■ अनेक नल उगल रहे हवा !
■ 9 वर्षों की देरी के बावजूद पेयजल संकट कायम
■ नियोजन 50 साल का, बीत गए 9 साल, दावा था – एक साल में पूरा करेंगे काम
चंद्रपुर।
चंद्रपुर महानगरपालिका के चुनावों और सत्ता स्थापना के बाद नवनियुक्त महापौर संगीता खांडेकर के लिए बीते 9 वर्षों से लंबित अमृत पेयजल योजना सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरेगी। चंद्रपुर शहर और भाजपा की सत्ता के लिए महत्वाकांक्षी समझी जाने वाली इस योजना की देरी के लिए वैसे तो अनेक कारण जिम्मेदार हैं, लेकिन अब इस योजना को पूरा करना ही पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि समय रहते इस योजना पर ध्यान नहीं दिया गया, तो अगले अप्रैल, मई और जून माह की भीषण गर्मी में पेयजल संकट मनपा की सत्ता के लिए रोष का कारण बन सकता है।
■ अमृत की विफलताओं पर गूंजेगा सदन
अधिकांश प्रभागों, बस्तियों और खासकर स्लम इलाकों में या तो नल कनेक्शन नहीं दिए जा सके हैं, और यदि नल दिए भी गए हों तो उनमें पानी के बजाय हवा ही बह रही है। अनेक बस्तियों के मार्गों पर मौजूद प्लास्टिक के सिंटैंक आज भी जलसंकट की गवाही देते हुए अमृत योजना को चिढ़ा रहे हैं। ऐसे में यदि महापौर संगीता खांडेकर ने इस मसले को गंभीरता से नहीं लिया, तो मनपा का सदन अमृत योजना की विफलताओं से गूंज उठेगा।
■ इतिहास के आईने में अमृत की दौड़
27 मई 2016 को नागपुर में तत्कालीन ऊर्जा मंत्री के समक्ष सर्वप्रथम अमृत योजना का प्रारूप रखा गया था। चंद्रपुर शहर की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए, उसकी तुलना में पेयजल आपूर्ति की दिक्कत को दूर करने तथा भविष्य में पेयजल के नियोजन के लिए अमृत योजना का प्रारूप तैयार किया गया। तत्कालीन विधायक नाना श्यामकुले ने तत्कालीन जलसंपदा मंत्री गिरिश महाजन के चंद्रपुर आगमन पर 25 मई 2016 को इसकी प्राथमिक मंजूरी प्राप्त की।
■ 2048 की जनसंख्या को बनाया लक्ष्य
मंजूरी के बावजूद सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि ईरई नदी के बांध से चंद्रपुर को पर्याप्त पेयजल कैसे दिलाया जाए। ईरई बांध ऊर्जा विभाग के अधीन होने से मामला अटक गया। इसका समाधान करने के लिए 27 मई 2016 को नागपुर में तत्कालीन ऊर्जामंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के साथ बैठक ली गई। भविष्य में वर्ष 2048 की चंद्रपुर की जनसंख्या का अनुमान लगाते हुए ‘अमृत योजना’ तैयार की गई। करीब 5 लाख 33 हजार 777 की जनसंख्या के हिसाब से प्रति वर्ष 32 क्यूबिक मीटर पानी आरक्षित करने की आवश्यकता बताई गई। फिलहाल आरक्षित पानी की तुलना में यह 16.32 क्यूबिक मीटर अधिक है।
■ शुरुआती लागत 231 करोड़
28 अगस्त 2017 को अमृत योजना का भूमिपूजन किया गया। चंद्रपुर शहर की आगामी 50 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार के अमृत अभियान (Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation – AMRUT) के अंतर्गत 231 करोड़ रुपये की स्वचालित जलापूर्ति योजना का भूमिपूजन तत्कालीन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने किया था। स्थानीय प्रियदर्शिनी सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बताया था कि इस योजना में 16 नई पानी की टंकियां बनाई जाएंगी। 527 किलोमीटर लंबी आंतरिक पाइपलाइन बिछेगी। नई पंपिंग मशीनें लगेंगी और एक ही स्क्रीन पर संचालित होने वाली स्वचालित जलापूर्ति प्रणाली विकसित की जाएगी।
■ एक वर्ष में योजना पूर्ण करने का दावा
यह भी दावा किया गया था कि अगले एक वर्ष में इस कार्य को पूर्ण करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इसके अलावा पानी के स्रोत के रूप में आमडी और धानोरा में बांध निर्माण कार्य भी शीघ्र शुरू करने का आश्वासन दिया गया था। इस अवसर पर तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की थी। इस मौके पर देवराव भोंगले, नाना शामकुले, अंजली घोटेकर, तत्कालीन जिलाधिकारी आशुतोष सलिल, राहुल पावडे, वसंतराव देशमुख, अनुराधा हजारे, जैनुद्दीन जव्हेरी, राखी कंचर्लावार, ब्रिजभूषण पाझारे आदि उपस्थित थे। एक दावा यह भी किया गया था कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती 25 दिसंबर 2018 को इस योजना का शुभारंभ होगा।
■ और आ गया अमृत 2.0 अभियान
27 अक्टूबर 2023 को राज्य सरकार के नगरविकास विभाग ने अमृत 2.0 अभियान को मंजूरी दी। इसके तहत चंद्रपुर महानगरपालिका को 270.13 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निधि जारी किया गया है। पूर्व अमृत योजना के अंतर्गत लगभग 400 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। अब अमृत 2.0 के तहत जारी निधि से पूर्व की लंबित परियोजनाएं पूरी की जाएंगी।
■ सत्ताधारियों के सुर भी अमृत-विरोधी
बीते 16 जून 2025 को भाजपा नेता सुभाष कासमगोट्टूवार ने स्वयं अपनी ही पार्टी की सत्ताधारी और महत्वाकांक्षी अमृत योजना की विफलताओं की पोल खोल दी थी। अधूरे कार्यों के कारण जनता को हो रही परेशानियों को लेकर उन्होंने मनपा अधिकारियों को शिकायत का ज्ञापन सौंपा था। साथ ही बैनर लेकर मनपा कार्यालय के समक्ष आंदोलन भी किया था। इस दौरान उन्होंने स्वयं स्वीकार किया था कि अधिकांश इलाकों में पेयजल की आपूर्ति नहीं हो रही है और खुदाई के बाद मरम्मत कार्यों में घोर लापरवाही बरती जा रही है। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि जब दोबारा मनपा पर भाजपा की सत्ता कायम हो चुकी है, तो क्या इस मामले में भाजपा कोई गंभीरता दिखा पाएगी ?










