■ रिश्वत मामले में RTO के आला अफसरों की क्यों नहीं हो रही SIT जांच ?
चंद्रपुर.
चंद्रपुर के प्रादेशिक परिवहन विभाग (RTO) में गत फरवरी 2025 को यहां के सहायक मोटर निरीक्षक एवं एक निजी कर्मचारी को रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई महाराष्ट्र – तेलंगना सीमा के लक्कड़कोट RTO चेक पोस्ट पर की गई थी। गैरकानूनी ढंग से RTO विभाग के अफसर-कर्मचारी यहां अवैध वसूली करते हुए पकड़े गये थे। अमरावती भ्रष्टाचार विरोधी विभाग (Anti-Corruption Bureau) द्वारा की गई इस कार्रवाई के मामले में चंद्रपुर जिले के RTO विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भी संलिप्तता होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद RTO विभाग, जिला प्रशासन, मंत्रालय, सरकार में बैठे नुमाइंदे, जनप्रतिनिधियों की ओर से SIT जांच की मांग क्यों नहीं उठ रही है ? क्या लक्कड़कोट चेक नाका है या वसूली नाका ? यहां कार्यरत अफसरों की संपत्ति की जांच और बड़े ट्रांसपोर्टरों के साथ उनके मीठे संबंधों को कभी उजागर नहीं किया जा सकेगा ? कार्रवाई के अभाव में अब भ्रष्ट अफसरों के हौसले बुलंद हो चुके हैं। इनके खिलाफ कोई समाचार मीडिया में न आने पाएं और किसी राजनीतिक दल की ओर से मामला नहीं उठाया जा सकें, इसके लिए रिश्वतखोर अफसर लामबंद हो चुके हैं। शिकायत की संभावना भांपते हुए झूठे अपराध दर्ज कराने की नीति अब RTO विभाग में पैठ बना चुकी है।
■ चंद्रपुर RTO विभाग का अतीत क्या कहता है ?
चंद्रपुर जिले के लक्कड़कोट चेक पोस्ट पर RTO निरीक्षक रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा गया था। सहायक मोटर वाहन निरीक्षक शिवाजी विभुते और उनके सहयोगी जगदीश डफड़े को ट्रक चालक से ₹ 500 की रिश्वत लेते रंगे हाथ अमरावती ACB ने पकड़ा था। यह रिश्वत ड्राइवर से इसलिए ली गई क्योंकि वाहनों के सभी दस्तावेज और वजन सही होने के बावजूद उनसे चेकपोस्ट पास कराने के लिए पैसे वसूले जा रहे थे। चेकपोस्ट पर बने भ्रष्ट कार्यों की प्रतिदिन शिकायतें मिल रही थी। एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी की शिकायत पर ACB ने जाल बिछाकर निरीक्षक और सहयोगी को रंगे हाथों पकड़ा था। यह चेकपोस्ट तमाम राज्यों के ट्रकों (छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, यूपी, तमिलनाडु) का मार्ग है। दस्तावेज सही होने पर भी ड्राइवरों को मुश्किलों और अवैध वसूली का सामना करना पड़ता रहा, जिससे दुर्घटना या देरी का जोखिम बढ़ता रहा। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश थी, लेकिन बीते अनेक माह से RTO के उच्चाधिकारियों पर भी शिकंजा कसना जरूरी होने के बावजूद सरकार ने इसकी अनदेखी की।
■ भ्रष्ट अफसरों के हौसले बुलंद
इस खुलासे से साफ होता है कि RTO के उच्चाधिकारियों में भी नियम-उल्लंघन और घूसखोरी का जमकर चलन है। हालांकि यह मात्र ₹ 500 का मामला था, लेकिन रोजमर्रा के वाहनों और पीड़ितों की संख्या से यह आंकड़ा प्रतिदिन लाखों की वसूली तक जा पहुंचता है। गरीब-व्यवसायी वर्ग की परेशानियों को दूर करने के लिए इस विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की SIT द्वारा जांच कराई जानी चाहिये। वरना RTO विभाग के भ्रष्ट अफसरों के हौसले बुलंद होते रहेंगे। जनप्रतिनिधियों को तत्काल इस विषय पर गंभीरता से विधानसभा में आवाज उठाना होगा।
■ “चोरी तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी”
RTO विभाग की हिम्मत अब इतनी बढ़ गई है कि मीडिया के कैमरे और लोकल राजनेताओं को देखते ही वे अपनी करतूतें छिपाने के लिए विवाद करने लगे हैं। इनके हौसले इतने बुलंद है कि स्वयं ही विवाद करते हैं और ऊपर से खुद थाने में पहुंचकर मीडिया तथा राजनेता के खिलाफ अपराध दर्ज कराने की कुनीति को अपना चुके हैं। ताजा एक मामले में इस विभाग के चंद अफसरों ने चंद्रपुर जिले के आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष मयूर राईकवार एवं पत्रकार अर्जुन सिंह धुन्ना के साथ अपमानजनक विवाद किया। पुलिस और सीबीआई की तरह इन्हें रोककर पूछताछ करने लगे। कैमरा छिनने की कोशिश भी की गई। जब इन्हें अहसास हुआ कि मामला बिगड़ सकता है तो RTO के अफसरों ने खुद ही थाने पहुंचकर नेता व पत्रकार के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज करा दी। मतलब साफ है कि इस विभाग का भ्रष्टचार जनता के सामने उजागर न होने पाएं, इसके लिए पूरा प्रशासन अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर मलाई के आड आने वाले हर किसी को निटपाने की रणनीति RTO में खेली जा रही है। समय रहते इस भ्रष्ट सिस्टम पर पाबंदी लगाने के लिए जिले के जनप्रतिनिधियों को अब मैदान में उतरना ही होगा।










