Home चंद्रपूर चंद्रपुर मनपा चुनाव : लड़ाई तय, तराशे जा रहे राजनीतिक हथियार !

चंद्रपुर मनपा चुनाव : लड़ाई तय, तराशे जा रहे राजनीतिक हथियार !

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■ इच्छुक उम्मीदवारों की उम्मीदें परवान चढ़ने पर आमादा

■ कौन-कौनसे प्रभाग में कौन-कौन सेनापति बनकर उभरेगा ?

चंद्रपुर.
मनपा चुनाव के अब चंद माह बचे है। तमाम राजनीतिक दल अपनी चुनावी जमीन तलाशने में लगे है। हर गली-हर मोहल्ले, बस्ती व प्रभाग में इच्छुक उम्मीदवारों की उम्मीदें बढ़ गई है। परवान चढ़ता चुनावी बुखार अब आम जनता और नागरिकों के मनोधारणा को चिरते हुए राजनीतिक गलियारों में पहुंच चुका है। इच्छुक उम्मीदवार जहां एक ओर अपनी फिल्डिंग लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हर तरह के राजनीतिक अस्त्रों को तराशने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। लड़ाई तो तय है। बस अब इंतजार है कि कौन-कौनसे प्रभाग में कौन-कौन सेनापति बनकर उभरेगा ?

चुनाव आयोग के आदेश का इंतजार
सुप्रीम कोर्ट द्वारा लंबित स्थानीय स्वशासन संस्थाओं (स्थानीय निकायों) के चुनाव शीघ्र कराने का आदेश दिए जाने के बाद से ही चंद्रपुर में नगरसेवक बनने के इच्छुकों की उम्मीदें फिर से परवान चढ़ने लगी। चंद्रपुर महानगरपालिका के आगामी चुनाव, वर्ष 2017 की प्रभाग रचना के अनुसार हो सकते हैं। फिलहाल कुल 17 प्रभागों में 66 नगरसेवक चुने जाने हैं। जिनमें से 15 प्रभाग 4 सदस्यों वाले हैं और 2 प्रभाग 3 सदस्यों वाले हैं। यह व्यवस्था इस बार भी वैसी ही रहने की संभावना है। हालांकि, चुनाव आयोग के आदेश के बाद ही प्रभागों की सटीक रूपरेखा और आरक्षण रोटेशन स्पष्ट हो सकेगा।

2017 में हुए थे पिछले चुनाव
चंद्रपुर मनपा का पिछला चुनाव 19 अप्रैल 2017 को हुआ था। वर्ष 2022 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद से मनपा में प्रशासक राज लागू है। इस दौरान कोरोना की लहर, प्रभाग रचना को लेकर आए विभिन्न अध्यादेश, और उसके बाद ओबीसी आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने से चुनाव प्रक्रिया लटक गई थी। चुनाव मौजूदा प्रभाग रचना के अनुसार होंगे या उसमें बदलाव होगा, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। चूंकि चंद्रपुर का विस्तार हुआ है, इसलिए प्रभागों की संख्या बढ़ सकती है, इस संभावना को भी कई हलकों में उठाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया स्पष्ट आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने गत माह में चुनाव कराने का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत के नए निर्णय के अनुसार चुनाव पुरानी (2017 की) प्रभाग रचना और आरक्षण के अनुसार ही होंगे। ओबीसी आरक्षण को लेकर भी बांठिया आयोग से पहले की स्थिति को बहाल रखा जाएगा। इसलिए अब होने वाले चुनाव भी 2017 की ही रचना के आधार पर कराए जाने की संभावना है।

चंद्रपुर मनपा में 2017 में ऐसा था दलों का गणित
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) – 36
कांग्रेस – 12
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी – 2
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) – 8
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना – 2
शिवसेना – 2
प्रहार जनशक्ति पार्टी – 1
निर्दलीय – 3

2022 से प्रशासनिक नियंत्रण में है चंद्रपुर मनपा
वर्ष 2022 से चंद्रपुर महानगरपालिका में प्रशासक राज लागू है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, महानगर पालिका की प्रशासनिक मशीनरी चुनाव आयोग के निर्देशानुसार आरक्षण प्रक्रिया, रोटेशन और आगे की कार्रवाई शुरू कर चुकी है। चुनावी हलचलें पहले भी शुरू हुई थीं, लेकिन आरक्षण को लेकर विवादों में फंसने से चुनाव टल गए।

लड़ाई तय : समीकरण उलझे हुए
स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के चुनाव अब चंद माह में कराए जाने की घोषणा के बाद, चंद्रपुर महानगर पालिका में नगरसेवक बनने के इच्छुकों ने चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। हालांकि अभी तक नई प्रभाग रचना तय नहीं हुई है। दूसरी ओर संभावित चुनाव को ध्यान में रखते हुए, उम्मीदवारों और पैनलों की रणनीति वोटरों की संख्या, वोटों के समीकरण और विजय की संभावनाओं के आधार पर तैयार की जा रही है।

टिकट के लिए जोड़तोड़
अनेक इच्छुक उम्मीदवार अपने-अपने समीकरण गढ़ने लगे है। अपने अपने क्षेत्र में दबदबा निर्माण करने की बुनियाद पर रणनीति तय की जाने लगी है। किस पार्टी से टिकट लेना है? किस नेता से सिफारिश करवानी है? कौन-सा प्रभाग लाभदायक रहेगा? इन सवालों के बीच उम्मीदवारों की जोड़तोड़ चल रही है। कई दावेदार अब मैदान में सक्रिय होकर मतदाताओं से संपर्क बना रहे हैं और चुनावी संभावनाएं टटोल रहे हैं। इसका असर यह है कि चंद्रपुर की राजनीति में अब चुनावी रंगत चढ़ने लगी है।

अब तेज़ हो रही चुनावी तैयारी
वर्ष 2022 से चंद्रपुर महानगर पालिका में प्रशासक राज लागू है। बीते 3 वर्षों में चुनाव कब होंगे, इसको लेकर असमंजस था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब चुनाव कराने की स्थिति स्पष्ट होने लगी है। इस आदेश के बाद से ही संभावित उम्मीदवारों की चुनावी तैयारियों में तेज़ी आ गई है।

नई प्रभाग रचना बनी तो देरी तय
यदि नई प्रभाग रचना की जाती है, तो चुनाव आयोग को नई मतदाता सूची तैयार करनी होगी, जिसमें नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, और अंतिम सूची के अनुसार प्रभाग निर्धारण जैसे कार्यों में अधिक समय लग सकता है।

प्रमुख दलों में बढ़ रही दावेदारों की भीड़
इस बार कौन-सी पार्टी अकेले लड़ेगी और कौन गठबंधन में, यह अब तक स्पष्ट नहीं है। फिर भी हर दल ने अपनी तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। प्रमुख दलों के पास बड़ी संख्या में इच्छुक उम्मीदवार सामने आ रहे हैं। अधिकांश पार्टियों में टिकट के दावेदारों की भीड़ बढ़ रही है।

जनसमर्थन के लिए उम्मीदवार कर रहे घर-घर संपर्क
बीते कुछ वर्षों से जब चुनाव की कोई उम्मीद नहीं थी, तब अधिकांश संभावित उम्मीदवार गायब थे। केवल कुछ पूर्व नगरसेवक ही लगातार सक्रिय थे, जो क्षेत्रीय समस्याओं व विकास कार्यों से जुड़े रहे। अब अधिकांश इच्छुक उम्मीदवार एक या दो संभावित प्रभाग तय कर, वहाँ के वोटरों से सीधे संपर्क कर रहे हैं। इससे नए चेहरों की पहचान भी मतदाताओं के बीच बनने लगी है।

सहयोगी व प्रतिद्वंदी तय करना भी बना रणनीतिक प्रश्न
टिकट किस पार्टी से लेना है? कौन-सा प्रभाग अनुकूल है? मतों का समीकरण कैसे बनाएं? इन सब सवालों के साथ अब यह तय किया जा रहा है कि एक प्रभाग में चार सदस्य चुनने के लिए चार सदस्यीय पैनल कैसे बनाया जाए? सहयोगी उम्मीदवार कौन हो और मुख्य प्रतिद्वंदी को हराने की रणनीति क्या हो? यह सारी बातें अब उम्मीदवारों की गहन रणनीति का हिस्सा बन चुकी हैं।

प्रभाग रचना पर ही निर्भर है पूरा गणित
2022 में चंद्रपुर मनपा का कार्यकाल समाप्त हो गया था। तब से इच्छुक उम्मीदवार चुनाव की प्रतीक्षा कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या नई प्रभाग रचना बनेगी या पुरानी ही रचना कायम रहेगी। इसको लेकर असमंजस अब भी बना हुआ है। यदि नई रचना हुई, तो चुनाव की प्रक्रिया में देरी तय मानी जा रही है।

यदि प्रभाग बढ़े तो बढ़ेगी नगरसेवकों की संख्या
पिछली बार (2017) में 17 प्रभाग थे, जिनमें से 15 प्रभागों में 4 सदस्य और 2 प्रभागों में 3 सदस्य चुने गए थे। अगर इस बार प्रभागों की संख्या बढ़ी, तो नगरसेवकों की संख्या में भी वृद्धि तय है।

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