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जब था प्रशासक राज तब मनपा में बैठे रहे आयुक्त, अब महापौर के बिना ही कर रहे प्रभागों का भ्रमण

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■ आयुक्त सीधे जनता से लेंगे शिकायत तो 66 नगरसेवक किस काम के ?
■ प्रशासक राज में याद न आया दौरा व प्रभागों की समस्या ?

चंद्रपुर.
करीब साढ़े तीन साल चंद्रपुर महानगर पालिका में प्रशासक राज कायम था। पूर्व के आयुक्त एवं विद्यमान आयुक्त ने कभी प्रभागों में भ्रमण कर जनता से सीधे संपर्क करने की कोशिश नहीं की। लेकिन अब जब मनपा के चुनाव हुए और नगरसेवकों के रूप में जनता को उनका दुख-दर्द व समस्याएं सुनने के लिए जनप्रतिनिधि मिल गए तो अचानक से मनपा आयुक्त प्रभागों का दौरा करने लगे। इसमें भी हैरत की बात तो यह है कि चंद्रपुर शहर की प्रथम नागरिक का जिन्हें सम्मान है, वे महिला महापौर को अपने साथ लिए बिना ही आयुक्त साहब के दौरे संपन्न होने लगे हैं। 11 दिसंबर 2025 को मनपा आयुक्त अकुनुरी नरेश ने यहां का पदभार संभाला। तब से लेकर करीब 50 दिनों तक वे मनपा के AC युक्त विशाल कार्यालय के विशाल केबिन में बैठे रहे। उनके प्रशासक राज के 50 दिनों में उन्हें चंद्रपुर प्रभागों और इन प्रभागों की बस्तियों में रहने वाली आम जनता की समस्याएं याद नहीं आईं ? अब जब जनता ने अपने जनप्रतिनिधि के रूप में नगरसेवकों को चुन लिया है तो मनपा आयुक्त कभी स्कूटर पर कभी पैदल प्रभागों का भ्रमण करते हुए नजर आने लगे हैं। ऐसे में सवाल तो यही उठता है कि अगर हमने नगरसेवकों को अपनी समस्याओं को हल करने मनपा सदन में इस अपेक्षाओं के साथ भेजा है, ताकि वे वहां जनता की आवाज बुलंद करें, प्रशासन से काम करवा लें। ऐसे में आयुक्त ही यदि सीधे समस्याएं लेंगे तो वे 66 नगरसेवकों की अब क्या जरूरत बची है ?

शुरू के दिन की सख्ती स्टंट था या सुधार ?
अकुनूरी नरेश चंद्रपुर मनपा में बतौर आयुक्त नियुक्त होते ही शुरू-शुरू में अर्थात 15 दिसंबर 2025 को सुबह-सुबह यानी कि समय पर मनपा कार्यालय में पहुंच गए और देरी से आने वाले कर्मचारियों के लिए मनपा का गेट ही बंद कर दिया। इसके चलते सारे कर्मचारियों में मनपा आयुक्त का खौफ निर्माण हो गया। उस समय लगा कि एक IAS रैंक के अधिकारी की सजगता से चंद्रपुर का विकास दौड़ पड़ेगा। लेकिन कुछ ही दिनों में शहर में चर्चा चलने लगी कि चार-पांच हजार के भी बिलों को अनेक दिनों तक अटकाया जाने लगा है। हालांकि यह भी सच है कि बिलों की फाइल पर हस्ताक्षर करते समय उसकी बारीकी से जांच की जानी चाहिए। परंतु जांच के नाम पर फाइलों को अनेक दिनों तक अटकाकर रखना यह लचर कार्यप्रणाली की ओर इशारा करती है। बहरहाल कर्मचारियों की देरी पर मनपा का गेट बंद कर दिखाई गई शुरू-शुरू की सख्ती, अब तो गायब सी हो गई है। इसलिए इसे मनपा आयुक्त का स्टंट कहा जाने लगा है।

11 दिसंबर की नियुक्ति के बाद 31 जनवरी को दिखे मैदान में !
मनपा आयुक्त अकूनूरी नरेश चंद्रपुर में 11 दिसंबर 2025 को विराजमान हुए। करीब 50 दिनों तक उन्हें प्रभागों का दौरा या जनता की समस्याओं को सुनने के लिए भ्रमण करते हुए नहीं देखा गया। फिर खबर आई कि 31 जनवरी 2026 अर्थात 50 दिनों बाद वे एकोरी प्रभाग के रहमत नगर स्थित STP प्लांट में दौरे पर आए हैं। यहां के निवासियों से उन्होंने प्लांट से होने वाली दिक्कतों को सुना। स्थानीय नागरिकों से काफी देर तक चर्चा की। पैदल चलकर प्लांट का मुआयना किया। बीते दिनों इसी STP प्लांट में क्लोरीन गैस के रिसाव के चलते हुए हादसे को लेकर स्थानीय नगरसेवक एवं प्रभाग के युवाओं के चहेते अजहर शेख ने मनपा आयुक्त के सामने इस प्लांट से होने वाली दिक्कतों का पिटारा ही खोल दिया। बीते अनेक दिनों से अजहर शेख की ओर से प्रशासन को दी जा रही लिखित शिकायतों का ब्योरा देते हुए तत्काल उचित एक्शन लेने की अपील की। यह प्रथम मौका था जब 50 दिनों बाद मनपा आयुक्त जनता के बीच मैदान में उतरकर लोगों की गुहार सुन रहे थे। 11 दिसंबर से 15 जनवरी तक तो इन्हें प्रशासक राज मिला था, तब इन्होंने कोई दौरा नहीं किया, यह आश्चर्य की बात है।

■ महापौर के बिना दौरा करने का मकसद क्या ?
चंद्रपुर शहर को 16 जनवरी 2026 को 66 नगरसेवक मिल गए। करीब साढ़े तीन साल के लंबे इंतजार के बाद चंद्रपुर मनपा में प्रशासन का राज खत्म हुआ। इसके बाद तय अनुसार महापौर का चुनाव हुआ और भाजपा ने सत्ता संभालते हुए संगीता खांडेकर को महापौर चुन लिया। अब जब सत्ता की बागडोर 66 नगरसेवकों एवं महापौर के हाथों में पहुंच चुकी है तो अचानक से मनपा आयुक्त अकुनूरी नरेश ने वडगांव, एकोरी, नगीनाबाग, इंदिरा नगर, बंगाली कैंप प्रभागों का दौरा शुरू कर दिया है। हालांकि उनके दौरे से न तो प्रशासन और न ही स्थानीय सत्ता को कोई दिक्कत है। परंतु यह उठता है कि आखिर चंद्रपुर की प्रथम महिला का सम्मान जिन्हें प्राप्त है, उन महापौर को साथ लेकर वे दौरा क्यों नहीं कर पा रहे हैं ? यह चिंता और चिंतन का विषय बनता जा रहा है।

66 नगरसेवकों के नेतृत्व पर खतरा ?
हालांकि यह भी सच है कि मनपा आयुक्त अकुनूरी नरेश के दौरा स्थल वाले उस-उस प्रभाग के नगरसेवक मौजूद दिख रहे हैं, परंतु जनता यदि सीधे आयुक्त से अपनी शिकायतें करेगी तो जो जनता के बीच से चुने गए हैं, उन 66 नगरसेवकों के लिए काम क्या बचेगा ? ये 66 नगरसेवक जनता की वह कौन सी नई समस्या खोजकर मनपा सदन में पेश करेंगे जिसे मनपा आयुक्त ने दौरे के समय जनता से नहीं सुना हो ? नगरसेवकों के नेतृत्व और मनपा सदन के कार्यकौशल को बढ़ावा देना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अगर प्रशासन स्वयं ही नेतृत्व करने लगे और जनता की समस्याएं स्वयं जाकर पता कर उसे हल करने लगे तो मनपा में 66 नगरसेवकों की कोई आवश्यकता ही नहीं बचेगी, यह चर्चा अब चंद्रपुर शहर के राजनीतिक गलियारों में तूफान की तरह पसरने लगी है।

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