■ SP साहब की सराहनीय पहल : आखिरकार तंबाकू तस्करों पर प्रतिबंधित कार्रवाई
■ MD और तंबाकू माफिया पर कहर बनकर बरस रहे SP
चंद्रपुर।
लगातार जनहित के मुद्दे उठाने वाली चंद्रपुर की बुलंद आवाज द्वारा प्रतिबंधित गुटखा, पान मसाला, सुगंधित तंबाकू और हुक्का तंबाकू के संगठित अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए गए अभियान का बड़ा असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। वर्षों से जिले में सक्रिय तंबाकू माफिया के खिलाफ केवल सामान्य अपराध दर्ज करने की बजाय संगठित अपराध के रूप में कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग लगातार उठाई जा रही थी। अब जिला पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी के नेतृत्व में पुलिस विभाग ने इस दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए दो संगठित गिरोहों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 के तहत कार्रवाई की है।
इसे जिले में प्रतिबंधित तंबाकू कारोबार के खिलाफ अब तक की सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक कार्रवाई माना जा रहा है। पुलिस की इस पहल से यह स्पष्ट संकेत गया है कि अब बार-बार अपराध करने वाले तंबाकू तस्करों को केवल मामूली धाराओं के सहारे बच निकलने नहीं दिया जाएगा।
■ न्यायालय ने भी माना, ये करते हैं बार-बार अपराध
पुलिस कार्रवाई के बीच जिला एवं सत्र न्यायालय ने भी कुख्यात तंबाकू कारोबारी वसीम अख्तर जिमरी और जयसुख ठक्कर की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड प्रथम दृष्टया यह दर्शाते हैं कि आरोपी समान प्रकृति के अपराधों में बार-बार शामिल रहे हैं और उनका आपराधिक इतिहास गंभीर है।
न्यायालय ने माना कि पूरे सप्लाई नेटवर्क, भंडारण केंद्रों, परिवहन व्यवस्था और आर्थिक लेन-देन की जांच के लिए आरोपियों से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत की इस टिप्पणी ने उन आशंकाओं को भी बल दिया है कि जिले में प्रतिबंधित तंबाकू का कारोबार किसी अकेले व्यक्ति का नहीं बल्कि एक संगठित सिंडिकेट का हिस्सा है।
■ चंद्रपुर की बुलंद आवाज लगातार उठाती रही थी सवाल
चंद्रपुर की बुलंद आवाज* ने पिछले कई महीनों से यह प्रश्न उठाया था कि जब कुछ तंबाकू कारोबारी वर्षों से बार-बार अपराध करते हुए पकड़े जा रहे हैं तो उनके खिलाफ MCOCA, तड़ीपारी और संगठित अपराध जैसी कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती।
हमने यह भी सवाल उठाया था कि यदि गौ-तस्करी, मादक पदार्थों और अन्य संगठित अपराधों पर कड़े कानून लागू हो सकते हैं, तो युवाओं को कैंसर की ओर धकेलने वाले तंबाकू सिंडिकेट पर ऐसे कानून लागू करने में हिचक क्यों?
अब पुलिस द्वारा धारा 111 के तहत की गई कार्रवाई को आमजन और सामाजिक संगठनों द्वारा “चंद्रपुर की बुलंद आवाज का इम्पैक्ट” माना जा रहा है।
■ SP आयुष नोपानी से बढ़ी जनता की उम्मीदें
जिले में MD, नशीले पदार्थों और अवैध तंबाकू कारोबार के खिलाफ लगातार चल रही कार्रवाई के कारण पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी की कार्यशैली की व्यापक सराहना हो रही है। स्थानीय अपराध शाखा और विभिन्न पुलिस टीमों द्वारा लगातार छापेमारी कर लाखों रुपये का प्रतिबंधित माल जब्त किया जा रहा है।
जनता को उम्मीद है कि जिस तरह पुलिस ने संगठित अपराध की दिशा में पहला कदम उठाया है, उसी प्रकार आगे चलकर तंबाकू सिंडिकेट की आर्थिक जड़ों तक पहुंचकर उसके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जाएगा।
■ फरार आरोपी अब भी गिरफ्त से बाहर
हालांकि कार्रवाई के बावजूद कई सवाल अभी भी बने हुए हैं। पुलिस रिकॉर्ड में वसीम जिमरी और जयसुख ठक्कर को फरार बताया गया है। वहीं शहर में यह चर्चा भी है कि कुछ आरोपी समय-समय पर अपने परिचित क्षेत्रों में दिखाई देते रहे हैं।
ऐसी स्थिति में लोगों का कहना है कि अब पुलिस को गिरफ्तारी अभियान और तेज करना चाहिए ताकि यह संदेश जाए कि कानून से बचने की कोई गुंजाइश नहीं है।
■ क्या सामने आएंगे संरक्षणदाताओं के नाम?
जिले में लंबे समय से यह चर्चा है कि कुछ प्रभावशाली राजनीतिक और आर्थिक हितों के कारण अवैध तंबाकू कारोबार को संरक्षण मिलता रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन नागरिकों का मानना है कि यदि कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन, संपत्ति निवेश और वित्तीय नेटवर्क की निष्पक्ष जांच की जाए तो पूरे सिंडिकेट की तस्वीर सामने आ सकती है।
■ अब MCOCA और तड़ीपारी की मांग
जिला न्यायालय की टिप्पणी, बार-बार दर्ज अपराध, अग्रिम जमानत की अस्वीकृति और अब BNS की धारा 111 के तहत हुई कार्रवाई के बाद जिले में यह मांग और तेज हो गई है कि संगठित रूप से प्रतिबंधित तंबाकू का कारोबार करने वालों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA), तड़ीपारी तथा आर्थिक अपराध संबंधी कठोर कानून भी लागू किए जाएं।
■ युवाओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों पर अंतिम प्रहार कब?
महाराष्ट्र में वर्ष 2012 से गुटखा, पान मसाला और सुगंधित तंबाकू पर प्रतिबंध लागू है। इसके बावजूद यदि संगठित गिरोह लगातार इस कारोबार को चला रहे हैं तो यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ है।
अब पूरे जिले की निगाहें पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। जनता को उम्मीद है कि हालिया कार्रवाई केवल शुरुआत साबित होगी और आने वाले दिनों में तंबाकू माफिया, उनके आर्थिक नेटवर्क तथा कथित संरक्षणदाताओं तक कानून का शिकंजा पहुंचेगा।
फिलहाल इतना तय है कि चंद्रपुर की बुलंद आवाज द्वारा लगातार उठाए गए मुद्दे ने प्रशासन को कार्रवाई के लिए मजबूर किया है और जिले में सक्रिय तंबाकू सिंडिकेट के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की शुरुआत हो चुकी है।










