■ आयुक्त दौरों पर, पालकमंत्री और महापौर-उपमहापौर नदारद
■ आधा मार्च बीता लेकिन टेंडर करने की फुर्सत किसे ?
चंद्रपुर.
मनपा की सत्ताधारी भाजपा वर्ष 9 वर्ष पूर्व चंद्रपुर की जनता को 24 घंटे शुद्ध पेयजल दिलाने का ख्वाब दिखाया करती थी। एक साल में अमृत पेयजल योजना के प्रोजेक्ट को पूरा करने का दावा किया जाता था। परंतु वादों और दावों के बीच करोड़ों की सरकारी धनराशि पानी की तरह बहा देने के बावजूद चंद्रपुरवासियों को नियमित पेयजल नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में हर साल टैंकरों से की जाने वाली जलापूर्ति इस वर्ष आधा मार्च माह बीत गया, लेकिन टेंडर प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकी। जलसंकट प्रारूप के नियोजन की फाइल न जाने कहां अटका दी गई। मनपा प्रशासन एवं सत्ताधारियों की यह घोर लापरवाही केवल और केवल नाकामियों का इतिहास गढ़ रही है। अमृत देने में नाकाम हुआ शासन व प्रशासन अब टैंकर देने में भी नाकाम ही साबित होने लगा है। हैरत की बात यह है कि इस गंभीर पेयजल संकट के दिनों में मनपा आयुक्त अकुनूरी नरेश शहर के प्रभाग-प्रभाग का दौरा करने में व्यस्त नजर आते हैं। वहीं जिले के पालकमंत्री डॉ. अशोक उइके इस मुद्दे को गंभीरता से लेने के लिए दूर-दूर तक उनके दर्शन दुर्लभ हो चुके हैं। और तो और नवनियुक्त महापौर संगीता खांडेकर तथा उपमहापौर प्रशांत दानव आयुक्त के साथ दौरा करते दिखाई नहीं पड़ रहे हैं। जलसंकट को हल करने के मुद्दे पर वे भी नदारद ही दिख रहे हैं।
■ महापौर और आयुक्त क्यों नहीं ले रहे दखल ?
उल्लेखनीय है कि ‘चंद्रपुर की बुलंद आवाज’ डिजिटल मीडिया ने शहर के गंभीर जलसंकट की समस्या को भांपते हुए गत 27 फरवरी 2026 को ही आगाह करते हुए मनपा प्रशासन एवं सत्ताधारियों को चेताया था। ‘कहते थे अमृत देंगे, यहां तो जल भी नसीब नहीं !’ शीर्षक तले एक विस्तृत समाचार प्रकाशित-प्रसारित कर प्रशासन एवं भाजपा के सत्ताधारियों को कटघरे में खड़ा किया था। इसके बावजूद इनके कानों पर जूं तक नहीं रेंग पाई।
चंद रोज पहले ही नवनियुक्त महापौर संगीता खांडेकर को आगाह करते हुए यह समाचार प्रसारित किया गया था कि मनपा की अमृत जलापूर्ति योजना एक मुख्य चुनौती के रूप में उभर आएगी। चंद्रपुर शहर के अनेक नल केवल हवा उगलने की बात को उजागर किया गया था। अपेक्षा थी कि महापौर खांडेकर तत्काल इसकी गंभीर दखल लेंगी और जलसंकट पर मात करने कोई ठोस कदम उठाएंगी। लेकिन न तो आयुक्त ने और न ही महापौर ने ऐसा कुछ किया।
■ मनपा में वॉटर कूलर, जनता के घड़े खाली !
मनपा की करोड़ों की इमारत में बैठकर वॉटर कूलर के ठंडे पानी का आस्वाद लेने वाले और चंद्रपुर शहर के विकास के सपने संजोने वाले प्रशासन तथा यहां के सत्ताधारियों को प्यासी जनता पर दया क्यों नहीं आ रही है ? यह सोचने वाली बात है। अधिकांश बस्तियों के निवासी कड़ी धूप में बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। उनके खाली पड़े सूखे घड़े बता रहे हैं कि वे बीते 9 वर्षों से लंबित अमृत योजना के साकार होने को लेकर कितने तरस रहे हैं।
■ कैसे विफलता की कहानी बनी अमृत योजना ?
27 मई 2016 को नागपुर में तत्कालीन ऊर्जा मंत्री के समक्ष सर्वप्रथम अमृत योजना का प्रारूप रखा गया था। तत्कालीन विधायक नाना श्यामकुले ने तत्कालीन जलसंपदा मंत्री गिरिश महाजन के चंद्रपुर आगमन पर 25 मई 2016 को इसकी प्राथमिक मंजूरी प्राप्त की। भविष्य में वर्ष 2048 की चंद्रपुर की जनसंख्या का अनुमान लगाते हुए ‘अमृत योजना’ तैयार की गई। करीब 5 लाख 33 हजार 777 जनसंख्या के हिसाब से प्रति वर्ष 32 क्यूबिक मीटर पानी आरक्षित करने की योजना बनी। 28 अगस्त 2017 को अमृत योजना का भूमिपूजन किया गया। चंद्रपुर शहर की आगामी 50 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार के अमृत अभियान (Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation – AMRUT) के अंतर्गत 231 करोड़ रुपये की स्वचालित जलापूर्ति योजना का भूमिपूजन तत्कालीन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने किया था। प्रियदर्शिनी सभागृह में बताया गया था कि इस योजना में 16 नई पानी की टंकियां बनाई जाएंगी। 527 किलोमीटर लंबी आंतरिक पाइपलाइन बिछेगी। नई पंपिंग मशीनें एक ही स्क्रीन पर संचालित होने वाली स्वचालित जलापूर्ति प्रणाली होगी। यह भी दावा किया गया था कि अगले एक वर्ष में इस कार्य को पूर्ण कर लिया जाएगा। एक दावा तो यह भी किया गया था कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती 25 दिसंबर 2018 को इस योजना का शुभारंभ होगा। लेकिन जमीनी सच्चाई तो यह है कि वर्ष 2026 के मार्च माह तक अधिकांश बस्तियों में अमृत का पेयजल नहीं पहुंच पाया है।
■ मनपा प्रशासन की सुस्त कार्यशैली
चंद्रपुर मनपा ने अब तक जलसंकट के निपटने के लिए टैंकर से संबंधित टेंडर की प्रक्रिया को पूर्ण नहीं किया। प्रशासन की इस देरी के कारण भीषण संकट दस्तक दे रहा है। हर वर्ष 1 मार्च से ही जलसंकटग्रस्त क्षेत्रों में टैंकर चलने लगते थे, लेकिन इस वर्ष प्रशासनिक सुस्ती के कारण आधा मार्च बीत जाने के बावजूद पानी की व्यवस्था नहीं की गई है। भीषण गर्मी के चलते कुएं और बोरवेल भी सूखने लगे हैं। वडगांव, रमाबाई नगर, रयतवारी कॉलोनी, महाकाली कॉलोनी, बाबूपेठ, राजीव गांधी नगर, शामनगर, हवेली गार्डन, जुनोना चौक, अंचलेश्वर वार्ड, माना टेकड़ी, जलनगर, भिवापुर, सावरकर नगर, फुकटनगर, लालपेठ, हनुमान नगर, निर्माण नगर और बंगाली कैंप जैसे क्षेत्रों में जल संकट मंडरा रहा है। पिछले वर्ष मनपा ने जलसंकटग्रस्त क्षेत्रों में 58 सिंटेक्स टंकियां लगाई थीं। प्रतिदिन 107 टैंकरों के माध्यम से प्यासे बस्तियों में जलापूर्ति कराई जा रही थी। लेकिन इस वर्ष टेंडर प्रक्रिया लंबित होने के कारण आयुक्त एवं मनपा प्रशासन पर अनेक सवाल उठने लगे हैं।










