■ सांसद ने हिराई समारोह को किया बदनाम, आदिवासी समाज में तीव्र विरोध – अल्का आत्राम का आरोप
चंद्रपुर।
गत 20 अप्रैल 2026 को चंद्रपुर के कोहिनूर मैदान में आयोजित राजमाता रानी हिराई जन्मोत्सव को ’सुसंपन्न सम्मेलन’ लिखने वाली सम्माननीय स्थानीय सांसद प्रतिभा धानोरकर का कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन का मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में डूबता चला जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में अनेक चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। सबसे अधिक हैरत करने वाली बात तो यह है कि चंद्रपुर मनपा आयुक्त अकुनूरी नरेश, जो स्वयं इस कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद थे, उन्होंने कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन की घटित हो रही घटना पर चुप्पी साध ली। उनकी यह चुप्पी या तो समर्थन दे रही थी या वे इस घटना के समय आँखें बंद किए हुए थे। जब इस प्रकरण की शिकायत सांसद धानोरकर द्वारा लोकसभा अध्यक्ष तक पहुँची, तो अचानक उन्हें मंच पर घटित हुए प्रकरण पर नींद खुल गई और वे अब 6 छोटे अधिकारी-कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाते हुए उन पर कार्रवाई करने के लिए नोटिस थमा गए। जबकि असली कार्रवाई तो मनपा के मुखिया आयुक्त महोदय पर होनी चाहिए, क्योंकि मंच पर घटित होने वाली प्रत्येक अनुचित घटना के लिए मुखिया को ही जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
इन हालातों में आज इस प्रकरण को राजनीतिक रंग जमकर चढ़ गया। शुरुआत में कार्यक्रम के बाद सांसद धानोरकर ने जिस तरह से आरोपों की झड़ी लगाई थी, उसका तीखा जवाब भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश महासचिव अल्का आत्राम ने दे दिया। उनके इस तीखे हमले में उन्होंने सांसद धानोरकर पर हिराई महोत्सव को बदनाम करने एवं बेबुनियाद आरोप लगाने की बात कही है।
■ सांसद के वॉकआउट से शुरू विवाद अब आदिवासी समाज के विरोध का विषय
सांसद प्रतिभा धानोरकर ने इस महोत्सव में अवमानना होने की बात कहते हुए मंच से वॉकआउट किया था। उनकी आपत्ति थी कि विधायक सुधीर मुनगंटीवार का आगमन बाजे-गाजे के साथ हुआ, तब उनका भाषण चल रहा था और भाषण संक्षिप्त लेना पड़ा। विधायक के साथ आए उनके पदाधिकारी-कार्यकर्ताओं का मंच पर सत्कार किया गया। सांसद महोदया के भाषण के बाद विधायक मुनगंटीवार का भाषण लिया गया, जिसे उन्होंने अपनी अवमानना का विषय बनाया और मंच से वॉकआउट किया। पश्चात इसकी शिकायत उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से की। इस मौके पर हजारों की संख्या में मौजूद आदिवासी बंधु सांसद महोदया की इस हरकत से नाराज़ हुए।
■ अपनी बला, दूसरों पर डालने की आयुक्त की नीति
सांसद प्रतिभा धानोरकर की ओर से लोकसभा अध्यक्ष को शिकायत दिए जाने की जानकारी ज्ञात होते ही मनपा आयुक्त अकुनूरी नरेश पर संकट के बादल मंडराने लगे। मंच पर बैठे रहे मनपा आयुक्त उस समय चुप्पी साधे बैठे थे, परंतु कार्रवाई की लटकती तलवार को देखते हुए अब अपनी बला दूसरों पर डालने की नीति अपना रहे हैं। असल में सांसद महोदया ने मनपा आयुक्त एवं जिलाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की शिकायत दी है। मनपा आयुक्त खुद पर खुद ही कोई कार्रवाई तो कर नहीं सकते, इसलिए वे अपने से कनिष्ठ, छोटे ओहदों पर बैठे अधिकारी व कर्मचारियों को इस कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन के विषय पर नोटिस थमा रहे हैं। 6 कर्मचारियों को नोटिस दिया जा चुका है। कायदे से तो मनपा आयुक्त को नोटिस मिलना चाहिए।
■ उद्योगपतियों के आगे कोई प्रोटोकॉल क्यों नहीं?
गत 14 मार्च 2026 को सांसद प्रतिभा धानोरकर के गृह क्षेत्र भद्रावती के MIDC परिसर में जब न्यू एरा क्लीनटेक प्रा. लि. एवं ग्रेटा एनर्जी प्रा. लि. परियोजनाओं का भूमिपूजन प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में संपन्न हुआ, तब सांसद प्रतिभा धानोरकर को प्रोटोकॉल उल्लंघन की याद नहीं आई। इस दौरान तो धानोरकर को भाषण देने का मौका तक नहीं दिया गया, जबकि वे इसी क्षेत्र से लंबे समय से जनता का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। और तो और, उन्होंने इन परियोजनाओं के शुभारंभ का श्रेय भी लिया। आश्चर्य की बात है कि स्थानीय सांसद को दरकिनार किए जाने के इस मामले में धानोरकर ने न तो उद्योगपतियों के इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया, न वॉकआउट किया और न ही लोकसभा अध्यक्ष से इसकी शिकायत की। इसके चलते आदिवासी समुदाय में चर्चा है कि आदिवासियों के हिराई महोत्सव में ही वॉकआउट क्यों और उद्योगपतियों के कार्यक्रम में क्यों नहीं?
■ सम्मान माँगने से नहीं मिलता – अल्का आत्राम
सांसद प्रतिभा धानोरकर की ढेरों आपत्तियों के बावजूद उन्होंने हिराई महोत्सव को लेकर मंच पर मौजूद भाजपा नेताओं के साथ खींची तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इस सम्मेलन की तारीफ़ में लिखा— ‘सोहळा सुसंपन्न’। सुसंपन्न का अर्थ है कि अच्छे ढंग से संपन्न हुआ। अब इस मसले पर सांसद धानोरकर की ओर से लगाए गए अनगिनत आरोपों का जवाब देने के लिए भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश महासचिव अल्का आत्राम ने सांसद महोदया पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा— “सम्मान माँगने से नहीं मिलता, यह कर्तृत्व की कमाई से मिलता है।”
■ सांसद धानोरकर का इगो हर्ट
अल्का आत्राम ने कहा कि सांसद के खिलाफ आदिवासी समाज में तीव्र विरोध शुरू हो गया है। हिराई महोत्सव को सांसद धानोरकर द्वारा बदनाम करने की कोशिश की गई। सांसद के लगाए आरोप बेबुनियाद हैं। आदिवासी समाज की भावनाएँ आहत हुई हैं। अनेक वर्षों की प्रतीक्षा के बाद भाजपा नेता मुनगंटीवार के प्रयासों से यह महोत्सव संपन्न हो पाया है। आत्राम का दावा है कि इस कार्यक्रम में किसी का भी अपमान करने के उद्देश्य से कोई हरकत नहीं की गई। मामूली बात पर सांसद धानोरकर का इगो हर्ट हुआ है।
■ धानोरकर ने अत्याचार पीड़ित महिलाओं के लिए क्या किया?
भाजपा नेता अल्का आत्राम का कहना है कि धानोरकर सांसद बनीं तब से उन्होंने महिलाओं के लिए क्या किया? जिले में महिलाओं पर अत्याचार की वारदातें घटित होने पर वे भेंट करने तक नहीं आतीं। आदिवासी समाज ने सांसद महोदया को सम्मान के साथ कार्यक्रम में बुलाया, लेकिन उन्होंने राजनीतिक दाँव खेलते हुए आदिवासियों के इस कार्यक्रम को बदनाम किया। यदि वे विधायक मुनगंटीवार को टार्गेट करने के इरादे से दाँव चल रही हैं, तो भाजपा और आदिवासी समाज यह बर्दाश्त नहीं करेगा।










