Home Epaper ट्रम्प की धमकियों पर आखिर क्यों चुप है भारत ?  

ट्रम्प की धमकियों पर आखिर क्यों चुप है भारत ?  

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संपादकीय :

टैरिफ को लेकर ट्रंप की धमकी पर चीन ने भी कड़ा जवाब दिया। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर अमेरिका युद्ध चाहता है, तो वे किसी भी व्यापार युद्ध या किसी भी अन्य संघर्ष के लिए तैयार हैं। यह एक देश के स्वाभिमान का उदाहरण है। ट्रंप व्यापार वार्ता की बजाय कुछ देशों का नाम लेकर उन्हें अपनी जनता के बीच खलनायक के रूप में पेश कर रहे हैं। भारत को चीन और कनाडा की तरह प्रत्यक्ष रूप से जवाब देने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उसे अपने पक्ष को स्पष्ट रूप से रखना चाहिए था।

अगर प्रधानमंत्री मोदी सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते, तो क्या भारत की कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं होनी चाहिए? ट्रंप लगातार भारत का नाम लेकर बयानबाजी कर रहे हैं, लेकिन मोदी सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसा प्रतीत होता है कि ट्रंप भारत के आंतरिक मामलों में खुलकर हस्तक्षेप कर रहे हैं, लेकिन भारत सरकार मौन है।

शेर के साथ शाम बिताने का क्या फायदा ? हाथ में इतना बड़ा दो मुहा सांप लेकर फोटो खिंचा से क्या लाभ ? एक देश भारत का नाम लेकर बदजुबानी किए जा रहा है तो भारत की क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए ? प्रधानमंत्री शेर के बच्चे को दूध पिला सकते हैं। दुनिया के इस नकली शेर को चुप क्यों नहीं करा सकते ? जवाब क्यों नहीं दे सकते ? भारत की जनता दिन रात ट्रंप के मुख से भारत के बारे में सुन रही है लेकिन मोदी सरकार का कोई मंत्री तक नहीं बोल रहा। ऐसा लगता है कि ट्रंप यहीं लाल किला के पीछे तंबू गाड़ कर रहने लगे हैं। ट्रंप ने प्रधानमंत्री के सामने बदजुबानी की और प्रधानमंत्री चुप रह गए। ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं, वे अपने देश के भले के लिए कोई भी नीति अपना सकते हैं लेकिन क्या वे किसी भी देश के बारे में कुछ भी बोल सकते हैं ? जिस तरह से वे बोल रहे हैं क्या मित्र देशों का अपमान नहीं है ? उनके इस अपमान का हर किसी ने सार्वजनिक रूप से प्रतिकार किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रो ने कह दिया कि मॉस्को या वाशिंगटन से यूरोप का भविष्य तय नहीं होगा। कनाडा के प्रधानमंत्री ने ललकार दिया। मेक्सिको ने बोला। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने, सभी ने कुछ ना कुछ बोला है लेकिन भारत ने कुछ भी नहीं कहा। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने तो यह भी कह दिया कि हम धमकाने से नहीं डरते। हम पर बुलिंग काम नहीं करता है। चीन से डील करना है तो उसके साथ धमकी देने, दबाव बनाने का रास्ता सही नहीं होगा। अगर कोई दबाव डाल रहा है तो वह गलत आदमी से भिड़ गया है। किसी भी तरह का युद्ध करना हो तो हम तैयार हैं, चाहे टैरिफ वॉर हो ट्रेड वॉर हो या कोई भी वॉर हो, चीन ने केवल बोलकर जवाब नहीं दिया बल्कि अमेरिकी सामानों के आयात पर टैरिफ भी लगा दिया।

भारत तो खुद से ही टैरिफ कम किए जा रहा है तब भी ट्रंप भारत का नाम लेकर इस तरह से बोले जा रहे हैं। अमेरिका की संसद में ट्रंप भारत का नाम लेकर ऐलान करते हैं कि 2 अप्रैल से टैरिफ लगा देंगे और भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है। एक शब्द नहीं बोला जाता है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल एक सप्ताह के लिए अमेरिका के दौरे पर हैं। जो राष्ट्रपति खुलेआम इस तरह से बोल रहे हैं क्या लगता है कि चुपचाप डील करने से वह अपनी बात से पीछे हट जाएंगे। बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने का रास्ता गलत नहीं है लेकिन मोदी सरकार को बताना चाहिए कि ट्रंप जिस तरह से भारत के बारे में बोल रहे हैं वह भारत को अपमानजनक लगता है या नहीं। वह चीन, मेक्सिको, कनाडा और फ्रांस को अपमानजनक क्यों लग रहा है ? किसी ने नहीं कहा कि चीन की भाषा में ही जवाब दीजिए लेकिन ट्रंप की भाषा का जवाब क्या भारत किसी भी भाषा में नहीं दे सकता ?

अमेरिका तो विश्व गुरु है नहीं, विश्व गुरु तो भारत है और क्या यही विश्व गुरु का सम्मान है ? इस पर तो आरएसएस को डंडा लेकर अमेरिका पहुंच जाना चाहिए था। यहां औरंगजेब पर बहस करने से क्या फायदा ? आपके सामने एक राष्ट्रपति इस तरह की बातें कहे जा रहा है और आपसे एक जवाब तक नहीं दिया जाता। सारे लोग लगे हैं औरंगजेब को जवाब देने में जो इस दुनिया से 300 साल पहले जा चुका है। योगी जी औरंगजेब को अच्छा कहने वालों का इलाज यूपी में करना चाहते हैं और भारत को लेकर इस तरह से बात करने वाले ट्रंप के बारे में चुप रह जाते हैं।

ट्रंप जिस भाषा को अंतरराष्ट्रीय संबंधों की भाषा बना रहे हैं उसमें चुप्पी और शालीनता की जगह नहीं लगती। उसे सुनना और सहना भी कम अपमानजनक नहीं। तू तड़ाक की भाषा में आप किसी देश के प्रमुख से या किसी देश के बारे में बात नहीं कर सकते। यूरोप और कनाडा से ट्रंप के बयानों का विरोध भी हो रहा है। भारत चुप है। कनाडा ने यह भी कहा कि ट्रंप टैरिफ लगाकर बेवकूफी कर रहे हैं। ट्रूडो ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि हम दोस्ती ही चाहते हैं लेकिन आपकी सरकार ने मजबूर कर दिया है। कनाडा और चीन ने तो विश्व व्यापार संगठन डब्ल्यूटीओ में ट्रंप की नीतियों के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई है। भारत की भाषा अलग होनी चाहिए लेकिन सुनाई तो देनी चाहिए कि आप ट्रंप के जवाब में क्या कर रहे हैं। आपका जवाब क्या है ? क्या भारत ट्रंप से बेहतर डील कर पाएगा या जिस तरह से ट्रंप अपनी शर्तें थोप रहे हैं उन्हें ही मानना पड़ेगा और भारत को चुप रह जाना पड़ेगा।

अमेरिका चाहता है कि भारत ऑटोमोबिल सेक्टर पर आयात शुल्क जीरो कर दे वरना जितना टैरिफ भारत लगाता है, अमेरिका भी उतना लगा देगा। भारत ने हेवी मोटरसाइकिल पर पहले ही टैरिफ घटा दिया। ट्रंप के आते ही बजट में 20 प्रतिशत टैक्स घटाया। मस्क ने टेस्ला के लिए मुंबई में शोरूम खोलना शुरू कर दिया है। क्या मस्क को पता है कि उसकी सारी शर्तें मान ली जाने वाली हैं। वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल के अमेरिका जाने से पहले मस्क मुंबई में शोरूम खोलने की तैयारी कर रहे हैं। ट्रंप के दबाव में भारत ऑटोमोबिल सेक्टर पर टैरिफ कितना घटाता है, क्या भारत ऑटो सेक्टर पर टैरिफ जीरो करेगा ? वाणिज्य मंत्री एक सप्ताह के लिए अमेरिका में है। देखते हैं कि वे भारत के हित में कैसी डील लेकर आते हैं। डायमंड और जवाहरात सेक्टर से टैरिफ कितना घटाया जाता है और अपने यहां के लाखों लोगों के रोजगार को खतरे में डाला जाता है या नहीं। भारत अमेरिका से होने वाला डायमंड आयात पहले से ही कम है, इसलिए अगर भारत आयात शुल्क कम करता है तो खास फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन अगर भारत के लिए शुल्क बढ़ गया तो काफी असर पड़ जाएगा।

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है। ट्रंप इसे अमेरिका के पक्ष में लाना चाहते हैं। ट्रंप ने कहा कि उनकी टैरिफ नीति से अमेरिका में केवल नौकरियां पैदा की जाएंगी ऐसा नहीं है बल्कि यह टैरिफ नीति अमेरिका की आत्मा की रक्षा के लिए भी है तो क्या भारत में नौकरियों के जाने की चिंता किसी को नहीं ?

भारत के प्रधानमंत्री देश में नौकरियों पर क्या असर पड़ेगा इसे लेकर क्यों नहीं बोल रहे हैं ? अगर ट्रंप ने टैरिफ थोपा तो जो काम कर रहे हैं उन पर भी संकट आएगा। कम से कम इनकी चिंताओं को दूर करने के लिए मोदी सरकार को बोलना चाहिए कि वे क्या करने जा रहे हैं। पहले से संकट में जो इंडस्ट्री है उसे टैरिफ कम करके कैसे बचाएंगे ताकि जो काम कर रहे हैं उनकी नौकरियां खतरे में ना पड़े।

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