– केवल चार पी.आई. का तबादला कर दिये जाने से डैमेज कंट्रोल होगा क्या एसपी जी?
चंद्रपुर – एक ओर कोयला खदान प्रभावित क्षेत्रों में नागरिकों के पुनर्वास और समस्या का निराकरण के संबंध में बुधवार 7 फरवरी को हुई समीक्षा बैठक में जिला पालकमंत्री डाॅ. अशोक उईके ने जिला पुलिस को फटकार लगाते हुये कहा कि जिले में अवैध कारोबार बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जो अधिकारी अवैध गतिविधियों में लिप्त किसी भी व्यक्ति का समर्थन करते हुये पाया जायेगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी| दूसरी ओर जिला पुलिस अधीक्षक सुदर्शन ने उसके बाद शुक्रवार 21 फरवरी को एक आदेश जारी करते हुए जिले के चार चर्चित पुलिस निरीक्षकों के तुरंत तबादले कर दिये| सवाल है कि एस.पी. साहब का यह प्रयास डैमेज कंट्रोल के लिये हैं या इसके पीछे अन्य कोई दूसरी वजह है? इन चारों चर्चित तबादलों के बाद जिला पुलिस के अंदरखाने में जो चर्चाएं चल रही हैं उसके मद्देनजर रखते हुए इतना तो निश्चित है कि यह तबादले न तो रूटीनी और न ही प्रशासनिक कारणों से किये गये हैं। फिर इसके पीछे ऐसी कौन सी वजह है जिसके चलते इन चारों पी.आई. स्तर के बड़े व अनुभवी पुलिस अधिकारियों का तबादला इतना फास्ट व तत्काल करना पड़ा। सवाल है क्या इन तबादलों से डैमेज कंट्रोल हो जायेगा?
वास्तव में जिला पुलिस में अधिकारियों के तबादलों की चर्चा काफी दिनों से चल रही थीं। मगर इन चार गिने चुने अधिकारियों का ‘न हाक न बोंब’इस तर्ज पर तुरंत तबादला कर दिये जाने से इस चर्चा को अलग ही रंग चढ़ गया है| माना कि स्थानीय अपराध शाखा के पीआई महेश कोंडावार का तबादला चंद्रपुर जिले में उनका पांच साल का कार्यकाल खत्म होने के कारण, वैसे ही होना ही था| हुआ बस| लेकिन भद्रावती पुलिस थाने के पी.आई अमोर काचोरे का क्या? साल भर में यह उनका चौथा तबादला है| क्या वे एलसीबी में टीक पायेंगे? दुर्गापुर की पी.आई. लता वाडिवे को भद्रावती और प्रभारी पुलिस उपअधीक्षक की जिम्मेदारी संभालनेवाले पी.आई. को दुर्गापुर भेजा गया है। जब भेजा ही गया है तो वे अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे भी। लेकिन क्या वे बखुबी निभायेंगे? सवाल है यह तबादले पालकमंत्री की फटकार के कारण हुए हैं या राजनीतिक दबाव से? जिला पुलिस में असंतोष इसी बात को लेकर है। पुलिस अधिकारियों के मनोबल का खच्चीकरण करने वाला यह भगवा दरबार कब तक अपना रंग दिखाता रहेगा? एलसीबी के लिए जिले में कार्यरत कई थानेदारों ने फिल्डिंग लगाई थी। लेकिन अमोल काचोरे बाजी मार गये। कहीं यह विधायक की कृपा का प्रसाद तो नहीं? जिले में अपराध बढ़े, अपराधी बढ़े, अवैध धंधे बढ़े, तस्करी बढ़ी, साइबर गुनाह में इजाफा हुआ, गैंग बढ़ेे, गैंगस्टर, माफिया बढ़े और ड्रग्ज पेडलर्स भी क्या इस पर नियंत्रण पाया जायेगा? इसका जवाब कब ढूंढंगे हम लोग?










