्लेक्स में रहने वाले परिवारों को अपने वाहन खड़े करने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नागरिकों का आरोप है कि जिस सड़क का उपयोग सभी लोग करते थे, वह अब धीरे-धीरे निजी कब्जे की भेंट चढ़ती जा रही है और प्रशासन तमाशबीन बना हुआ है।

■ बिजली पोल को सड़क पर खिसकाने का आरोप
शिकायत में एक और गंभीर मुद्दा उठाया गया है। आरोप है कि सड़क किनारे स्थित पुराने विद्युत पोल को हटाकर उसे सड़क पर ही दूसरे स्थान पर स्थापित कर दिया गया है। यह स्थान बच्चों के खेलने के क्षेत्र के समीप है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भविष्य में कोई दुर्घटना या करंट लगने जैसी घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

■ आग लगी तो फायर ब्रिगेड भी नहीं पहुंच पाएगी!
शिकायतकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अतिक्रमण के कारण सड़क इतनी संकरी हो गई है कि भविष्य में किसी दुर्घटना, गंभीर बीमारी अथवा आग लगने जैसी आपात स्थिति में एंबुलेंस और अग्निशमन वाहन तक प्रभावित क्षेत्र तक नहीं पहुंच पाएंगे।
ऐसी स्थिति में किसी भी अप्रिय घटना के लिए सीधे तौर पर प्रशासन की निष्क्रियता जिम्मेदार मानी जाएगी।

■ मंत्री, विधायक, जिलाधिकारी तक पहुंची शिकायत
पीड़ित फ्लैटधारकों ने केवल महानगरपालिका तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने इस मामले की शिकायत आदिवासी विकास मंत्री एवं जिला पालकमंत्री, चंद्रपुर के विधायक तथा जिलाधिकारी को भी सौंप रखी है। इसके बावजूद अब तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं होने से नागरिकों में भारी नाराजगी है।

■ मनपा के अतिक्रमण विभाग की भूमिका कटघरे में
यह मामला एक बार फिर महानगरपालिका के अतिक्रमण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। जब शिकायतें दर्ज हैं, निरीक्षण हो चुका है, नोटिस जारी हो चुकी है और प्रशासन को पूरे घटनाक्रम की जानकारी है, तब भी अतिक्रमण जस का तस बना हुआ है।
नागरिक सवाल पूछ रहे हैं कि क्या अतिक्रमण हटाने के नियम केवल गरीबों और फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वालों के लिए हैं? यदि नहीं, तो फिर सार्वजनिक सड़क पर हुए कथित कब्जे के खिलाफ बुलडोजर क्यों नहीं चल रहा?

■ जवाब मांग रहा है शहर
इस पूरे प्रकरण ने महानगरपालिका आयुक्त, संबंधित जोन अधिकारियों और अतिक्रमण विभाग की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि सरकारी सड़क पर कब्जे की शिकायत के बावजूद महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह केवल प्रशासनिक सुस्ती नहीं बल्कि व्यवस्था की विफलता का मामला बन जाता है।
अब नागरिकों की मांग है कि सड़क की तत्काल माप-जोख कर अतिक्रमण की स्थिति सार्वजनिक की जाए, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो तथा सड़क को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी दुर्घटना या जनहानि की नौबत न आए।

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