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OBC जातिय जनगणना : ‘राजपत्र’ पर OBC नेताओं ने साध ली चुप्पी !

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■ यदि OBC नेता ही OBC के मुद्दों पर खामोश रहेंगे तो उम्मीद किनसे करें ?

चंद्रपुर.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के जातिगत जनगणना के वादे पर एक ओर जहां देश भर में सवाल उठने लगे हैं, वहीं दूसरी ओर OBC के नाम से जातिय समीकरणों से राजनीतिक फायदा उठाने वाले और समय-समय पर OBC हितों का नारा लगाने वाले चंद्रपुर जिले के अधिकांश नेता जो स्वयं OBC हैं, वे सभी हाल ही में जारी हुए गजट अधिसूचना को लेकर कमाल की चुप्पी साध बैठें हैं। जबकि केंद्र सरकार के गजट में OBC की जातिय जनगणना का कोई उल्लेख नहीं हैं। इसके चलते बहुजन समाज अपने-अपने नेताओं के मुंह ताक रहा है ताकि वे कुछ कहे और सरकार को OBC की जातिय जनगणना कराने के लिए बाध्य किया जाएं।

OBC नेताओं की चुप्पी पर बहुजन समाज हैरान
ज्ञात हो कि भारत सरकार की ओर से 30 अप्रैल 2025 को यह घोषणा की गई थी कि वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना में OBC की जातिगत जनगणना भी सम्मिलित की जाएगी। इसे स्वतंत्र भारत के इतिहास की पहली जाति-आधारित जनगणना बताया गया था। इस घोषणा के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इसे ऐतिहासिक कदम के रूप में देखा जाने लगा। लेकिन अब सरकार द्वारा 16 जून 2025 को जारी आधिकारिक गजट अधिसूचना ने इस दावे को संदेह के घेरे में ला दिया है। चंद्रपुर जिले के नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि भाजपा हो या कांग्रेस, किसी भी राजनीतिक दल में सक्रिय OBC नेताओं को इस गजट पर आपत्ति दर्ज कराते हुए अपनी बात रखनी चाहिये और एक जनआंदोलन खड़ा करना चाहिये। लेकिन आम जनता और बहुजन समाज चंद्रपुर जिले के OBC नेताओं की चुप्पी को देखकर हैरान है।

चंद्रपुर में अनेक OBC नेता, लेकिन….
चंद्रपुर जिले में वैसे तो तमाम राजनीतिक दलों में OBC नेतृत्व काम कर रहा है, परंतु कांग्रेस और भाजपा जैसे बड़े दलों की कमान भी OBC नेताओं के हाथों में ही हैं। जिन्हें चुनाव के समय उम्मीदवारी दी जाती है या यूं कहे OBC के नाम पर टिकट मांगी जाती है, वे OBC नेता भी चंद्रपुर में कम नहीं है। कांग्रेस सांसद प्रतीभा धानोरकर, विधायक विजय वडेट्‌टीवार, पूर्व विधायक सुभाष धोटे, सतीश वारजुकर, प्रवीण काकडे के अलावा अनेक ऐसे नेता है जिन्होंने OBC के नाम पर वोट पाएं हैं। वहीं दूसरी ओर भाजपा में पूर्व केंद्रीय मंत्री हंसराज अहीर, विधायक देवराव भोंगले, विधायक करण देवतले, श्रीकृष्ण सहारे, अशोक जीवतोडे, राहुल पावडे, आदि अनेक नेताओं के नाम लिये जा सकते हैं, जिन्होंने OBC के नाम पर लगातार राजनीति की है और OBC के लिए सहानुभूति बटोरकर इसका राजनीतिक लाभ पाया है। परंतु अब जब केंद्र सरकार के गजट में OBC जातिय जनगणना का मुद्दा नदारद है तो यह तमाम नेताओं की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया या आंदोलन कहीं नजर नहीं आया। हो सकता है कि किसी नेता ने व्यक्तिगत स्तर पर कुछ किया भी हो, लेकिन विशाल जनसमूदाय को इस मुद्दे पर सजग और एकजुट करने के लिए चंद्रपुर के OBC नेताओं ने चुप्पी साध ली है।

गजट में सिर्फ सामान्य जनगणना का उल्लेख
गृह मंत्रालय द्वारा जारी गजट अधिसूचना के अनुसार, जनगणना मार्च 2027 में की जाएगी। कुछ पर्वतीय क्षेत्रों जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में संदर्भ तिथि अक्टूबर 2026 तय की गई है। लेकिन इस पूरी अधिसूचना में जातिगत जनगणना का कहीं कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इस चुप्पी ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जबकि 30 अप्रैल को प्रेस रिलीज़ में स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि जातिगत जनगणना की जाएगी, लेकिन अब आधिकारिक दस्तावेज में यह विषय पूरी तरह नदारद है।

सरकार की सफाई और मौन विरोधाभास
भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस से बातचीत में कहा कि जनगणना में सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन और जातिगत आधार पर आंकड़ों का संग्रह प्रस्तावित है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य सरकारें सिर्फ सर्वेक्षण कर सकती हैं, जबकि विधिसम्मत जनगणना का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। हालांकि उन्होंने इस बात का कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया कि गजट अधिसूचना में जातिगत जनगणना का उल्लेख क्यों नहीं किया गया। इससे यह संदेह और गहरा हो गया कि क्या सरकार वाकई इस जनगणना को कराना चाहती है या यह सिर्फ एक राजनीतिक बयान था।

विपक्ष का हमला – ‘जुमला साबित हुआ वादा’
कांग्रेस की नेता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने जातिगत जनगणना की घोषणा कर जनता के विश्वास के साथ छल किया है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार ने केवल ₹70 करोड़ का बजट आवंटित किया है, जो उसकी मंशा पर प्रश्नचिह्न लगाता है। सचिन पायलट ने भी सरकार की “कथनी और करनी” में फर्क बताते हुए यह सवाल उठाया कि अगर जनगणना में जातीय आंकड़े नहीं जोड़े जाएंगे, तो फिर 30 अप्रैल की घोषणा किस उद्देश्य से की गई थी?

राजनीतिक लाभ की मंशा या मुद्दों से ध्यान भटकाना ?
कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि 30 अप्रैल को की गई यह घोषणा केवल पहलगाम आतंकी हमले जैसे संवेदनशील मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए की गई थी। अब जबकि गजट अधिसूचना में जातिगत जनगणना का कोई जिक्र नहीं है, तो यह स्पष्ट होता जा रहा है कि यह कदम केवल राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया था।

जनता के सामने अब बड़ा सवाल
क्या केंद्र सरकार सच में जातिगत जनगणना कराएगी या यह वादा केवल एक चुनावी लॉलीपॉप था? यदि जातिगत जनगणना होनी थी, तो उसका स्पष्ट उल्लेख अधिसूचना में क्यों नहीं किया गया?

सरकार को अब देश की जनता के सामने स्पष्ट रूप से बताना होगा कि –
■ क्या वह जातिगत जनगणना को लेकर गंभीर है?
■ क्या यह निर्णय बिहार जैसे आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया था?
■ क्या यह एक और राजनीतिक “जुमला” साबित होगा?

■ अंतिम बात :
मोदी सरकार को इस मुद्दे पर जल्द और साफ़ जवाब देना होगा, वरना जातिगत जनगणना का यह वादा भी महज़ एक अधूरा सपना और जनता के साथ छलावा साबित होगा। ऐसे में चंद्रपुर जिले की जनता और खासकर OBC समाज, जिले के OBC नेताओं की भूमिका को लेकर प्रतीक्षारत है। बहुजन समाज इंतजार कर रहा है कि जिले के OBC नेता (भाजपा हो या कांग्रेस) कुछ कहे, कुछ प्रतिक्रिया दें तो आगे की रणनीति तय कर सकें। परंतु आश्चर्य की बात है कि कांग्रेस और भाजपा के OBC नेता एकदम खामोश बैठे हैं। यही नेतागण चुनाव के वक्त OBC के नाम पर वोट अवश्य मांगने जाते हैं।

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