Home चंद्रपूर SLR कार्यालय में 26 साल से कुंडली मारकर बैठे हैं उपअधीक्षक गिज्जेवार

SLR कार्यालय में 26 साल से कुंडली मारकर बैठे हैं उपअधीक्षक गिज्जेवार

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■ भूमि अभिलेख कार्यालय के अफसर कलेक्ट्रेट पर हावी
■ स्पेशल टास्क फोर्स में हुए तबादले को मंत्रालय से रद्द करवाने की ताकत

चंद्रपुर.
चंद्रपुर के भूमि अभिलेख कार्यालय (SLR) में ऐसी क्या खास बात है कि एक अफसर ने बीते 26 साल से यहां अपना पांव अंगद की तरह जमा रखा है? इसी कार्यालय में जमीन-जायदाद से संबंधित करोड़ों की हेरफेर के खेल को अंजाम देने की प्रक्रिया में क्या फाइलें सरकाने के लिए लाखों की मलाई बटोरने का गोरखधंधा चल रहा है?
मंत्रालय तक पहुंच और नेताओं से पैठ जमाए हुए चंद अफसर जिलाधिकारी कार्यालय के आदेश के खिलाफ जाकर अपना तबादला रद्द कराने की ताकत पैदा कर चुके हैं। इस हिम्मत और चंद्रपुर की जमीनों में हो रहे हस्तांतरण की प्रक्रिया के पीछे कोई बड़ी भ्रष्ट लॉबी काम कर रही है।
यह दावा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि जिले के कद्दावर नेता व भाजपा विधायक सुधीर मुनगंटीवार के शिकायत पत्र के बावजूद मंत्रालय ने SLR कार्यालय में 26 साल से कार्यरत अधिकारी भुमरेड्डी गिज्जेवार के प्रमोशन के पश्चात हो चुके तबादले को, कलेक्ट्रेट के आदेश के बाद भी, रद्द कर उन्हें इसी कार्यालय में पुनः बिठा दिया। अर्थात, भूमि अभिलेख कार्यालय के उपअधीक्षक गिज्जेवार अपना तबादला मंत्रालय से रद्द करवाने में कामयाब होने की चर्चा है।

■ विधायक मुनगंटीवार के शिकायत की अनदेखी
भाजपा के कद्दावर नेता कहे जाने वाले विधायक सुधीर मुनगंटीवार को चंद्रपुर के भूमि अभिलेख कार्यालय में चल रही गड़बड़ियों की शिकायतें मिली। उन्होंने सजगता दिखाते हुए इन शिकायतों का हवाला देते हुए 29 मार्च 2026 को ही चंद्रपुर के जिलाधिकारी को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने भूमि अभिलेख कार्यालय के उपअधीक्षक भुमरेड्‌डी गिज्जेवार को झुड़पी जंगल जमीन विशेष्ज्ञ कार्यदल अर्थात स्पेशल टास्क फोर्स में शासन के आदेश 23 मार्च 2026 के अनुसार हुए तबादले को देखते हुए तत्काल पद स्थापना पर अमल करने की सूचना दी। साथ ही यह अंदेशा भी जताया कि संबंधित अफसर द्वारा अपना तबादला रद्द कराने के लिए प्रयास जारी है। ज्ञापन का हवाला देते हुए मुनगंटीवार सूचित करते हैं कि गिज्जेवार के खिलाफ जनता की अनेक शिकायतें हैं। वे आम जनता के काम नहीं करते। इसलिए इस मामले की गहन जांच करने, उचित कार्रवाई कर इसकी रिपोर्ट पेश करने का उन्होंने अनुरोध किया था। परंतु उनके शिकायत के अनुसार न तो कोई ठोस जांच हुई और न ही कोई रिपोर्ट तैयार की गई।

■ क्या कलेक्ट्रेट के आदेश पर होगा अमल ?
विधायक मुनगंटीवार का शिकायत पत्र मिलते ही जिलाधिकारी कार्यालय के प्रशासन ने 27 मार्च 2026 को एक आदेश पत्र जारी किया। इसमें उन्होंने भुमरेड्‌डी गिज्जेवार के नाम का उल्लेख करते हुए यह सूचित किया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार झुड़पी जंगल पर मौजूद अतिक्रमण हटाने के लिए जिले में विशेष टास्क फोर्स का निर्माण किया जा रहा है। इस फोर्स में गिज्जेवार को शामिल किया गया है। विभागीय आयुक्त के आदेश पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस फोर्स में काम करने वाले अफसरों को अन्य किसी दूसरे कार्य की जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती है। परंतु हैरत की बात है कि विधायक, जिलाधिकारी एवं समूचे आला दर्जे के प्रशासनिक अधिकारियों के आदेश-निर्देश को ठेंगा बताते हुए उपअधीक्षक गिज्जेवार अपना तबादला मंत्रालय स्तर से करवाने की ताकत पैदा कर चुके हैं। इतनी बड़ी पैठ निर्माण करने के पीछे जरूर कोई न कोई मलाईनुमा राज छिपा है। इस राज का पर्दाफाश करने के लिए जिलाधिकारी की ओर से जांच क्यों नहीं की जा रही है, यह सबसे बड़ी आश्चर्य की बात है।

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