■ लक्ष्मी कन्स्ट्रक्शन पर MJP के बाद मनपा मेहरबान
■ डॉलफिन में MJP बैठकों की मिलीभगत की क्या हो पाएगी जांच ?
चंद्रपुर.
कल, 13 मार्च 2026 की सुबह चंद्रपुर महानगर पालिका के आयुक्त अकुनूरी नरेश ने अमृत पेयजल योजना में हो रही अनियमितताओं की जांच व निरीक्षण के लिए दमदार दौरा किया। इस दौरान पाई गई गड़बड़ियों पर संबंधित ठेका कंपनी लक्ष्मी कन्स्ट्रक्शन तथा देखरेख की जिम्मेदारी निभाने वाले जल प्राधिकरण के अधिकारियों के खिलाफ कोई सख्त, ठोस कार्रवाई नहीं की। यह सबसे बड़ी आश्चर्य की बात है। ऐसे में उनके दौरे का नतीजा क्या ? यह सवाल उठने लगा है। वहीं दूसरी ओर करोड़ों की अमृत योजनाओं की विफलताओं की कहानियां बढ़ने लगी है। इन पापों को छिपाने के लिए MJP के अधिकारी एवं संबंधित ठेका कंपनी के लोग ‘डॉलफिन’ में बैठकर ठंडी चाय की चुस्कियां लेते हुए मिलीभगत का जल बहा रहे हैं, इसकी चर्चा पूरे शहर में है। इस कथित मिलीभगत और अमृत में हो रहे घोटालों की कभी गहनता से जांच और आयुक्त द्वारा कठोर कार्रवाई की जाएगी क्या ? यह सवाल लगातार उपस्थित किया जा रहा है।
■ अमृत-2 योजना में बड़ा घोटाला उजागर!
चंद्रपुर शहर में करोड़ों रुपये की ‘अमृत योजना–2’ के तहत चल रहे जलापूर्ति प्रकल्प में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। युवासेना जिला प्रमुख विक्रांत सहारे की शिकायत के बाद मनपा आयुक्त अकुनुरी नरेश ने शुक्रवार 13 तारीख की सुबह इंदिरानगर और बंगाली कैंप प्रभाग में मौके पर जाकर काम की जांच की। निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि वर्क ऑर्डर के नियमों का पालन किए बिना पाइपलाइन को निर्धारित 3 फुट गहराई की बजाय मात्र 1 से डेढ़ फुट गहराई में ही डाला जा रहा है।
■ अनियमितता बर्दाश्त नहीं तो कार्रवाई शून्य क्यों ?
मनपा आयुक्त ने मौके पर मौजूद अधिकारियों और ठेकेदार कंपनी को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट कहा कि काम में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अमृत योजना के सभी कार्य नियमों के अनुसार ही पूरे किए जाएं। साथ ही नागरिकों को समय पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए। लेकिन हैरत की बात है कि इस अनियमितता को बर्दाश्त न कर पाने वाले आयुक्त ने संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहे हैं ?
■ युवासेना की शिकायत से खुला मामला
युवासेना जिला प्रमुख विक्रांत सहारे ने अपनी शिकायत में बताया कि चंद्रपुर महानगरपालिका क्षेत्र में लगभग 217 करोड़ रुपये की लागत से अमृत योजना–2 के तहत शहर को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का काम शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी लगभग 418 करोड़ रुपये की जलापूर्ति योजना चलाई गई थी, लेकिन उस योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और अनियमितताएँ सामने आई थीं। इसकी जानकारी चंद्रपुर की जनता को भी है, फिर भी उस योजना का वास्तविक लाभ आज तक नागरिकों को नहीं मिल पाया।
■ घटिया स्तर का काम, मनपा का मौन
अब अमृत योजना–2 के नाम पर नया प्रकल्प शुरू किया गया है, लेकिन शुरुआत से ही काम की गुणवत्ता संदिग्ध दिखाई दे रही है। सहारे का आरोप है कि जिस ठेकेदार कंपनी को यह काम दिया गया है, उसने शासन के नियमों और वर्क ऑर्डर की शर्तों को नजरअंदाज करते हुए अपने आर्थिक स्वार्थ के लिए घटिया स्तर का काम किया है। इसके बावजूद मनपा प्रशासन चुप्पी साधे बैठी है।
■ वर्क ऑर्डर के नियमों का खुला उल्लंघन
युवासेना की शिकायत के अनुसार काम में कई गंभीर गड़बड़ियाँ सामने आई हैं।
■ पाइपलाइन की गहराई में हेराफेरी
वर्क ऑर्डर के अनुसार जमीन में 3 फुट गहरा गड्ढा खोदकर पाइप डालना अनिवार्य था, लेकिन ठेकेदार ने केवल 1 से डेढ़ फुट गहराई में ही पाइपलाइन डाल दी, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।
■ पाइप जोड़ने की गलत पद्धति
नियमों के अनुसार पाइप का पूरा रोल बिना कटिंग के एक ही टुकड़े में जमीन के भीतर डालना जरूरी था, ताकि भविष्य में लीकेज की समस्या न हो। लेकिन ठेकेदार ने पाइप को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर साधारण तरीके से जोड़ दिया। तकनीकी प्रक्रिया का पालन न होने से भविष्य में शहर के कई हिस्सों में पाइपलाइन लीकेज की गंभीर समस्या उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है।
■ काम की गति बेहद धीमी
इस प्रकल्प को पूरा करने के लिए निर्धारित समयसीमा फरवरी माह तक तय की गई थी, लेकिन अब तक 50 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं हो पाया है।
■ पानी की टंकियाँ अधूरी, पाइपलाइन भी आधी
अमृत योजना-2 के अंतर्गत निर्माणाधीन 8 पानी की टंकियों में से एक भी टंकी का काम पूरा नहीं हुआ है। इसी तरह लगभग 130 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जानी थी, लेकिन अब तक केवल 60 से 70 किलोमीटर पाइपलाइन ही डाली गई है, वह भी नियमों की अनदेखी करते हुए।
■ सड़कों को खोदकर छोड़ा, दुर्घटनाएँ बढ़ीं
ठेकेदार कंपनी ने पाइपलाइन डालने के लिए शहर के कई पक्के रास्तों को खोदकर अधूरा छोड़ दिया है। इसके कारण सड़कों के किनारे बनी नालियां भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं और कई लोगों के घरों तक आने-जाने का रास्ता बंद हो गया है। खुले गड्ढों के कारण कई स्थानों पर छोटी-मोटी दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं और लगातार हो रही हैं। जब नागरिक इस विषय में ठेकेदार के कर्मचारियों से सवाल करते हैं तो वे अहंकारपूर्ण लहजे में जवाब देते हैं कि “काम पूरा होने के बाद ही गड्ढे भरे जाएंगे, तब तक नागरिकों को असुविधा सहन करनी पड़ेगी।”
■ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
युवासेना ने यह भी आरोप लगाया है कि इस पूरे प्रकरण में संबंधित विभाग के कुछ अभियंताओं और कर्मचारियों को ठेकेदार द्वारा आर्थिक प्रलोभन देकर उनकी मौन सहमति प्राप्त की गई है। सवाल उठ रहा है कि महानगरपालिका द्वारा समय-समय पर इस कार्य की जांच क्यों नहीं की गई? शहर में जगह-जगह खोदे गए गड्ढों से हो रही दुर्घटनाओं के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है?
■ ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
युवासेना जिला प्रमुख विक्रांत सहारे ने मांग की है कि अमृत योजना-2 के कार्य में अनियमितता करने वाले जलप्राधिकरण के अधिकारियों को निलंबित किया जाए और संबंधित ठेकेदार कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में जल्द कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो चंद्रपुर की जनता को साथ लेकर शिवसेना युवासेना शैली में शासन, प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ तीव्र आंदोलन किया जाएगा।
इस पूरे मामले में अब चंद्रपुर शहर की जनता प्रशासन से जवाब मांग रही है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आखिर कब उन्हें भरोसेमंद और नियमित पेयजल व्यवस्था मिल पाएगी?










