■ प्रदूषण और भ्रष्टाचार पर कैसे लगाएंगे लगाम ?
■ मुंबई की कार्यशैली क्या चंद्रपुर में लाएगी सुधार ?
■ करोड़ों का नुकसान पहुंचाने वाले ठेका सिंडिकेट को क्या तोड़ पाएंगे CE ?
चंद्रपुर।
मुंबई से तबादला होकर अति उष्णता और अति प्रदूषित समझे जाने वाले चंद्रपुर शहर में मुख्य अभियंता (CE) अनिल कातोये ने CSTPS का पदभार संभाल लिया। लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि यहां की आबोहवा, यहां की कार्यशैली में ही भ्रष्टाचार की बू महसूस की जा सकती है। क्योंकि पुराने अनुभव और शिकायतों पर यदि गौर किया जाएं तो करोड़ों के ठेके खास एवं करीबियों को आवंटित करने की नीति समय-समय पर उजागर होती रही है। ऐसे में एशिया के सबसे बड़े पॉवर प्लांट में हो रहे भ्रष्टाचार पर लगाम कसना CE अनिल कातोये के लिए सबसे बड़ी और पहली चुनौती है। दूसरी अहम चुनौती के आगे तो CE अनिल कातोये भी लाचार नजर आने की पूर्ण आशंका है। क्योंकि संसद से लेकर विधानसभा के सदनों में CSTPS के चलते होने वाले प्रदूषण को लेकर जनप्रतिनिधियों ने कोहराम मचा दिया है। NGT हो या MPCB या स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों की सामाजिक संस्थाएं सभी ने CSTPS के प्रदूषण को लेकर घोर आपत्तियां जताई है। ऐसे में चहुंओर की समस्याओं से घिरा CSTPS और अब उसके मुखिया बने CE अनिल कातोये इन सभी से कैसे निपट पाएंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।
■ अनियमितताओं का लंबा इतिहास
वैसे तो CSTPS में हो चुकी और हो रही अनियमितताओं का इतिहास काफी लंबा है। ढेरों शिकायतें प्रशासन के पास पहुंचती है। परंतु रसूखदार ठेकेदार, जिम्मेदार अफसरों की पैठ मंत्रालय तक होने के चलते तमाम तरह की शिकायतें फाइलों में ही दम तोड़ देती है। चाहे करोड़ों के ठेकों में हो रहा भ्रष्टाचार हो या पसंदीदा ठेकेदार को ठेके देने के लिए नियमों में किए गए तुगलकी बदलाव हो। हर कदम पर अनियमितताओं का जाल अब जंजाल बनकर ठेकेदारों एवं भ्रष्ट अफसरों को फायदा पहुंचाने के लिए एक सिंडिकेट के रूप ले चुका है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या वाकई में इस सिंडिकेट को नये CE अनिल कातोये तोड़ पाएंगे ? या इसी सिंडिकेट के आगे झुककर CSTPS के माध्यम से करोड़ों की हो रही लूट पर मूकदर्शक बन बैठेंगे ?
■ सबूतों के साथ ‘चंद्रपुर की बुलंद आवाज’ ने उजागर किए थे अनेक ठेकों की खामियां
CSTPS के ठेकों को मजाक बनाने वाले यहां के प्रशासन एवं रसूखदार ठेकेदारों की करतूतों को बीते कुछ माह में सर्वप्रथम सबूतों के साथ ‘चंद्रपुर की बुलंद आवाज’ ने उजागर किया था। खास ठेकेदारों पर मेहरबान होकर ठेकों के नियमों को कैसे प्रभावित किया गया, यह भी दर्शाया गया था। खास ठेकेदार को ही ठेका मिल सकें। ऐसे अनगिनत शर्ते और अनियमितताओं को गिनाया जा सकता है।
■ कैसे काम करता है यहां का ठेका सिंडिकेट ?
भ्रष्ट ढंग से कमाने की चाह में करोड़ों के ठेके मनमाने ढंग से अपने पसंदीदा ठेकेदार को रिंग प्रणाली के माध्यम से खैरात की तरह बांटे जा सकें, इसके लिए समूचा तंत्र ही उनका सहयोगी बन बैठा है। ऊर्जा मंत्रालय एवं CSTPS इस सिंडिकेट को लाभ पहुंचाने के लिए जो ई-टेंडर जारी करते हैं, उसके नियमों को ऐसा बना जाता है कि एक खास ठेकेदार को ही ठेका मिल सकें। इससे स्पर्धा व बोलियां खत्म होकर सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचता है।










