■ भाजपा और कांग्रेस के नगरसेवकों में तीव्र रोष उफान पर
■ 6 माह में कुछ नहीं बदला, आयुक्त के दौरे भी बेअसर
चंद्रपुर।
गत 11 दिसंबर 2025 को चंद्रपुर महानगरपालिका प्रशासन के आयुक्त पद पर नियुक्त हुए अकुनूरी नरेश के कार्यकाल को करीब 6 माह बीत रहे हैं। परंतु इन छह माह में न तो मनपा की कार्यप्रणाली में कोई ठोस सुधार हुआ और न ही चंद्रपुर शहर की तरक्की को लेकर कोई अहम कदम उठाया जा सका। इसके विपरीत चुनावी प्रक्रिया से चुने गए नवनियुक्त नगरसेवकों में से अधिकांश अब अकुनूरी नरेश की कार्यप्रणाली से काफी नाराज़ नज़र आ रहे हैं। मनपा आयुक्त के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारियां चल रही हैं। भाजपा और कांग्रेस, दोनों दलों के नगरसेवकों ने मनपा आयुक्त के खिलाफ ताल ठोंकने का मन बना लिया है। कांग्रेस एवं भाजपा के खेमों में मनपा आयुक्त को हटाने की रणनीति पर चर्चा चल रही है।
राजनीतिक दलों के विविध गुटों की अंतर्गत राजनीति जहां एक ओर चंद्रपुर महानगरपालिका की कार्यप्रणाली पर असर कर रही है, वहीं दूसरी ओर अनेक नगरसेवकों की ओर से मनपा आयुक्त अकुनूरी नरेश पर अनगिनत आरोप लग रहे हैं।
■ वो 10 कारण जो मनपा आयुक्त चर्चा के कटघरे में
■ 1. गत 15 दिसंबर 2026 को अचानक सुबह 10 बजे मनपा कार्यालय पहुंचकर देरी से आने वाले कर्मचारियों के लिए दरवाज़ा बंद कराया था, लेकिन यह अनुशासन बाद के 6 माह में कभी नज़र नहीं आया।
■ 2. नवनियुक्त महापौर और उपमहापौर के साथ प्रभागों का दौरा करना चाहिए था, लेकिन स्वयं ही अनेक प्रभागों का दौरा करने लगे।
■ 3. प्रभागों का दौरा करते समय कभी दुपहिया से भ्रमण करना तो कभी पैदल चलना, मीडिया के कैमरों के लिए सुर्खियां बनीं। परंतु यह केवल प्रसिद्धि तक ही सीमित मानी जा रही है।
■ 4. जिन-जिन प्रभागों का दौरा कर मनपा आयुक्त ने वहां के नागरिकों से बातचीत कर समस्याएं जानने की कोशिश की, उन समस्याओं पर बाद में क्या समाधान निकाला गया, इसकी जानकारी कभी मनपा आयुक्त ने सार्वजनिक नहीं की। इसके चलते यह एक स्टंट के रूप में देखा जाने लगा है।
■ 5. चर्चा है कि मनपा आयुक्त ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों के अनेक अधिकारों को नियंत्रित किया है। छोटे-छोटे बिलों एवं फाइलों पर भी मनपा आयुक्त के हस्ताक्षर लेना बंधनकारक किया गया।
■ 6. जब कभी किसी फाइल पर मनपा आयुक्त के हस्ताक्षर लेने की नौबत आन पड़ती तो अनेक दिनों तक उन फाइलों को रोककर रखने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
■ 7. शहर में विकास कार्य करने वाले लाखों के बिलों को तो छोड़ ही दें, मामूली हजारों के बिलों को भी अटकाने का खेल किए जाने का आरोप है।
■ 8. गत दिनों माता महाकाली यात्रा के दौरान पुख्ता तैयारियों का दंभ भरने वाले आयुक्त की नीतियां तब फेल साबित हुईं जब अचानक जमकर बारिश और तूफान ने दस्तक दी। हजारों श्रद्धालुओं को सिर छिपाने की जगह तक नहीं मिली। मनपा प्रशासन की व्यवस्था की बदहाली ने कलंकित कर दिया। परंतु आयुक्त ने खेद तक नहीं जताया।
■ 9. हाल ही में आयोजित हिराई महोत्सव के दौरान मनपा आयुक्त अकुनूरी नरेश स्वयं ही मंच पर विराजमान थे। सांसद प्रतिभा धानोरकर ने इस आयोजन को लेकर पक्षपात करने, प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत की। परंतु मनपा आयुक्त ने खेद नहीं जताया, उल्टे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों व अधिकारियों को नोटिस थमाकर वे अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ गए। कायदे से तो मनपा आयुक्त को ही नोटिस थमाया जाना चाहिए था।
■ 10. चंद्रपुर शहर में हर साल भीषण गर्मी के दौरान जलसंकट दस्तक देता है। टैंकर से जलापूर्ति का नियोजन किया जाता है। परंतु इसमें भी मनपा आयुक्त ने कोताही बरती। अमृत योजना का सही ढंग से क्रियान्वयन न कर पाने वाले ठेकेदारों एवं संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों पर आयुक्त साहब मेहरबान नज़र आते हैं। ढेरों खामियां नागरिकों द्वारा गिनाई जाने के बावजूद आयुक्त ने किसी के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की।
इस बीच भाजपा और कांग्रेस के अधिकांश नगरसेवकों में मनपा आयुक्त की कार्यप्रणाली को लेकर काफी रोष पनप रहा है। दोनों प्रमुख दलों में आयुक्त के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारियां चल रही हैं। किसी भी समय नगरसेवकों का गुस्सा फूट पड़ सकता है।










