प्रदूषण से जीवन और खेती बर्बाद करने वालों पर क्यों नहीं होती कार्रवाई ?
चंद्रपुर :
बरसों से चंद्रपुर के पड़ोली परिसर में मौजूद अधिकांश कोल डिपो को अवैध करार दिया गया। तमाम तरह की पाबंदियों के बावजूद प्रशासन को ठेंगा दिखाकर प्रतिबंधित कोल डिपो यहां कोयले का काला व्यापार कर रहे हैं। MPCB, जिला प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों ने अनेक बार इन्हें यहां से हटाकर वणी में स्थलांतरित करने का प्रयास किया। परंतु बैन हो चुके कोल डिपो पर MPCB के कौनसे अफसर का आशीर्वाद है ? पता नहीं, लेकिन इन डिपो की करतूतों के कारण परिसर में ही नहीं, बल्कि समूचे चंद्रपुर को धूल और प्रदूषण के जहर का सामना करना पड़ रहा है। यह कोल डिपो दिन-दहाड़े पे-लोडर जैसे विशाल वाहनों का उपयोग कर कोयले को हवा में उछालकर उसकी छंटनी करते है। आसमान में धूल के गुबार उड़ाते हैं। इसके बावजूद MPCB के क्षेत्रिय अधिकारी तानाजी यादव अवैध कोल डिपोधारकों का बाल भी बाका नहीं कर पा रहे हैं। क्या मिलीभगत के कारण ही यह काला खेल चल रहा है ? यह सवाल अब आम नागरिकों की ओर से पूछा जाने लगा है।
चंद्रपुर को अत्याधिक प्रदूषित शहरों में गणना की जाती है। हमारी अपने शहर के प्रति यह कैसी आस्था है कि इस कलंक को हम बरसों से मिटा नहीं पा रहे है ? यहां का MPCB प्रशासन और इस कार्यालय में कुर्सियां तोड़ने वाले अधिकारियों की टीम आखिर बैठे-बैठे करते क्या हैं ? क्यों वे इस प्रदूषण को रोक पाने में नाकाम हो रहे है ? क्या कोई ऐसा है जो इन अवैध कोल डिपो के खिलाफ होने वाले संभावित कार्रवाई को रोकने के लिए मलाई चट कर जा रहा है ? क्या इस मलाई के खेल के चलते प्रदूषण फैलाने वाले कोल डिपो धारकों को संरक्षण मिल रहा है ? करोड़ों की काली संपत्ति जुटाने वाले कोयले के अवैध व्यापारी कहीं MPCB को अपनी जेब में रखकर मुनाफे का हिस्सेदार तो नहीं बना रहे है ? ऐसे अनगिनत सवाल इसलिए पैदा हो रहे है क्योंकि बरसों से अवैध कोल डिपो के खिलाफ केवल कार्रवाई का नाटक किया जा रहा है। MPCB प्रशासन केवल इन्हें नोटिस थमाकर अपनी जिम्मेदारी को पूर्ण करने का दिखावा करता है। असली कार्रवाई से यह काले कारोबारी काफी कोसों दूर हैं। इनके खिलाफ अब यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो एक दिन MPCB के चंद्रपुर कार्यालय में अफसरों का बैठना मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि जनता अब इस मिलीभगत और मलाई के खेल को समझ रही है। प्रदूषण के खिलाफ नागरिक एकजुट होने लगे हैं। यदि यही आलम रहा तो आगामी दिनों में चंद्रपुर में लोगों का आंदोलन एक न एक दिन MPCB कार्यालय तक पहुंच ही जाएगा।
चंद्रपुर के अलावा पड़ोली और नगाला को भी अति प्रदूषित बन चुका है। इस परिसर में न केवल एमआईडीसी का प्रदूषण चरम पर हैं, बल्कि करोड़ों के कोयला व्यवसाय पर बरसों से अवैध कोल डिपो का साया ऐसे जकड़ा हुआ है कि इसके प्रदूषण को दूर करने में स्थानीय महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी भी फेल हो चुके हैं। नोटिसें थमाना, रिपोर्ट बनाना, मंत्रालय से शिकायत, मंत्रियों को निवेदन, पालकमंत्री व जिलाधीश की बैठकें, वणी में कोल डिपो को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव आदि सभी विफलता वाली स्कीमें ही साबित हुई है। आज भी MPCB प्रशासन के छाती पर मूंग दलते हुए यहां के अधिकांश कोल डिपो कोयले की छननी करने के लिए दिन-दहाड़े, धड़ल्ले से पे-लोडर का इस्तेमाल करते हुए खुली हवा में धूल को उड़ाकर कोयले की छंटाई करते हुए देखे जा सकते हैं। इस गंभीर वायु प्रदूषण के खिलाफ MPCB, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि कुछ नहीं कर पा रहे हैं। कोयला व्यापारियों के साथ साठगांठ और मिलीभगत का खेल जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
बीते कुछ वर्षों में अवैध कोल डिपो पर प्रदूषण मंडल की ओर से छापेमार कार्रवाई का दिखावा किया गया। वायु प्रदूषण की स्थिति का जायजा लेकर अनेक रिपोर्टें बनाई गई। सरकार और मंत्रालय तक रिपोर्ट पहुंचाई गई। लेकिन ठोस कार्रवाई को लेकर बरसों से एक कदम भी प्रशासन आगे नहीं बढ़ पाया है। चंद्रपुर से सटे पडोली व नगाला में अधिकांश प्रतिबंधित कोल डिपो न केवल शुरू दिखाई पड़ते हैं, बल्कि दिन-दहाड़े अनेक कोल डिपो पर पे-लोडर जैसे भारी वाहन से धूल मिश्रित कोयले को साफ किया जा रहा था। पे-लोडर धूल को हवा में उड़ाकर शेष कोयले को ट्रक में लोड़ करते हुए देखा जाना आम बात बन गई है। यह धूल परिसर के आसमान का धूंधला कर जाता है। वायु प्रदूषण को लेकर MPCB एवं जिला प्रशासन आज तक गंभीर नहीं हो पाया है। जबकि खुद को पर्यावरणप्रेमी कहलाने वाले अनेक मान्यवर भी प्रशासन पर दबाव बनाने में नाकाम ही साबित हुए हैं।
MPCB की खानापूर्ति वाली कार्रवाई के बावजूद बीते अनेक वर्षों से यहां घातक वायु प्रदूषण जारी है। इसके खिलाफ खुद MPCB, जिला प्रशासन, विधायक, सांसद एवं तमाम जनप्रतिनिधि ठोस कार्रवाई करवाने में फेल होना आम जनता के लिए चिंता और चिंतन का विषय बना हुआ है।
यहां के अधिकांश कोल डिपो अवैध है। भारी मात्रा में यहां कोयले का संकलन नहीं किया जा सकता है। MPCB अपने पर्यावरण के नियमों का निरंतर हवाला देते हुए इन्हें अनेक बार नोटिस थमा चुका है। इसके बाद जिलाधीश को रिपोर्ट सौंप दी जाती है। परंतु इन सभी डिपो को बंद करवाने में जिला प्रशासन भी नाकाम ही साबित हुए है। उल्लेखनीय है कि एनजीटी के गाइडलाइन के अनुसार जिले में किसी भी कोल डिपो को अनुमति नहीं हैं।
MPCB के क्षेत्रिय अधिकारी तानाजी यादव से चंद्रपुर की बुलंद आवाज के प्रतिनिधी के बात करने पर उन्होंने बताया कि उक्त मामले की जानकारी उनके पास नहीं है उन्होंने कहा MPCB कार्यालय चंद्रपुर में उनके अधिनियुक्त अधिकारी इस पर प्रतिक्रिया दे पाएंगे।










