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तंबाकू तस्कर : वसीम जिमरी व जयसुख ठक्कर की बेल रिजेक्ट, फरार आरोपी गिरफ्त से बाहर

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■ SP से बड़ी उम्मीदें : गौ-तस्करों की तर्ज पर तंबाकू तस्करों पर भी लगे MCOCA व तड़ीपारी
■ जिला न्यायालय का निरीक्षण — ये करते हैं बार-बार अपराध
■ कॉल डिटेल व आर्थिक लेन-देन की गहन जांच से संरक्षणदाता कांग्रेस नेता व बड़े नेटवर्क का हो सकता है पर्दाफाश

चंद्रपुर।
चंद्रपुर जिले में प्रतिबंधित सुगंधित तंबाकू, गुटखा, पान मसाला और हुक्का तंबाकू के अवैध कारोबार को लेकर जिला न्यायालय की हालिया(25 मई 2026) टिप्पणी और अग्रिम जमानत आवेदन पर पारित आदेश ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला एवं सत्र न्यायालय ने कुख्यात तंबाकू कारोबारी वसीम अख्तर जिमरी एवं जयसुख ठक्कर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट कहा है कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया यह दर्शाती है कि यह कोई एकल अपराध नहीं, बल्कि समान प्रकृति के अपराधों में आरोपी की बार-बार संलिप्तता का मामला है।
न्यायालय के इस आदेश के बाद अब जिले में यह मांग तेज हो गई है कि जिस प्रकार गौ-तस्करी और संगठित अपराध के मामलों में कठोर कार्रवाई की जाती है, उसी प्रकार प्रतिबंधित तंबाकू कारोबार से जुड़े कथित सिंडिकेट पर भी महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) तथा तड़ीपारी जैसी कठोर कार्रवाई की जाए।
जिले के SP आयुष नोपानी एक दमदार अफसर के रूप में अपने कर्तव्य का निर्वाह कर रहे हैं। इस मामले में भी उनसे बड़ी उम्मीदें जनता कर रही हैं। वे अवश्य ही चंद्रपुर जिले को अवैध तंबाकू से मुक्त कर युवाओं के जीवन से खिलवाड़ करने वाले कैंसर के कारोबारियों पर सख्त लगाम कसेंगे।

■ न्यायालय ने क्यों ठुकराई अग्रिम जमानत?
रामनगर पुलिस थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 658/2026 में वसीम अख्तर जिमरी को आरोपी क्रमांक 3 बनाया गया है। यह मामला प्रतिबंधित फ्लेवर्ड हुक्का तंबाकू, सुगंधित तंबाकू और अन्य निषिद्ध तंबाकू उत्पादों के अवैध भंडारण एवं बिक्री से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार स्थानीय अपराध शाखा (LCB) और रामनगर पुलिस ने राजीव गांधी नगर स्थित सिद्धांत गोंडाने के घर पर छापा मारकर 1.34 लाख रुपये से अधिक मूल्य का प्रतिबंधित तंबाकू जब्त किया था। जांच के दौरान आरोपी ने कथित रूप से खुलासा किया कि यह माल वसीम जिमरी तथा अन्य सहयोगियों द्वारा उपलब्ध कराया गया था।
माननीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एल. डी. बिले ने अपने आदेश में कहा कि वर्ष 2020 से विभिन्न पुलिस थानों में वसीम जिमरी के खिलाफ समान प्रकृति के अनेक अपराध दर्ज हैं। न्यायालय ने यह भी माना कि जांच अभी प्रारंभिक अवस्था में है तथा तंबाकू की सप्लाई चेन, परिवहन नेटवर्क, भंडारण केंद्रों और आर्थिक लेन-देन की जांच के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि आरोपी का आपराधिक इतिहास उसके खिलाफ जाता है और बार-बार दर्ज हुए अपराध उसे अग्रिम जमानत जैसी विशेष राहत पाने का अधिकार नहीं देते। इसी आधार पर अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई। ठीक इसी तरह से जयसुख ठक्कर की याचिका भी खारिज कर दी गई है।

न्यायालय की टिप्पणी ने उठाए कई प्रश्न
अदालत ने अपने आदेश में जिस प्रकार आरोपी के विरुद्ध विभिन्न पुलिस थानों में पूर्व से दर्ज मामलों का उल्लेख किया है, उसने कानून-व्यवस्था और प्रवर्तन एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध वर्षों से समान प्रकृति के अपराध दर्ज होते रहे हैं और न्यायालय भी उसके “बार-बार अपराध में शामिल रहने” की प्रथम दृष्टया टिप्पणी कर रहा है, तो फिर ऐसे मामलों में केवल सामान्य धाराओं के तहत कार्रवाई तक ही प्रशासन सीमित क्यों रहता है?
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि संगठित तंबाकू सिंडिकेट पर समय रहते कठोर कार्रवाई की जाती, तो जिले में प्रतिबंधित तंबाकू का कारोबार इस स्तर तक नहीं पहुंचता।

■ फरार आरोपी गिरफ्त से बाहर, उठ रहे सवाल
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार हालिया कार्रवाई में तंबाकू कारोबारी वसीम जिमरी और जयसुख ठक्कर फरार बताए जा रहे हैं। वहीं जिले में चर्चा यह भी है कि वसीम जिमरी खुलेआम अपने घर और आसपास के क्षेत्र में दिखाई देता है, लेकिन कानून के हाथ अब तक उसके गिरेबान तक नहीं पहुंच पाए हैं। ईद के वक्त भी वह चंद्रपुर में देखा गया। चर्चा है कि वणी क्षेत्र में उसने अपना ठिकाना बना रखा है। रात के अंधेरे में वह अपने घर-परिसर में देखा जा रहा है।
यही कारण है कि संबंधित प्रशासन पर अनेक सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी आरोपी के विरुद्ध लगातार अपराध दर्ज हो रहे हों और न्यायालय भी उसके आपराधिक इतिहास को गंभीर मान रहा हो, तो उसकी गिरफ्तारी में देरी स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा करती है। लोग चर्चा कर रहे हैं कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि उसे हाईकोर्ट में अपिल करने की मोहलत दी जा रही हो ?

■ क्या राजनीतिक संरक्षण के कारण फल-फूल रहा है तंबाकू कारोबार?
जिले में लंबे समय से यह चर्चा चल रही है कि कांग्रेस का एक प्रभावशाली नेता कथित रूप से तंबाकू कारोबारियों को संरक्षण प्रदान कर रहा है। सूत्रों का दावा है कि इसी राजनीतिक छत्रछाया के कारण बार-बार अपराध दर्ज होने के बावजूद कई बड़े कारोबारी कठोर कार्रवाई से बच निकलते हैं।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि जांच एजेंसियां आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल लोकेशन, बैंक खातों, डिजिटल भुगतान, संपत्ति निवेश और आर्थिक लेन-देन की गहन जांच करें तो पूरे नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं। क्योंकि एक समय पर यह भी चर्चा जोरों पर थी कि अवैध तंबाकू से मिल रहे कालेधन का इस्तेमाल शहर भर में होर्डिंग्स लगाने एवं महानगर पालिका का चुनाव लड़ने के लिए इस काली कमाई का उपयोग किया जाता रहा है।
जांच एजेंसियों के समक्ष यह भी चुनौती है कि वे यह पता लगाएं कि प्रतिबंधित माल जिले में कहां से आ रहा है, उसका वित्तपोषण कौन कर रहा है और उसका वितरण तंत्र किन लोगों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है।

■ महाराष्ट्र में 2012 से लागू है प्रतिबंध
महाराष्ट्र सरकार ने 20 जुलाई 2012 से सुगंधित तंबाकू, गुटखा और पान मसाला पर प्रभावी प्रतिबंध लागू किया था। राज्य मंत्रिमंडल ने 11 जुलाई 2012 को यह निर्णय लिया था और खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत अधिसूचना जारी कर इसे लागू किया गया।
वर्तमान अधिसूचना के अनुसार 20 जुलाई 2025 से इन उत्पादों पर एक वर्ष का प्रतिबंध लागू किया गया, जिसे समय-समय पर नवीनीकृत किया जाता रहा है।
महाराष्ट्र की नीति स्पष्ट रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य, विशेषकर मुख कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम के उद्देश्य से प्रतिबंध और कठोर प्रवर्तन पर आधारित है।

■ केवल पुलिस नहीं, पूरा प्रशासन जिम्मेदार
प्रतिबंधित तंबाकू के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी केवल पुलिस विभाग की नहीं है।
फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA), खाद्य सुरक्षा अधिकारी, जिला प्रशासन, तहसील प्रशासन, नगर परिषद, महानगरपालिका, ग्राम पंचायतें तथा अन्य प्रवर्तन एजेंसियां भी इस कार्रवाई का हिस्सा हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत निरीक्षण, जब्ती, अभियोजन और प्रतिबंधित माल को नष्ट करने की मूल जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा तंत्र की है। इसके बावजूद अधिकांश मामलों में केवल पुलिस विभाग सक्रिय दिखाई देता है जबकि अन्य विभागों की भूमिका सीमित नजर आती है।

■ मुख्यमंत्री ने माना, फिर भी मकोका नहीं
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि राज्य में अवैध गुटखा और तंबाकू नेटवर्क अभी भी सक्रिय हैं। उन्होंने संगठित गिरोहों पर MCOCA जैसे कठोर कानूनों के उपयोग की संभावना पर भी चर्चा की थी।
राज्यभर में हजारों मामले दर्ज होने के बावजूद चंद्रपुर में ऐसे कई कारोबारी हैं जिनके विरुद्ध बार-बार अपराध दर्ज होने की चर्चा है, लेकिन उनके खिलाफ अब तक MCOCA जैसी कार्रवाई नहीं की गई।
यही कारण है कि अब जिले में यह मांग जोर पकड़ रही है कि संगठित रूप से युवाओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले तंबाकू सिंडिकेट पर सामान्य धाराओं के बजाय कठोर कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए।

■ LCB की कार्रवाई से उजागर हो रहा बड़ा नेटवर्क
कर्तव्यदक्ष एवं ताबडतोब अनेक कार्रवाई करने वाले जिला पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी तथा स्थानीय अपराध शाखा के प्रमुख अमोल काचोरे के मार्गदर्शन में हाल ही में चलाए गए अभियानों में कुल 5 लाख 11 हजार 539 रुपये मूल्य का प्रतिबंधित माल जब्त किया गया। इसके बाद भी लगातार अनेक कार्रवाई को बखूबी अंजाम दिया गया।
लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से यह संकेत मिल रहा है कि जिले में अवैध तंबाकू कारोबार व्यक्तिगत स्तर पर नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क के रूप में संचालित हो रहा है।

■ अब आगे क्या?
जिला न्यायालय द्वारा वसीम जिमरी एवं जयसुख ठक्कर की अग्रिम जमानत खारिज किए जाने के बाद जांच एजेंसियों के पास पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने का अवसर है। यदि कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रांजैक्शन, डिजिटल भुगतान, संपत्ति निवेश, परिवहन नेटवर्क और राजनीतिक संपर्कों की निष्पक्ष जांच की जाती है, तो केवल तंबाकू तस्करों ही नहीं बल्कि उनके कथित संरक्षणदाताओं (कथित कांग्रेस नेता) के नाम भी सामने आ सकते हैं।
फिलहाल जिले की जनता की निगाहें पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। लोगों की अपेक्षा है कि गौ-तस्करी और अन्य संगठित अपराधों की तरह प्रतिबंधित तंबाकू कारोबारियों पर भी MCOCA, तड़ीपारी और आर्थिक अपराध संबंधी कठोर प्रावधानों का उपयोग कर इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचा जाए, ताकि युवाओं के स्वास्थ्य के साथ हो रहे इस संगठित खिलवाड़ पर स्थायी अंकुश लगाया जा सके।

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