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चंद्रपुर में अनंत चतुर्दशी से पहले भाजपा में “विघ्न”: पंडाल को लेकर विधायकों के समर्थकों में तनातनी

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Chandrapur: Pandal dispute in BJP before Anant Chaturdashi, tension among supporters 

चंद्रपुर, 2 सितंबर 2025: अनंत चतुर्दशी के अवसर पर चंद्रपुर शहर में गणेश विसर्जन शोभायात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन इस उत्सव के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में आंतरिक कलह ने माहौल को गरमा दिया है। शहर के मुख्य मार्ग पर लोकमान्य तिलक स्कूल के पास स्वागत पंडाल लगाने को लेकर विधायक सुधीर मुनगंटीवार और विधायक किशोर जोरगेवार के समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक और तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पहले भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष राहुल पावड़े ने विधायक सुधीर मुनगंटीवार के निर्देश पर उक्त स्थान पर अस्थायी स्वागत पंडाल स्थापित कर लिया था। इस पंडाल के लिए उन्होंने प्रशासन से अनुमति भी हासिल की थी। लेकिन, दूसरी ओर विधायक किशोर जोरगेवार के समर्थक और वर्तमान शहर भाजपा अध्यक्ष सुभाष कासनगोटूवार ने इस स्थान पर दावा ठोकते हुए उसी जगह पर अपना पंडाल लगाने की मांग की। इस मुद्दे ने दोनों गुटों के बीच तल्खी को हवा दी, और मामला सड़क तक पहुंच गया।

पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप  

विवाद बढ़ता देख दोनों गुटों के कार्यकर्ता लोकमान्य तिलक स्कूल के पास पंडाल स्थल पर आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया, और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा। पुलिस की मध्यस्थता के बाद मामला फिलहाल शांत हुआ है, लेकिन यह घटना शहर में चर्चा का विषय बन गई है।

“विघ्नहर्ता के सामने विघ्न” 

गणपति बप्पा को विघ्नहर्ता कहा जाता है, लेकिन इस बार चंद्रपुर में उनके स्वागत के लिए लगने वाले पंडाल ने ही भाजपा के लिए “विघ्न” खड़ा कर दिया है। यह पहली बार नहीं है जब चंद्रपुर में भाजपा के भीतर गुटबाजी सतह पर आई है। सूत्र बताते हैं कि मुनगंटीवार और जोरगेवार गुटों के बीच पहले भी कई बार तनातनी देखी गई है, और इस घटना ने एक बार फिर पार्टी की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस तरह की गुटबाजी न केवल पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि अनंत चतुर्दशी जैसे पवित्र उत्सव की गरिमा को भी प्रभावित कर रही है। एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “गणपति के स्वागत में एकता होनी चाहिए, न कि इस तरह का विवाद।”

हालांकि पुलिस के हस्तक्षेप से तत्काल तनाव कम हुआ है, लेकिन पंडाल विवाद का अंतिम समाधान अभी बाकी है। प्रशासन और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की ओर से इस मामले को सुलझाने की कोशिश की जा रही है ताकि विसर्जन शोभायात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

यह घटनाक्रम चंद्रपुर की सियासत में एक नया मोड़ ला सकता है। क्या भाजपा के नेता इस “विघ्न” को दूर कर पाएंगे, या यह विवाद और गहराएगा? यह सवाल शहरवासियों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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