Home चंद्रपूर महाराष्ट्र सरकार के नियम SLR पर लागू करवाने में कलेक्ट्रेट फेल

महाराष्ट्र सरकार के नियम SLR पर लागू करवाने में कलेक्ट्रेट फेल

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मंत्रालय मेहरबान तो क्या करें कलेक्टर साहिबान?
22 साल से एक ही स्थान पर पोस्टिंग, क्या भूमि अभिलेख अफसरों की अर्थनीति पड़ी सब पर भारी?

चंद्रपुर.
सूचना के अधिकार कानून से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, नागपुर के भूमि अभिलेख विभाग के उपसंचालक कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, चंद्रपुर के भूमि अभिलेख कार्यालय (SLR) और उसके अधीन के कार्यालयों में करीब वर्ष 2004 से कार्यरत भुमरेड्डी गिज्जेवार आज 22 वर्षों से एक ही विभाग में ताल ठोंककर अपनी नौकरी कर रहे हैं। उनका प्रमोशन भी हो गया। वर्ष 2021 से गिज्जेवार क्लास 2 ऑफिसर बन बैठे हैं। लेकिन हैरत की बात है कि इन पर महाराष्ट्र सरकार के तबादले संबंधी नियम लागू नहीं हो पा रहे हैं। जबकि 3 वर्ष बाद इन्हें अन्य विभागों या अन्य जिले में तबादला दिया जाना चाहिए था।

■ स्पेश टास्क फोर्स को ठेंगा
ऐसा नहीं है कि इनका तबादला अन्य विभाग में नहीं किया गया, लेकिन भुमरेड्डी गिज्जेवार का रसूख इतना है कि वे अपना तबादला मंत्रालय से भी रद्द करवाकर ले आए हैं। ऐसा तब किया गया जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर देश समेत चंद्रपुर जिले में झुड़पी जंगल जमीन विशेष कार्यदल (स्पेशल टास्क फोर्स) के गठन में गिज्जेवार को नियुक्त करने का आदेश जिला प्रशासन ने दिया था। इस आदेश को मंत्रालय स्तर से रद्द करवाने में गिज्जेवार कामयाब रहे। यह सब भूमि अभिलेख कार्यालय के अधीक्षक श्रीमान जगताप के सहयोग के बिना संभव नहीं है।

■ मंत्रालय पर कैसे हावी हो रहे गिज्जेवार ?
क्या भूमि अभिलेख कार्यालय में हो रहे करोड़ों के जमीन व्यवहार की अर्थनीति कहीं मंत्रालय के रसूख पर हावी तो नहीं हो रही है? यदि यह सच है, तो जिला प्रशासन की हतबलता चिंताजनक है। ऐसे में नवनियुक्त कलेक्टर साहिबान वसुमना पंथ इस गंभीर मामले में क्या कर पाएंगी? जबकि इस प्रकरण को लेकर स्वयं भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार ने इस मामले में गहन जांच व कार्रवाई करने संबंधी शिकायत दी है और रिपोर्ट पेश करने को कहा है। परंतु जिला प्रशासन लाचार नजर आ रहा है।

■ तबादले के नियमों की उड़ रही धज्जियां
चंद्रपुर की बुलंद आवाज के कार्यकारी संपादक रितेश उर्फ रामू तिवारी ने स्वयं सूचना के अधिकार के तहत इस प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों को प्राप्त किया है। प्राप्त पुख्ता जानकारी ने चंद्रपुर के भूमि अभिलेख विभाग (SLR) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागपुर स्थित उपसंचालक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, भुमरेड्डी गिज्जेवार नामक अधिकारी वर्ष 2004 से लगातार इसी विभाग में कार्यरत हैं और पिछले 22 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। वर्ष 2021 में पदोन्नति पाकर वे क्लास-2 अधिकारी बन गए, लेकिन इसके बावजूद महाराष्ट्र सरकार के तबादला नियम उन पर लागू नहीं हो पाए।

■ जिला प्रशासन की कार्यक्षमता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न
नियमों के अनुसार तीन वर्षों के भीतर तबादला होना चाहिए, परंतु गिज्जेवार का प्रभाव इतना मजबूत बताया जा रहा है कि वे अपना तबादला मंत्रालय स्तर से भी रद्द कराने में सफल रहे। यह स्थिति तब सामने आई जब सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार गठित झुड़पी जंगल भूमि विशेष कार्यदल (स्पेशल टास्क फोर्स) में उनकी नियुक्ति की गई थी, जिसे बाद में निरस्त करा लिया गया।
इस पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भूमि अभिलेख विभाग में चल रही करोड़ों की जमीन संबंधी गतिविधियों की आर्थिक ताकत प्रशासनिक निर्णयों पर भारी पड़ रही है? यदि ऐसा है, तो यह जिला प्रशासन की कार्यक्षमता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। ऐसे में नवनियुक्त कलेक्टर वसुमना पंथ के सामने यह एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। खास बात यह है कि इस मामले को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार भी जांच और कार्रवाई की मांग कर चुके हैं, फिर भी प्रशासन की निष्क्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है।

■ करोड़ों के लेनदेन व्यवहार से ताकत बढ़ी ?
चंद्रपुर के भूमि अभिलेख कार्यालय में एक अधिकारी का 22 वर्षों तक एक ही स्थान पर जमे रहना कई तरह के सवाल खड़े करता है। जमीन-जायदाद से जुड़े करोड़ों के लेनदेन वाले इस विभाग में फाइलों के संचालन के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।
बताया जाता है कि कुछ अधिकारी मंत्रालय और राजनीतिक संपर्कों के दम पर न केवल अपने तबादले रुकवा रहे हैं, बल्कि कलेक्ट्रेट के आदेशों को भी अप्रभावी बना दे रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि जिले में भूमि हस्तांतरण से जुड़ी प्रक्रियाओं के पीछे कोई संगठित प्रभावशाली लॉबी सक्रिय हो सकती है।

■ प्रशासनिक निर्णयों को भी कर रहे प्रभावित
इस आशंका को बल तब मिला जब विधायक सुधीर मुनगंटीवार की शिकायत के बावजूद, गिज्जेवार के तबादले को मंत्रालय स्तर से रद्द कर उन्हें पुनः उसी कार्यालय में पदस्थ कर दिया गया। इससे यह चर्चा तेज हो गई है कि भूमि अभिलेख विभाग के कुछ अधिकारी अपनी पकड़ के चलते प्रशासनिक निर्णयों को भी प्रभावित कर रहे हैं।

■ विधायक मुनगंटीवार की शिकायत की अनदेखी
मुनगंटीवार को विभाग में अनियमितताओं की कई शिकायतें मिली थीं। इस पर उन्होंने 29 मार्च 2026 को जिलाधिकारी को पत्र लिखकर गिज्जेवार के तबादले पर तत्काल अमल करने और उनके खिलाफ जांच की मांग की थी। उन्होंने यह भी आशंका जताई थी कि संबंधित अधिकारी अपना तबादला रद्द कराने का प्रयास कर रहे हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख था कि उक्त अधिकारी के खिलाफ जनता में असंतोष है और वे आम नागरिकों के कार्यों में सहयोग नहीं करते।

■ क्या कलेक्ट्रेट का आदेश बेकार ?
जिलाधिकारी कार्यालय ने 27 मार्च 2026 को आदेश जारी कर गिज्जेवार को झुड़पी जंगल अतिक्रमण हटाने के लिए गठित विशेष टास्क फोर्स में शामिल किया था। आदेश में स्पष्ट किया गया था कि इस टीम में नियुक्त अधिकारियों को अन्य कोई कार्य नहीं सौंपा जाएगा। इसके बावजूद, मंत्रालय स्तर से तबादला रद्द होने की घटना ने पूरे प्रशासनिक ढांचे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर किस प्रभाव के चलते एक अधिकारी प्रशासनिक आदेशों को चुनौती देने की स्थिति में पहुंच जाता है? और क्यों इस पूरे मामले की गहन जांच अब तक शुरू नहीं हो पाई है? जिले में इस मुद्दे को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग लगातार तेज होती जा रही है।

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