■ एक कांग्रेस नेता की छत्रछाया में तंबाकू माफिया प्रशासन पर कैसे हो रहा हावी?
चंद्रपुर।
बीते कुछ वर्षों में चंद्रपुर जिले में सुगंधित तंबाकू की अवैध बिक्री में बाढ़-सी आ गई है। यहां तंबाकू माफिया ने अपनी जड़ें मजबूत बना ली हैं। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के एक नेता की छत्रछाया में यह अवैध धंधा जमकर फल-फूल रहा है। तंबाकू माफिया द्वारा एक ही प्रकार के इन गंभीर अपराधों में अनेक बार नामजद होने के बावजूद इनके खिलाफ मकोका एवं तड़ीपार जैसी कार्रवाई नहीं की जा रही है। क्योंकि वह कांग्रेस नेता अपने रसूख के बल पर तंबाकू माफिया को संरक्षण प्रदान कर रहा है। संबंधित प्रशासन भी इनके सामने लाचार नजर आने लगा है। उदाहरण के तौर पर हाल में ही पंजीबद्ध हुए अपराध में आरोपी वसिम झिमरी एवं जयसूख ठक्कर का नाम सामने आया है। इन आरोपियों पर इसके पूर्व भी अनेक अपराध दर्ज हो चुके हैं। लेकिन इनके कनेक्शन राजनेताओं तक होने की बात किसी से छिपी नहीं है। चर्चा है कि फरार आरोपी वसिम झिमरी अपने घर-परिसर में खुलेआम घूम रहा है, लेकिन इसके गिरेबान तक कानून के हाथ पहुंच नहीं पा रहे हैं। यही वजह है कि प्रशासन की कार्रवाई को संदेह की नजर से देखा जा रहा है।
■ चंद्रपुर में कैंसर परोसने वालों का काला पैसा राजनीति में
महाराष्ट्र में सुगंधित तंबाकू, गुटखा और पान मसाला पर प्रभावी प्रतिबंध 20 जुलाई 2012 से लागू किया गया। राज्य मंत्रिमंडल ने 11 जुलाई 2012 को प्रतिबंध का निर्णय लिया था और इसके बाद खाद्य सुरक्षा कानून के तहत अधिसूचना जारी कर 20 जुलाई 2012 से इसे लागू किया गया था।
वर्तमान अधिसूचना के अनुसार 20 जुलाई 2025 से राज्य में इन उत्पादों पर एक वर्ष का प्रतिबंध लागू किया गया था, जिसे सरकार समय-समय पर नवीनीकृत करती रही है।
महाराष्ट्र में सुगंधित तंबाकू, गुटखा, पान मसाला, खैनी, खर्रा, मावा तथा सुपारी-आधारित मिश्रित उत्पादों के संबंध में राज्य सरकार की नीति पिछले एक दशक से पूर्ण प्रतिबंध (Ban) और कठोर प्रवर्तन की रही है। यह नीति मुख्यतः सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा और मुख कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को रोकने के उद्देश्य से लागू की जाती है। लेकिन चंद्रपुर जिले में कैंसर परोसने वाले अवैध व्यापारियों का काला पैसा चंद राजनेताओं की राजनीति में खर्च किया जा रहा है। यह बेहद चिंता की बात है।
■ कानून है, लेकिन नेताओं ने साध ली चुप्पी
प्रतिबंध का आधार मुख्यतः Food Safety and Standards Authority of India के नियम, Food Safety and Standards Act, 2006 तथा खाद्य सुरक्षा एवं मानक (प्रतिषेध एवं विक्रय प्रतिबंध) विनियम, 2011 के तहत है। इन नियमों के अनुसार किसी भी खाद्य पदार्थ में तंबाकू या निकोटीन मिलाना प्रतिबंधित है। इसी आधार पर महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा आयुक्त को प्रतिबंध लगाने की शक्ति प्राप्त है। ऐसे कठोर कानूनों को लागू करवाने के लिए चंद्रपुर के नेताओं की ओर से न तो कभी कोई ठोस पहल की जाती है और न ही कोई सख्त कदम उठाये जाते हैं।
■ कार्रवाई की जिम्मेदारी सिर्फ पुलिस की नहीं होती
महाराष्ट्र FDA (Food and Drug Administration) की जिम्मेदारी है कि वह निरीक्षण, जब्ती और अभियोजन की कार्रवाई करे। प्रतिबंधित माल नष्ट करने की प्रक्रिया संचालित करे। जिला प्रशासन के जिलाधिकारी, उपविभागीय अधिकारी, तहसील प्रशासन, स्थानीय निकाय, महानगरपालिका, नगर परिषद, ग्राम पंचायत स्तर के प्रवर्तन तंत्र के अलावा पुलिस विभाग को यह अधिकार दिए गए हैं कि वे छापेमारी और आपराधिक जांच में सहयोग करें। न्यायालयों ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत अभियोजन का मूल अधिकार नामित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के पास होता है। बावजूद इसके, समूचा प्रशासन एकजुट होकर काम करता हुआ नजर नहीं आता है। केवल पुलिस पर जिम्मेदारी थोपकर बाकी विभाग गहरी नींद में सोते हुए नजर आते हैं।
■ CM फडणवीस के आदेश के बावजूद मकोका नहीं
प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गत दिनों विधानसभा में स्वीकार किया कि अवैध गुटखा नेटवर्क अभी भी सक्रिय हैं और इनके विरुद्ध अधिक कठोर कानून लाने की तैयारी चल रही है। सरकार ने संगठित गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई के लिए MCOCA जैसी सख्त कानूनी व्यवस्था पर विचार करने की बात कही है। राज्यभर में हजारों प्रकरण दर्ज होने की जानकारी भी दी गई। लेकिन चंद्रपुर जिले में अवैध तंबाकू बेचने वाले बड़े व्यापारियों एवं माफिया पर अनेक अपराध दर्ज होने के बावजूद मकोका नहीं लगाया जा रहा है।
■ LCB का कार्य उल्लेखनीय, SP एक्शन मोड में
जिले में अवैध सुगंधित तंबाकू, गुटखा और पान मसाला कारोबार के खिलाफ जिला पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी एवं LCB के प्रमुख अमोल काचोरे के निर्देश पर चलाए गए दो बड़े अभियानों में परसों कुल 5 लाख 11 हजार 539 रुपये का प्रतिबंधित माल जब्त किया गया। रामनगर और सिंदेवाही में की गई कार्रवाई में 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कुख्यात तंबाकू कारोबारी वसिम झिमरी और जयसूख ठक्कर फरार बताए जा रहे हैं।
रामनगर में स्थानीय अपराध शाखा (LCB) और उपविभागीय पुलिस दल ने छापा मारकर 1.35 लाख रुपये से अधिक मूल्य का सुगंधित तंबाकू जब्त किया तथा दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। वहीं सिंदेवाही में पुलिस ने 3.76 लाख रुपये के प्रतिबंधित गुटखा, पान मसाला और सुगंधित तंबाकू का जखीरा पकड़ते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया। लगातार अपराध दर्ज होने के बावजूद तंबाकू कारोबारियों का नेटवर्क सक्रिय रहने से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर संगठित रूप से युवाओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले इन माफियाओं पर केवल सामान्य धाराओं में कार्रवाई क्यों की जाती है। कई आरोपियों पर पूर्व में भी अपराध दर्ज होने की चर्चा के बीच अब नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा ऐसे संगठित तंबाकू सिंडिकेट पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत कठोर कार्रवाई की मांग जोर पकड़ने लगी है।
■ केवल अपराध दर्ज करने से कुछ नहीं होगा
पुलिस की लगातार कार्रवाई से संकेत मिल रहे हैं कि जिले में अवैध तंबाकू कारोबार एक संगठित नेटवर्क के रूप में संचालित हो रहा है, जिस पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए केवल जब्ती और गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि कड़े कानूनी प्रहार की भी आवश्यकता है। बार=बार ऐसे अपराधों में शामिल आरोपियों पर मकोका लगाने एवं उन्हें तडीपार करने की जरूरत है।










