Home चंद्रपूर तंबाखू तस्करों पर ढेरों कार्रवाई : अब तड़ीपार और मकोका लगाना जरूरी

तंबाखू तस्करों पर ढेरों कार्रवाई : अब तड़ीपार और मकोका लगाना जरूरी

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■ हिम्मत बढ़ी – अब धड़ल्ले से बेच रहे MD
■ नशा कारोबारियों का राजनेताओं से कनेक्शन, ब्लैकमनी का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल

चंद्रपुर.
यकीनन चंद्रपुर जिला पुलिस प्रशासन की जांबाज कार्रवाई के चलते जिले में और खासकर चंद्रपुर शहर में अवैध तंबाकू की बेतहाशा बिक्री पर लगाम तो कसी गई है, लेकिन यहां का सिंडिकेट इतना मजबूत हो चुका हैं कि इनके खिलाफ की जा रही कानूनी कार्रवाई और दर्ज हो चुके अपराधों के बावजूद अवैध तंबाकू का जखिरा लगातार पान ठेलों तक पहुंच रहा है। इन तंबाकू माफिया के खिलाफ तड़ीपार एवं मकोका की कार्रवाई होना अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि तंबाकू माफियाओं पर हो रही कानूनी कार्रवाई के बावजूद अब उनकी हिम्मत इतनी बढ़ चुकी हैं कि वे MD भी अनेक इलाकों में सप्लाई करने लगे हैं। इसके चलते जिले के युवा गंभीर नशे के शिकार हो रहे हैं। जिला पुलिस प्रशासन भले ही समय-समय पर इन पर सख्ती दिखाते हुए कानूनी कार्रवाई कर रहा हो, लेकिन तंबाकू माफिया के स्थानीय राजनेताओं के साथ करीबी संबंध और राजनेताओं का आशीर्वाद होने के चलते उनकी काली कमाई राजनीतिक लाभ में इस्तेमाल होने लगी है। काली कमाई पर सफेल कॉलर के छुटभैया नेताओं की पकड़ मजबूत हो गई है। इस गठबंधन को तभी तोड़ा जा सकता है जब तंबाकू माफिया पर तडीपार और मकोका की कार्रवाई की जाएं।

■ दर्जनों कार्रवाई के बाद भी सरगना सक्रिय
चंद्रपुर जिले में सजग व मुस्तैद पुलिस भले ही तंबाकू माफिया के खिलाफ पूरजोर ढंग से कार्रवाई कर रही हो, लेकिन राजनीतिक आशीर्वाद के चलते इनके खिलाफ तड़ीपार और मकोका की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। दर्जनों कार्रवाई करने के बाद भी पुलिस प्रशासन के हाथ अवैध सुगंधित तंबाखू के मुख्य सरगना की गिरेबान पकड़ में नहीं आ रही है। जिन पूर्व जिलाधिकारी विनय गौडा महोदय को हाल ही में बिदाई समारोह देकर सम्मानित किया गया, उन्होंने बीते वर्ष अनेक बैठकें लेकर अवैध सुगंधित तंबाकू, MD, व अन्य नशीले पदार्थों की खुलेआम बिक्री को लेकर सख्त कदम उठाने के निर्देश देते हुए मीडिया में सुर्खियां बटोरी थी। लेकिन उनके दावे और वादे हवाहवाई ही साबित हुए। आज भी सरेआम नशे का कारोबार फल-फूल रहा है। और आज तक इस व्यापार के सरगना के गिरेबान तक कोई नहीं पहुंच पाया। क्योंकि नशे के कारोबार के पीछे राजनीति का गंदा चेहरा छिपा हुआ है।

■ SP साहब से उम्मीद: तंबाकू माफिया हों तड़ीपार
दर्जनों कार्रवाइयों के बावजूद अवैध सुगंधित तंबाकू के मुख्य कारोबारी अब तक पुलिस प्रशासन की पकड़ से बाहर हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इन अवैध व्यापारियों का गॉडफादर कौन है? जिले के पुलिस अधीक्षक से नागरिकों को यह उम्मीद है कि सुगंधित तंबाकू, गुटखा और अन्य नशीले पदार्थों के मुख्य कारोबारियों पर न केवल कानूनी शिकंजा कसा जाएं, बल्कि इन पर तड़ीपार एवं मकोका की कार्रवाई की जाएं।
हालांकि अब तक पुलिस प्रशासन द्वारा दर्जनों छापेमारी की गई, बड़ी मात्रा में नशिली सामग्री भी जब्त की गई, लेकिन इसके बावजूद तंबाकू माफिया के सरगना गिरफ्त से बाहर हैं। तंबाकू के इस अवैध कारोबार से होने वाली लाखों की कमाई के दम पर गुंडागर्दी, अपराध और हिंसक वारदातों में भी समय-समय पर बढ़ोतरी देखी गई है। ऐसे में अब एसपी साहब से ही उम्मीद की जा सकतीं हैं कि वे सरगना के गिरेबान तक पहुंचें, उनकी संपत्तियों की जांच करें, उनके नेटवर्क को उजागर करें और उन्हें तत्काल जिले से तड़ीपार करें। अन्यथा यह आशंका भी जताई जा रही है कि तंबाकू माफिया अपने हितों के लिए किसी भी हद तक जाकर हत्या जैसी वारदातों को अंजाम दिला सकते हैं।

■ वह बैठकें केवल खानापूर्ति रही
गत 18 फरवरी 2025 को प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आयोजित की गई विशाल बैठक, जिसे लेकर हमने अनेक सवाल उठाएं थे, क्या यह केवल एक खानापूर्ति नहीं थी? तंबाकू नियंत्रण को लेकर ‘चाय पर चर्चा’ तक सीमित यह बैठक आखिर जमीनी कार्रवाई में क्यों नहीं बदल पायी? सबसे बड़ा सवाल यह है कि आज तक प्रशासन तंबाकू कारोबार के मुख्य सरगना तक क्यों नहीं पहुंच पाया।
राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक जिला परिषद सभागृह में तत्कालीन जिप सीईओ विवेक जॉन्सन की अध्यक्षता में आयोजित हुई थी। इस बैठक में जिला सर्जन डॉ. महादेव चिंचोले, अतिरिक्त जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविष्कार खंडाले, शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) राजेश चिंचोले तथा जिला सलाहकार डॉ. श्वेता सावलीकर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में स्कूलों और महाविद्यालयों के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू बिक्री पर सख्त प्रतिबंध लागू करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, तंबाकू नियंत्रण कानून (COTPA अधिनियम 6B) का उल्लंघन करने वाले शैक्षणिक संस्थानों पर कार्रवाई के आदेश स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, पुलिस विभाग और खाद्य एवं औषधि प्रशासन को दिए गए।
बावजूद सवाल बरकरार है—जब गत वर्ष स्वास्थ्य विभाग ने 697 नागरिकों से 69,977 रुपये जुर्माना वसूला, पुलिस विभाग ने 617 मामलों में 1,24,000 रुपये की कार्रवाई की और खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने 6 मामलों में 330.275 किलोग्राम अवैध तंबाकू जब्त किया, तो फिर आज भी तंबाकू माफिया सक्रिय क्यों हैं?

■ अवैध तंबाकू कारोबार को किसका आशीर्वाद ?
महाराष्ट्र सरकार ने 16 जुलाई 2020 को राज्य पुलिस को गुटखा और तंबाकू के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ स्वतंत्र रूप से आपराधिक मामले दर्ज करने का अधिकार दिया था। इससे पहले पुलिस को ऐसे मामलों में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) से अनुमति लेनी पड़ती थी।
इसके अलावा, 6 फरवरी 2020 को तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख ने भी स्पष्ट किया था कि गुटखा के अवैध कारोबारियों पर मकोका (MCOCA) के तहत कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है। संबंधित विभागों को निर्देश भी दिए गए थे कि भंडारण और परिवहन में शामिल लोगों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए।
इसके बावजूद जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।

■ तंबाकू तस्करों के हौसले बुलंद
महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2012 में सुगंधित तंबाकू और अन्य हानिकारक पदार्थों पर प्रतिबंध लगाया था। बावजूद इसके, अन्य राज्यों से गुटखा और तंबाकू की तस्करी कर स्थानीय बाजारों में खुलेआम बेचा जा रहा है।
राज्य में गुटखा कारोबार करीब 3600 करोड़ रुपये का आंका जाता है। जब बिक्री पर प्रतिबंध पहले से लागू है, तो यह अवैध उत्पाद बाजार में कैसे पहुंच रहा है? खाद्य एवं औषधि प्रशासन इस पर अनजान क्यों बना हुआ है?
राज्य की सीमाओं से होकर आने वाले इन उत्पादों को चेकपोस्ट पर कथित रिश्वतखोरी के चलते आसानी से प्रवेश मिल जाता है और बाद में इन्हें ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। नतीजा यह है कि पूरे महाराष्ट्र में तंबाकू बंदी कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं।

■ अवैध कारोबारियों की संपत्ति की जांच कब ?
पुलिस और प्रशासन को केवल छापेमारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इस अवैध कारोबार से जुड़े लोगों की संपत्तियों की गहन जांच कर उनके खिलाफ कड़े आर्थिक दंड भी लगाए जाने चाहिए।
जब तक राज्य सरकार और प्रशासन इस दिशा में कठोर और निर्णायक कदम नहीं उठाते, तब तक अवैध तंबाकू और गुटखे के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाना मुश्किल ही रहेगा।

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