🟥 गटर का गंदा पानी ट्रीटमेंट के बिना ही छोड़ रहे इरई नदी में
🔥 पर्यावरण प्रेमी, जनप्रतिनिधि, अफसरों ने साध ली चुप्पी
चंद्रपुर.
💥 जिम्मेदारों की खामोशी चुभने लगी
➤ चंद्रपुर में पर्यावरणीय संकट अब केवल चेतावनी नहीं,
➤ बल्कि एक भयावह हकीकत बन चुका है।
➤ रहमत नगर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और चंद्रपुर सुपर थर्मल स्टेशन (CSTPS) की लापरवाही ने इरई नदी को प्रदूषण के दलदल में धकेल दिया है।
➤ सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर मुद्दे पर महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) गहरी नींद में है।
➤ पर्यावरण प्रेमियों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक आला अफसरों की चुप्पी अब चुभने लगी हैं।
➤ इस बीच AIMIM के नवनिर्वाचित नगरसेवक अजहर शेख एवं समाजसेविका एड. प्रीतिषा साधना ने इस गंभीर मसले पर शिकायतों का पिटारा खोल दिया है।
🔴 शिकायत के बावजूद कार्रवाई शून्य : आखिर किसका संरक्षण ?
➤ 28 अक्तूबर 2025 को MPCB और 16 मार्च 2026 को मनपा को औपचारिक शिकायत दी गई।
➤ शिकायतकर्ता – AIMIM के नवनिर्वाचित नगरसेवक अजहर शेख ने सबूतों के साथ कच्चा चिठ्ठा खोल दिया।
➤ गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई का अभाव।
❗ सवाल यह है कि क्या नियम केवल कागजों तक सीमित हैं? या फिर जिम्मेदारों को किसी का संरक्षण प्राप्त है?
⚠ बिना ट्रीटमेंट गटर का पानी सीधे इरई नदी में
➤ शहर के नालों का गंदा पानी इकट्ठा कर ट्रीटमेंट का दावा, लेकिन हकीकत उलट।
➤ आउटलेट से बिना शोधन का सीवेज सीधे इरई नदी में छोड़ा जा रहा।
➤ नदी के पेयजल की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है।
🔥 यह स्थिति न केवल पर्यावरणीय अपराध है, बल्कि सीधे-सीधे जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
🧭 इरई नदी : जीवनरेखा से जहर की धारा तक
➤ इरई नदी चंद्रपुर की जीवनरेखा मानी जाती है।
➤ पीने के पानी और कृषि दोनों के लिए उपयोगी।
➤ अब यही नदी सीवेज और औद्योगिक कचरे से प्रदूषित हो रही है।
📢 यदि यही स्थिति रही, तो आने वाले समय में शहर जलसंकट और स्वास्थ्य आपदा दोनों का सामना करेगा।
🔥 खुले में सड़ता सीवेज, जहरीली हवा का जाल
➤ STP प्लांट ढका नहीं है, जिससे दुर्गंधयुक्त जहरीली गैसें फैल रही हैं।
➤ रहमत नगर के निवासी मजबूरन इस हवा में सांस ले रहे हैं।
➤ त्वचा रोग, आंखों में जलन और फेफड़ों की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।
⚡ यह “साइलेंट किलर” प्रशासन की आंखों के सामने लोगों की जिंदगी छीन रहा है।
🟥 ब्लू लाइन क्षेत्र में निर्माण : नियमों की खुली धज्जियां
➤ नदी के किनारे ब्लू लाइन क्षेत्र में STP का निर्माण।
➤ पर्यावरणीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन।
➤ क्या इस निर्माण को अनुमति देने वालों पर कोई जवाबदेही तय होगी ?
✊ नियमों का उल्लंघन जब सत्ता के संरक्षण में होता है, तो कानून बौना नजर आता है।
📌 मिट्टी भी हो रही बर्बाद : प्लास्टिक कचरे का जहर
➤ सीवेज के साथ प्लास्टिक कचरा खुले में फेंका जा रहा।
➤ मिट्टी की उर्वरता लगातार नष्ट हो रही है।
➤ आसपास की जमीन बंजर बनने की कगार पर।
🎯 यह केवल जल नहीं, बल्कि भूमि प्रदूषण का भी गंभीर मामला है।
❗ गरीबों पर दोहरी मार : बीमारी और बेबसी
➤ रहमत नगर के अधिकांश निवासी आर्थिक रूप से कमजोर।
➤ महंगे इलाज की सुविधा नहीं, बीमारी के साथ जीने को मजबूर।
➤ जहरीली हवा और पानी के बीच “भगवान भरोसे” जिंदगी।
💥 यह केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि मानवीय संकट भी है।
⭐ वैज्ञानिक जांच की मांग : NEERI को भेजे जाएं नमूने
➤ STP के पानी के नमूने NEERI को भेजने की मांग।
➤ इरई नदी में छोड़े जा रहे प्रदूषण का वैज्ञानिक आकलन जरूरी।
➤ औद्योगिक प्रदूषण के स्तर का रिकॉर्ड तैयार किया जाए।
📢 बिना वैज्ञानिक जांच के सच्चाई सामने आना मुश्किल है।
✍ कानूनी कार्रवाई की मांग : कब जागेगा सिस्टम ?
➤ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जल प्रदूषण अधिनियम और वायु प्रदूषण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग।
➤ CSTPS और STP के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने की जरूरत।
➤ जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
🔴 अंतिम बात : चुप्पी ही सबसे बड़ा अपराध
चंद्रपुर में इरई नदी का प्रदूषण केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि सामूहिक संवेदनहीनता का उदाहरण बन चुका है।
➤ जब गंदा पानी खुलेआम नदी में छोड़ा जा रहा हो,
➤ जब लोग जहरीली हवा में जीने को मजबूर हों,
➤ और जब शिकायतों के बावजूद अधिकारी मौन हों—
तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अपराध प्रतीत होता है।
❗ अब सवाल सीधा है —
क्या MPCB और मनपा प्रशासन इस “जहरीले खेल” को रोकेंगे, या फिर चंद्रपुर की जनता को इसी तरह मौत के साए में जीने के लिए छोड़ देंगे ?










