Home चंद्रपूर महिला दिवस : चंद्रपुर के महिलाओं की बदतर स्थिति

महिला दिवस : चंद्रपुर के महिलाओं की बदतर स्थिति

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🔴 5 साल में 109 माताओं व 2000 से अधिक बच्चों की मौत !
💥 सिस्टम की विफलता : जनप्रतिनिधि क्रिकेट, इवेंट, शादी-ब्याह, जन्मदिन आदि में व्यस्त रहेंगे तो समस्याएं कौन करेगा हल ?

चंद्रपुर.
एक ओर सरकार “बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं” के दावे करती है, तो दूसरी ओर चंद्रपुर जिले से सामने आए आंकड़े दिल दहला देने वाले हैं।
बीते 5 वर्षों में 109 गर्भवती माताओं की मौत,
72 महिलाओं की प्रसूति के दौरान जान चली गई,
1263 नवजात शिशुओं ने जन्म लेते ही दम तोड़ दिया,
और 0 से 5 वर्ष तक के 2009 मासूम बच्चों की मौत— 
🚨 ये आंकड़े किसी आपदा से कम नहीं, बल्कि व्यवस्था की भयावह नाकामी की कहानी बयान करते हैं।
📢 लेकिन हैरत की बात है कि जिले के जनप्रतिनिधि कहीं क्रिकेट खेलते नजर आते हैं तो कहीं बड़े इवेंट का आयोजन
📢 कभी शादी-ब्याह के मंच पर दिखते हैं तो कहीं कार्यकर्ताओं के जन्मदिन में
📢 इवेंट प्रेमी जनप्रतिनिधियों द्वारा क्या यह मौत का तांडव रोका जा सकेगा ?

🔴 सुविधाएं मौजूद… फिर भी मौत का सिलसिला क्यों ?
जिले में स्वास्थ्य ढांचे की बात करें तो तस्वीर कागजों पर मजबूत दिखाई देती है —
➤ 172 निजी अस्पताल, 126 दवाखाने, 73 प्रसूति गृह
➤ कुल 4298 बेड (निजी क्षेत्र)
➤ 14 सरकारी अस्पताल, 32 दवाखाने, 81 प्रसूति गृह
➤ कुल 2590 बेड (सरकारी)
➤ इलाज के लिए 659 डॉक्टर
👉 सवाल यही है — जब संसाधन हैं, डॉक्टर हैं, बेड हैं… तो आखिर माताएं और बच्चे क्यों मर रहे हैं ?

⚠ मेडिकल कॉलेज बना मौत का केंद्र ? 4 महीने में 111 नवजात की मौत
चंद्रपुर के कर्मवीर दादासाहेब कन्नमवार शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे व्यवस्था की पोल खोलते हैं।
➤ सिर्फ बीते चार महीनों में 111 नवजात शिशुओं की मौत
➤ साथ ही 4 माताओं की भी जान गई

📊 महीनेवार स्थिति:
* अक्टूबर 2025: 33 नवजात, 3 बाल मृत्यु
* नवंबर: 29 नवजात, 6 बालक
* दिसंबर: 22 नवजात, 2 बालक
* जनवरी 2026: 13 नवजात, 3 बालक
👉 ये आंकड़े किसी सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर प्रणालीगत विफलता की ओर इशारा करते हैं।

🔥 विशेषज्ञ डॉक्टर “नाम के”, इलाज कर रहे ट्रेनिंग डॉक्टर !
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि —
➤ अस्पताल में 15–20 विशेषज्ञ डॉक्टर होने का दावा
➤ लेकिन वास्तविक इलाज MBBS/MD के छात्र (ट्रेनिंग डॉक्टर) कर रहे हैं
➤ विशेषज्ञ डॉक्टर समय पर उपलब्ध नहीं होते
➤ कई डॉक्टर निजी अस्पतालों में व्यस्त रहते हैं

👉 परिणाम ?
⛔ समय पर इलाज नहीं
⛔ आपात स्थिति में देरी
⛔ नवजात और माताओं की मौत

अस्पताल के भीतर से ही यह बात सामने आई है कि
➡ “जब तक विशेषज्ञ डॉक्टर आते हैं, तब तक कई बार बहुत देर हो चुकी होती है।”

🧭 भीड़ बढ़ी, लेकिन व्यवस्था नहीं सुधरी
➤ चंद्रपुर के अलावा गडचिरोली, यवतमाल (वणी), आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सीमा से मरीजों की भीड़
➤ प्रसूति कक्ष में 80 बेड, लेकिन दबाव उससे कहीं अधिक
➤ नवजात शिशुओं के लिए 35–40 की क्षमता, लेकिन मरीज उससे ज्यादा
👉 यानी डिमांड ज्यादा, मैनेजमेंट कमजोर

📢 प्रशासन का जवाब—“कोशिश जारी है”
मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है:
> “24 घंटे सेवा उपलब्ध है, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम है, और नवजात मृत्यु दर कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।”
लेकिन सवाल यह है कि —
❗ क्या सिर्फ “प्रयास” काफी हैं, जब हर महीने मासूमों की मौत हो रही है ?

💥 स्वास्थ्य व्यवस्था या मौत का जाल ?
यह पूरा घटनाक्रम कई गंभीर सवाल खड़े करता है —
➤ क्या सरकारी अस्पतालों में जिम्मेदारी तय होती है ?
➤ क्या विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर कार्रवाई होती है ?
➤ क्या मरीजों की जान की कोई जवाबदेही है ?

✊  अंतिम बात : आंकड़े नहीं, ये इंसानी जिंदगियां हैं !
चंद्रपुर में जो हो रहा है, वह केवल “डेटा” नहीं है —
यह मां की कोख उजड़ने की कहानी है,
यह जन्म लेते ही बुझती सांसों का दर्द है,
यह व्यवस्था की असंवेदनशीलता का कड़वा सच है।

👉 अगर अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए,
तो यह आंकड़े और बढ़ेंगे…
और हर संख्या के पीछे एक परिवार बिखरता जाएगा।

❗ अब सवाल जनता का है —
“कब सुधरेगी स्वास्थ्य व्यवस्था ?”

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