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स्नेह मिलन से 15 नगरसेवक नदारद !

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■ दूरियां ! : न स्नेह दिखा, न मिलन हुआ

चंद्रपुर.
मैं, मैं और सिर्फ मैं की अहंकार वाली राजनीति आजकल सर्वत्र दिखाई पड़ रही है। खासकर चंद्रपुर जिले के कांग्रेस में इसके अनेक उदाहरण देखने को मिल जाते है। बहरहाल, चंद्रपुर में एक नया विषय चर्चा, आलोचना और चिंतन के केंद्र में आ गया है। क्योंकि चंद्रपुर महानगर पालिका चुनाव के मद्देनजर लोहारा के एक निजी फार्म हाउस में स्नेह मिलन आयोजित किया गया। इस स्नेह मिलन के बैनर पर भले ही कांग्रेस द्वारा आयोजन का जिक्र नहीं है, लेकिन मंच और उपस्थितों की तस्वीरें बयां करती है कि यह आयोजन कांग्रेस के मनपा नगरसेवकों और समर्थकों से भेंट के मकसद से ही आयोजित किया गया था। गत 25 फरवरी 2026 की देर शाम तक चले स्नेह मिलन में कांग्रेस के 15 नगरसेवक नदारद दिखे। इससे यह अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि यहां कांग्रेस के तमाम नगरसेवकों का आपस में कितना स्नेह उमड़ पड़ा ? इसलिए अब कहा जा सकता है कि इस स्नेह मिलन में न स्नेह दिखा न मिलन हुआ।

हालांकि यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह आयोजन किसका था ? क्योंकि बैनर पर न तो कांग्रेस का उल्लेख है और न ही किसी संगठन का। बैनर पर केवल सांसद प्रतिभा धानोरकर की तस्वीर नजर आती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह उनका निजी कार्यक्रम रहा होगा। और निजी कार्यक्रम के लिए किसे न्योता देना चाहिए, किसे नहीं देना चाहिए यह उनका निजी मामला बन जाता है। शायद अनुपस्थित 15 कांग्रेस नगरसेवकों को न्योता नहीं दिया गया होगा। या तो यह भी हो सकता है कि उन्हें न्योता मिला हो लेकिन उन्होंने इस निजी कार्यक्रम से दूरियां बना ली। वजह भले ही कुछ भी हो, परन्तु जिले के सांसद महोदया की तस्वीर लगे इस बैनर तले वे 15 नगरसेवक नजर नहीं आएं जो बीते दिनों चुनाव परिणामों के बाद इस खेमे से कोसों दूर चले गए। उनकी नाराजगी दूर करने में क्या सांसद महोदया कामयाब हो पाईं हैं? यही इस समय का सबसे बड़ा सवाल है। इस आयोजन में उन 15 नगरसेवकों की अनुपस्थिति को देखकर तो यही लगता है कि इनमें स्नेह और मिलन पनप भी नहीं पाया। यहां कांग्रेस की राजनीति बेहद कमजोर पड़ती नजर आ रही है। यदि यह नाराजगी और यह दूरियां लंबे समय तक चलती रही तो कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव कभी नहीं जीत पाएगी। नाराज कांग्रेसियों की फौज कांग्रेस के खिलाफ ही जनमत तैयार करेगी। ऐसे में इन 15 नगरसेवक और इनके हजारों समर्थकों का वोट बैंक लोकसभा की सीट को हरवाकर ही दम लगा।

वर्तमान स्नेह मिलन समारोह में 15 नगरसेवकों की अनुपस्थिति इस बात की झलक है कि आगे चलकर राजनीति में पैसा, दबंगई, माफिया, गुंडागिरी, जातीय समीकरण यह सब बकवास बातें होगी। असली जीत तब मिलती है जब लोग, समर्थक, तमाम कार्यकर्ता, आसपास की मजबूत टीम आपके प्रतिभा व नेतृत्व कौशल के कायल बनकर आपको वोट करें। चुनावी लहर हर बार साथ नहीं देती। मोदी लहर भी एक दिन जैसे खत्म हो गई थी, ठीक वैसे ही इमोशनल और विक्टिम कार्ड खेलने की लहर को लोग भी नकार देंगे। इसलिए समय रहते स्नेह पूर्ण मिलन ही सभी मसले का इलाज है।

नगरसेवकों की अनुपस्थिति के मसले पर जब हमने मनपा के कांग्रेस गुटनेता राजेश अड्‌डूर से संपर्क कर उनकी प्रतिक्रिया ली तो उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि उन्हें भी न्योता था किंतु वे महाराष्ट्र से दूर अन्य राज्य के दौरे पर हैं, इसलिए वे कार्यक्रम में नहीं जा सकें। शेष 15 नगरसेवकों को न्योता मिला या नहीं, इसका उन्हें इल्म नहीं। वे कार्यक्रम में क्यों नहीं गए, इस बारे में भी उन्हें कोई ठोस जानकारी नहीं है।
बहरहाल, नगरसेवकों की अनुपस्थिति राजनीतिक खेमों में कांग्रेस की कमजोर नेतृत्व शैली को लेकर चर्चा का तूफान खड़ा कर रही है।

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