चंद्रपुर :
चंद्रपुर जिले के सावली तहसील के किसान इस बार दोहरी मार झेल रहे हैं। खरीफ के दौरान धान की फसल पर रोग लगने से उत्पादन में भारी कमी आई है। वहीं, सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और व्यापारियों की धोखाधड़ी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। किसानों की हो रही लूट पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने चुप्पी साध ली है। किसी भी जनप्रतिनिधि की ओर से इस लूट के खिलाफ आवाज नहीं उठाया जाना आश्चर्य की बात है।
फसल का नुकसान और आर्थिक संकट
खरीफ के शुरुआत में अच्छी बारिश ने किसानों को उम्मीद दी, लेकिन बाद में मौसम में अचानक बदलाव और फसल पर रोग के कारण उनकी आधी से ज्यादा फसल बर्बाद हो गई। ऐसे में सरकार ने धान का समर्थन मूल्य सिर्फ ₹2,300 प्रति क्विंटल घोषित किया, जो किसानों के उत्पादन खर्च को भी पूरा नहीं कर पा रहा।
व्यापारियों की लूट
सरकार के कम समर्थन मूल्य के बाद भी व्यापारी धान को कम कीमत पर खरीद रहे हैं। इतना ही नहीं, किसान की हर बोरी से 2-3 किलो अतिरिक्त धान की कटौती की जा रही है। इससे पहले ही उत्पादन में कमी झेल रहे किसानों को और नुकसान उठाना पड़ रहा है।
महंगी लागत, कम कीमत
खेती में बीज, खाद, दवाओं, और श्रम पर भारी खर्च होता है। इस साल इन सभी चीजों की कीमतें बढ़ गईं, लेकिन धान की कीमत घट गई। पिछले साल धान ₹3,000 प्रति क्विंटल तक बिका था, लेकिन इस साल यह कीमत काफी कम है। इससे किसान उत्पादन खर्च भी नहीं निकाल पा रहे और कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं।
किसानों का गुस्सा और बेबसी
निवेदन और प्रदर्शन के बाद भी कोई सुनवाई न होने से किसान निराश हो चुके हैं। चुनाव के बाद ऐसा लग रहा है जैसे उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। मजबूरी में किसान जो भी कीमत मिल रही है, उसी पर धान बेच रहे हैं।
बाजार समिति का बयान
सावली कृषि उपज मंडी समिति के अध्यक्ष हिवराज पाटिल शेरकी ने बताया कि तालुका में 170-172 पंजीकृत व्यापारी हैं, जो धान खरीद और बिक्री का काम करते हैं। समिति का दावा है कि उनकी निगरानी में व्यापार हो रहा है। यदि किसी व्यापारी को अनियमितता करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आर्थिक संकट में फंसे किसान
कई किसानों का मानना है कि मार्च के बाद धान की कीमतें बढ़ सकती हैं, लेकिन वर्तमान आर्थिक तंगी के कारण वे अपनी फसल लंबे समय तक रोककर रखने में असमर्थ हैं। ऐसे में उनके पास नुकसान उठाकर धान बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
अंतिम बात
धान की फसल पर रोग, सरकार की कमजोर नीतियां और व्यापारियों की चालाकी ने सावली तालुका के किसानों को गहरे आर्थिक संकट में डाल दिया है। खेती से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करेगी और किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य दिलाएगी।










