Home चंद्रपूर यवतमाल के रिसॉर्ट में बैठकर गुटनेता अड्डूर के खिलाफ व्यूह-रचना

यवतमाल के रिसॉर्ट में बैठकर गुटनेता अड्डूर के खिलाफ व्यूह-रचना

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■ चर्चा : 10-10 लाख के चुनावी लाभ के बाद राजनीतिक गेम चेंज करने का प्लान
■ नगरसेवकों के टूर स्पॉन्सर व खर्चों पर जांच एजेंसियों का ध्यान क्यों नहीं?

चंद्रपुर।
इन दिनों चंद्रपुर मनपा की राजनीति में कांग्रेस की कलह चरम पर पहुंच गई है। कांग्रेस नगरसेवकों के गुटनेता राजेश अडूर को हटाने की कवायद जहां एक ओर कांग्रेस के गुट ने तेज कर दी हैं, वहीं दूसरी ओर अडूर ने इसे षड़यंत्र करार देते हुए उन्हें दलित होने की वजह से निशाना बनाने की करतूत होने का दावा किया है। बहरहाल सूत्र बताते हैं कि यवतमाल के एक रिसॉर्ट में राजनीतिक नेता के स्पॉन्सरशिप पर कुछ नगरसेवकों को छुटि्टयों का आनंद उठाने के लिए रखा गया है। चर्चा है कि विधान परिषद में 5 – 5 लाख रुपये से लाभान्वित होने के बाद अब गुटनेता अड्‌डूर को बदलने का गेम करने के लिए पुन: 5 – 5 लाख रुपयों की सौगात मिली। कहा जा रहा है कि लाभ पाकर इधर से उधर पल्टी मारने वाले कुछ नगरसेवकों को टूर का आनंद चखाने के लिए राजनीतिक नेताओं ने यवतमाल टूर स्पॉन्सर कर नई चाल चल दी। लेकिन हैरत की बात यह है कि इन सभी चर्चाओं, गत दिनों से जारी 5-5 लाख बांटने के आरोपों और खर्चों पर हो रही अटकलों की जांच सरकार की जांच एजेंसियों क्यों नहीं कर पा रही है ? क्या जांच एजेंसियों का इस पर ध्यान नहीं है ?

■ कांग्रेस के 2 गुट आमने-सामने, अनेक पार्षदों के मोबाइल बंद
चंद्रपुर महानगरपालिका में कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चल रही गुटबाजी अब एक बार फिर खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। मनपा चुनाव में सबसे बड़े दल के रूप में उभरने वाली कांग्रेस शुरू से ही दो प्रमुख खेमों में बंटी हुई मानी जाती रही है। अब इसी आंतरिक संघर्ष ने नया मोड़ ले लिया है और कांग्रेस के गुटनेता राजेश अडूर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारियों की चर्चा राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई है।
मनपा में कांग्रेस के गुटनेता पद को लेकर पहले भी दोनों गुटों के बीच तीखा संघर्ष हुआ था। मामला पार्टी नेतृत्व तक पहुंचा था, जिसके बाद दिल्ली स्तर पर निर्णय लेते हुए राजेश अडूर को कांग्रेस का गुटनेता नियुक्त किया गया था। लेकिन अब उन्हें पद से हटाने के लिए दूसरा गुट सक्रिय हो गया है।

■ अविश्वास प्रस्ताव के लिए संख्या जुटाने की कवायद
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, गुटनेता के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए आवश्यक संख्या बल जुटाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि अभी भी आवश्यक आंकड़ा हासिल करने के लिए लगभग 8 पार्षदों की जरूरत है। हालांकि चर्चा यह भी है कि कुछ पार्षद अपना पाला पलट रहे हैं, इससे राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। संभावित राजनीतिक नुकसान को रोकने के लिए पार्षदों से लगातार संपर्क साधा जा रहा है।

■ कई पार्षदों के मोबाइल बंद, राजनीतिक सस्पेंस गहराया
बताया जा रहा है कि कांग्रेस के कुछ पार्षदों के मोबाइल फोन पिछले कुछ समय से “नॉट रीचेबल” आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी ऐसी खबरें प्रसारित हुई हैं कि कुछ पार्षदों को अज्ञात स्थान पर (यवतमाल के रिसॉर्ट में) ले जाया गया है तथा उनके मोबाइल फोन बंद रखे गए हैं। इससे राजनीतिक खरीद-फरोख्त और शक्ति प्रदर्शन की अटकलों को और बल मिला है।

■ राजेश अडूर का पलटवार : दलित होने के कारण हो रहा विरोध
उधर, पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के गुटनेता राजेश अडूर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें गुटनेता पद से हटाने की कोशिश केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक मानसिकता से प्रेरित है।
अडूर का कहना है कि कांग्रेस के कुछ नेताओं को दलित समाज का व्यक्ति गुटनेता पद पर होना स्वीकार नहीं है। इसी वजह से उनके खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दलित होने के कारण ही उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा है।
अडूर ने दावा किया कि कांग्रेस के अधिकांश पार्षद आज भी उनके संपर्क में हैं और विरोधी गुट के पास गुटनेता बदलने के लिए आवश्यक संख्या बल नहीं है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चाहे कितने भी राजनीतिक दांव-पेच अपनाए जाएं, उन्हें हटाने का प्रयास सफल नहीं होगा।

■ कांग्रेस के लिए बढ़ सकती है मुश्किल
चंद्रपुर मनपा में कांग्रेस के भीतर चल रही यह रस्साकशी अब केवल गुटनेता पद तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह पार्टी के भविष्य और संगठनात्मक एकता के लिए भी चुनौती बनती जा रही है। यदि दोनों गुटों के बीच समझौता नहीं हुआ तो इसका असर मनपा की राजनीति के साथ-साथ जिले की कांग्रेस इकाई पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह गुट आवश्यक संख्या जुटाकर राजेश अडूर को पद से हटा पाएगा, या फिर अड्‌डूर अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रहेंगे। आने वाले दिनों में कांग्रेस के भीतर की यह लड़ाई किस दिशा में जाती है, इस पर पूरे जिले की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं।

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