Home राजनीती पहले जूता मारो आंदोलन, फिर त्रिवार अभिनंदन

पहले जूता मारो आंदोलन, फिर त्रिवार अभिनंदन

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■ भाजपा का OBC मोर्चा और नेतागण ने पल्टी भूमिका

■ 9 दिनों में जरांगे की नीति असंवैधानिक से संवैधानिक कैसे बन गई ?

चंद्रपुर.
चंद्रपुर की राजनीति और सामाजिक पटल पर एक अजीबोगरीब घुमाव देखने को मिला। भाजपा के OBC मोर्चा और इस संगठन के वरिष्ठ नेता तथा प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. अशोक जीवतोडे के साथ उनके तमाम समर्थक और पदाधिकारियों का यूटर्न इन दिनों काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। क्योंकि डॉ. जीवतोडे अपने समर्थकों के साथ मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे का जाहिर निषेध करने के लिए गत 26 अगस्त को मैदान में उतरे। इन्होंने मनोज जरांगे की प्रतीमा को जूते-चप्पलों से मारने का आंदोलन कर अपना रोष जताया। ओबीसी में ‘घुसखोरी’ करने नहीं देंगे, जैसे नारे लगाएं। परंतु जैसे ही महाराष्ट्र सरकार की ओर से मराठा आरक्षण आंदोलन के संदर्भ में जीआर जारी हुआ। डॉ. अशोक जीवतोड़े और उनका संगठन तथा समर्थक एक ही दिन पलट गए। 2 सितंबर 2025 को नागपुर के संविधान चौक में मनोज जरांगे के मराठा आरक्षण की मांग के खिलाफ ओबीसी महासंघ के आंदोलन में शामिल होकर लौटने के दूसरे ही दिन डॉ. जीवतोडे सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए त्रिवार अभिनंदन का गुणगान करने लगे। उनकी इस बदली हुई भूमिका को लेकर सर्वत्र आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है।


क्या हुआ था नागपुर के आंदोलन में ?
डॉ. अशोक जीवतोडे बताते है कि गत 2 सितंबर 2025 को संविधान चौक, नागपुर में मनोज जरांगे की “सभी मराठाओं को ओबीसी में आरक्षण दो, सभी को कुणबी प्रमाणपत्र दो” जैसी असंवैधानिक मांगों के विरोध में राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ की ओर से श्रृंखलाबद्ध उपोषण किया गया। उपोषण के चौथे दिन वे वहां उपस्थित थे। इस दौरान राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. बबनराव तायवाडे, महासचिव सचिन राजूरकर, कार्याध्यक्ष गुनेश्वर आरिकर, सहसचिव शरद वानखेडे के अलावा बड़ी संख्या में राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ और ओबीसी जाति संगठनों के पदाधिकारी तथा ओबीसी समाज के सम्माननीय बंधु मौजूद थे। डॉ. अशोक जीवतोडे स्वयं राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के राष्ट्रीय समन्वयक तथा भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं, जो प्रमुखता से इस आंदोलन में शामिल थे। वे गत 31 अगस्त 2025 को भी इस आंदोलन में शामिल हुए थे। इस दौरान इनकी प्रमुख मांग यह थी कि मराठाओं को ओबीसी से आरक्षण नहीं दिया जाए। कुल 14 मांगों के साथ यह आंदोलन किया गया था।


और 26 अगस्त को किया था जूते मारो आंदोलन
ओबीसी नेता डॉ. अशोक जीवतोडे ने जानकारी दी कि “मुंबई में घुसपैठ करने वाले मनोज जरांगे को ओबीसी में घुसपैठ करने नहीं देंगे”। मुंबई में आजाद मैदान पर मराठा समाज को ओबीसी से आरक्षण दिलाने के लिए आंदोलन करने वाले मनोज जरांगे का चंद्रपुर के दीक्षाभूमि चौक पर भाजपा ओबीसी मोर्चा, महाराष्ट्र प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. अशोक जीवतोडे के नेतृत्व में तीव्र विरोध किया गया। यहां जरांगे की तस्वीर पर चप्पल मारकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज किया गया। आंदोलन में बड़ी संख्या में ओबीसी समाजबंधु उपस्थित रहे। डॉ. जीवतोडे ने कहा कि मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे को ओबीसी में घुसपैठ करने नहीं दिया जाएगा। जरांगे का उपोषण लोकतांत्रिक आंदोलन नहीं बल्कि ब्लैकमेलिंग का साधन है। वे राजनीतिक प्रेरणा से बार-बार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को निशाना बना रहे हैं। जिन मराठा परिवारों के रिकॉर्ड कुणबी के रूप में दर्ज हैं, उन्हें कुणबी प्रमाणपत्र देने पर हमारी आपत्ति नहीं है, लेकिन पूरे मराठा समाज को ओबीसी से आरक्षण देने का हम कड़ा विरोध करेंगे। जरांगे की मांग असंवैधानिक है और उनकी तानाशाही जारी है। हम जब तक जीवित हैं, मराठाओं को ओबीसी आरक्षण देने का विरोध करेंगे। अगर राज्य सरकार ने यह किया, तो हम सरकार के भी खिलाफ खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी विभिन्न आयोगों और सर्वोच्च न्यायालय ने मराठा समाज के आरक्षण को खारिज किया है। संविधानिक सिद्धांतों के तहत मराठा समाज को आरक्षण नहीं मिल सकता। 1978 से 2010 तक मराठा समाज के कई मुख्यमंत्री हुए, लेकिन उन्होंने कभी मराठा समाज को आरक्षण नहीं दिया और न ही कोई ठोस सर्वेक्षण कराया। डॉ. जीवतोडे ने आगे कहा कि जरांगे का आंदोलन और उनकी मांग ज़िद का चरम है। इससे दो समाजों में द्वेष बढ़ रहा है, जो भविष्य के सामाजिक सौहार्द के लिए घातक है। जरांगे को गिरफ्तार कर महाराष्ट्र से बाहर निकाला जाए।

आंदोलन के दौरान नारों के साथ किया विरोध
“मराठा समाज को ओबीसी से आरक्षण मत दो”, “मनोज जरांगे का निषेध हो”, “जय ओबीसी”। जरांगे की प्रतिमा पर चप्पलें मारी गईं और विरोध फलक ऊँचे उठाए गए। बड़ी संख्या में ओबीसी युवक और समाजबंधु इसमें शामिल हुए। इसका नेतृत्व डॉ. अशोक जीवतोडे ने किया।


अब जीवतोडे करने लगे त्रिवार अभिनंदन
महाराष्ट्र सरकार की ओर से जीआर जारी होने के तुरंत बाद अर्थात 3 सितंबर 2025 को डॉ. अशोक जीवतोडे ने अपना बयान जारी कर कहा कि – “शुरुआत से ही मनोज जरांगे की मांग उनके समाज को जाति प्रमाणपत्र देने संबंधी थी। मराठवाड़ा के कई लोग ऐसे हैं जिन्हें अभी भी प्रमाणपत्र नहीं मिला है, इसी कारण यह असंतोष भड़का और आंदोलन बढ़ा। कल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने जो जीआर (शासन निर्णय) जारी किया है, उसमें हैदराबाद गजेटियर से जोड़कर यह प्रक्रिया सरल कर दी गई। जिनके पास जाति प्रमाणपत्र नहीं था, उन्हें अब न्यायसंगत तरीके से प्रमाणपत्र मिल सकेगा। इससे ओबीसी को डरने की कोई जरूरत नहीं है। केवल वही लोग आएंगे जिनकी जाति कुणबी/कुणबी- मराठा/मराठा-कुणबी के रूप में दर्ज है। उनकी संख्या भी बहुत बड़ी नहीं है। फडणवीस ने बहुत संतुलित निर्णय लिया है। उन्होंने मराठों को अलग से 10 प्रतिशत आरक्षण दिलाने का सपना भी पूरा किया था और अदालत में उसे टिकाकर दिखाया। इसलिए मैं उन्हें तहेदिल से बधाई देता हूँ। उन्होंने ओबीसी को आहत किए बिना मराठों की उचित मांगें पूरी करने का प्रयास किया है।”

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