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ब्लू’ जोन पर ‘लाल’, जोरगेवार व पालीवाल

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 मनपा आयुक्त कह रहे – मनमाने तरीके से निर्माण कार्य करने पर चलेगा बुलडोजर,

विधायक कह रहे –  घरों को न छुएं

 

ब्लू लाइन के मकानों पर कार्रवाई रोके : विधायक
ब्लू जोन में निर्माण पर बिल्डरों पर दर्ज होगा अपराध : आयुक्त

चंद्रपुर के इरई नदी से सटे बस्तयों में ब्लू लाइन पर जारी निर्माण पर बीते अनेक दिनों से स्थानीय महानगर पालिका प्रशासन की ओर से सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई की जा रही है। इस बीच स्थानीय विधायक किशोर जोरगेवार ने 27 अगस्त 2024 को मनपा में एक बैठक आयोजित कर मनपा आयुक्त विपीन पालीवाल समेत अन्य अफसरों को किसी भी घर को न छुने, घरों पर की जा रही कार्रवाई को तुरंत रोकने के निर्देश दिये। काफी हैरत की बात है कि इस निर्देश के एक सप्ताह के भितर ही अर्थात 3 सितंबर 2024 को मनपा आयुक्त विपीन पालीवाल ने विधायक जोरगेवार के निर्देशों को धता बता दिया। ब्लू जोन में किए जा रहे निर्माण कार्यों पर बुलडोजर चलाने और बिल्डरों पर अपराध दर्ज करने का निर्णय आयुक्त पालीवाल ने जारी कर दिया। इसके चलते विधायक जोरगेवार और मनपा आयुक्त पालीवाल में ठन गई है। अब यह तो वक्त ही बताएगा कि जोरगेवार की इसमें मात खाकर हार जाते हैं, या पालीवाल को शांत बैठने की नौबत आएगी ?

जोरगेवार व पालीवाल के विवाद की जड़
विधायक किशोर जोरगेवार एवं मनपा आयुक्त विपीन पालीवाले की अलग-अलग राय के चलते आज जो विवाद की स्थिति निर्माण हुई है, इसकी जड़े 22 अगस्त 2024 में हैं। इस दिन मनपा प्रशासन के एक दल ने जेसीबी के माध्यम से ब्लू जोन के 3 इमारतों को अवैध करार देते हुए उसके निर्माण कार्य को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद इरई नदी किनारे बसी बस्तियों के नागरिक परेशान हो गये। वे विधायक जोरगेवार की शरण में चले गये। मनपा की ओर से की जा रही कार्रवाई पर तत्काल विराम लगाने का अनुरोध किया। जोरगेवार ने लोगों की बातें मान ली। उन्होंने आनन-फानन में 27 अगस्त 2024 को मनपा कार्यालय में बैठक लगाकर दरबार सजा ली। मनपा आयुक्त विपीन पालीवाल समेत सभी अधिकारियों को कठोर निर्देश दिया। किसी के घरों न छूने की हिदायत दे डाली। इसके बाद पता नहीं कैसे मनपा आयुक्त पालीवाल के भितर का कर्तव्यदक्ष अफसर जाग उठा। उन्होंने 3 सितंबर को अपना नया फैसला विधायक जोरगेवार के निर्देशों के खिलाफ जारी कर दिया। इस फैसले में पालीवाल ने न केवल बिल्डरों पर अपराध दर्ज करने की सूचना जारी की बल्कि मनमाने तरीके से निर्माण कार्य करने पर बुलडोजर चलाने की चेतावनी भी दे डाली। इसके चलते अब विधायक जोरगेवार का अगला कदम क्या होगा, यह तय कर पाना मुश्किल है।

जोरगेवार के वाहवाही पर पानी क्यों फिर गया ?
विधायक जोरगेवार ने अपने बयान में कहा है कि चंद्रपुर शहर लगातार बढ़ रहा है। नई बस्तियों के समक्ष वन एवं पुरातत्व विभाग की अड़चनें आ रही है। ऐसे में मनपा के ब्लू लाइन पर निर्मित इमारतों पर मनपा प्रशासन की ओर से की जा रही कार्रवाई मुश्किलें पैदा कर रही है। चंद्रपुरवासी आखिर जाएं तो कहां जाएं ? इसलिए तत्काल मनपा की कार्रवाई को रोक दिया जाएं। किसी एक भी घर को हाथ न लगाएं। यह निर्देश मनपा आयुक्त विपीन पालीवाल को दिये। बैठक में नगर रचना विभाग के भी अधिकारी मौजूद थे। विधायक का मानना है कि इस ब्लू लाइन की बस्तियों में नागरिक बरसों से निवास कर रहे हैं। उनके घर तोड़े जाने पर उनका जीवनयापन प्रभावित होगा। बैठक में जोरगेवार के निर्देश और रुख को देखते हुए अनेक नागरिकों ने उनका आभार व्यक्त किया। इस बैठक का एक वीडियो बनाकर, गीत आरंभ है प्रचंड, बोले मस्तकों के झुंड…. के साथ स्वयं का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर विधायक जोरगेवार ने वाहवाही लूटी। परंतु अब मनपा आयुक्त पालीवाल के ताजा आदेश से जोरगेवार की वाहवाही पर पानी फिर गया है।

पालीवाल के आदेश से क्यों हो रही खलबली ?
विधायक जोरगेवार के साथ बैठक करने के महज एक सप्ताह में ही मनपा आयुक्त विपीन पालीवाल ने जो आदेश निकाला, उससे ब्लू जोन में निवास करने वाले नागरिकों में खलबली मची हुई है। आयुक्त ने अपने आदेश में कहा है कि आरक्षित एवं ब्लू जोन क्षेत्रों में किए जा रहे निर्माण कार्यों पर बुलडोजर चला देंगे। किसी भी प्रकार का निर्माण किया जाता है तो संबंधित बिल्डर तथा उसके सहायक पर अपराध दर्ज करा देंगे। जरूरत पड़ने पर निरीक्षण के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल करेंगे। ब्लू जोन में जमीन या मकान की खरीदी-बिक्री न की जाएं। यहां अतिक्रमण एवं कांक्रीटिंग के कारण बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका में भी यह मामला उजागर हो चुका है। इसलिए यदि निर्माण स्थल पर निर्माण की सामग्री दिखने पर जब्त की जाएगी और निर्माणाधीन इमारत को ध्वस्त किया जाएगा।

ब्लू जोन के भूखंडों को कलेक्टर ने क्यों दी मंजूरी
विधायक और मनपा आयुक्त के विवाद में एक बात तो साफ हो गई है कि ब्लू जोन परिसर में इमारतों का निर्माण धड़ल्ले से किया गया। यदि इन इलाकों में इमारतों का निर्माण अवैध माना गया है तो यहां के भूखंडों को जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से मंजूरी कैसे दी गई ? आखिरकार मनपा की अचानक नींद कैसे टूट गई ? इतने दिनों तक, या यूं कहे बरसों से सोयी रही मनपा अचानक जाग कैसे गई ? इरई नदी के बाढ़ प्रवण इलाकों में बरसों से अनेक बिल्डर नदी के तट पर इमारतों का निर्माण कर मोठी कमाई कर रहे थे। इन पर बरसों से मनपा प्रशासन मेहरबान क्यों था ? राष्ट्रवादी नगर परिसर, तुलसी नगर, आंबेडकर सभागृह परिसर, वडगांव पुरानी बस्ती, सोमय्या पॉलिटेक्नीक परिसर, हवेली गार्डन, जगन्नाथबाबा नगर, अग्रसेन भवन परिसर, शांतिधाम परिसर आदि इलाकों में अवैध बिल्डरों ने बड़ी-बड़ी इमारतें बना ली, तब मनपा प्रशासन की नींद क्यों नहीं टूट पायी थी ?

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